राजस्थान : बजट में दिखायी गहलोत ने मिशन 2023 की झलक

राजस्थान : बजट में दिखायी गहलोत ने मिशन 2023 की झलक


-रमेश सर्राफ धमोरा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2023 में होने वाले राज्य विधान सभा के चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। हाल ही में राजस्थान विधानसभा में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए प्रस्तुत किए गए बजट में इसकी साफ झलक देखने को मिली है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट को इतना लोक लुभावना बनाया है कि उसकी हर कोई सराहना कर रहा है। साथ ही अपने बजट के माध्यम से गहलोत ने अपने विरोधी दलों को साफ संकेत भी दे दिया है कि 2023 में हम फिर से प्रदेश में सरकार बनाएंगे। इसलिए आप लोग 2023 के बजाय 2028 के चुनाव की तैयारी कीजिए। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत के बाद गहलोत पर बड़ा राजनीतिक दबाव पड़ रहा था। राजनीतिक हलकों में अक्सर चर्चा होती रहती है कि अगले विधानसभा चुनाव से पूर्व गहलोत को हटाकर पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। इस बजट के माध्यम से मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने सभी राजनीतिक विरोधियों को साफ संदेश दे दिया है कि वह अपना कार्यकाल तो पूरा करेंगे ही बल्कि अगली बार भी सरकार बनने पर वह चैथी बार मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं। लोक लुभावना बजट पेश करें मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया है।

कुछ दिनों पहले जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय अधिवेशन में बोलते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि 2013 का विधानसभा चुनाव हम सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी के चलते हारे थे। आगे हम इस बात का पूरा ख्याल रखेंगे की सरकार को अपने कर्मचारियों की नाराजगी ना झेलनी पड़े। इसी के चलते गहलोत ने अपने बजट में सबसे बड़ा तोहफा भी राज्य सरकार के कर्मचारियों को ही दिया है। बजट में मुख्यमंत्री गहलोत ने सरकारी कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग को मानते हुए 2004 के बाद लागू नई पेंशन स्कीम को बंद कर पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की घोषणा कर कर्मचारियों के चहेते मुख्यमंत्री बन गये है।

मुख्यमंत्री को पता है कि किसी भी सरकार को बनाने व हटाने में सरकारी कर्मचारियों का बहुत बड़ा बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में इस बार वह किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को भी साधने का पूरा प्रयास करते हुए उनके वेतन में प्रतिवर्ष 20 प्रतिशत की वेतन बढ़ोतरी करने की भी घोषणा की है। जिससे प्रदेश में कार्यरत बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को भी बहुत लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीति में हमेशा नवाचार करने के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री रहते हुये वो हर बार कोई ऐसा नया कार्य करते हैं जो एक मिसाल बन जाता है। इस बार भी उन्होंने अलग से कृषि बजट पेश कर एक नई मिसाल कायम की है। गहलोत कृषि बजट पेश करने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री भी बन गए हैं। अपने बजट में गहलोत ने महिला मतदाताओं को साधने के लिए मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना में रजिस्टर्ड एक करोड़ 33 लाख महिलाओं को मुफ्त डाटा सहित मोबाइल देने की घोषणा की है।

गहलोत को पता है कि दो हजार अट्ठारह में मात्र आधा प्रतिशत अधिक मत मिलने पर ही उनकी सरकार बनी थी। ऐसे में वह महिला मतदाताओं को पूरी तरह अपने पक्ष में करना चाहते हैं ताकि अगले चुनाव में उन्हें बड़ा जनसमर्थन मिल सके। बजट में कोई नया कर भी नहीं लगाया गया है जिससे प्रदेश वासी राहत महसूस कर रहे हैं। कोरोना संकट को झेल चुके गहलोत ने अपने बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र पर विशेष फोकस रखा है उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज व नर्सिंग कॉलेज बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा भी बहुत से मेडिकल कॉलेज व चिकित्सा केंद्रों को अपग्रेड करना वह नए चिकित्सा केंद्रों की स्थापना करने की भी घोषणा की है।

मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने सबसे महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना में कैशलेस इलाज करवाने की प्रति वर्ष पांच लाख की सीमा को बढ़ाकर भी दस लाख रूपये कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इसमें बहुत से असाध्य रोगों का भी निशुल्क उपचार करना शामिल कर दिया है। इस योजना के पात्र परिवार के सदस्यों को पांच लाख रूपयों तक की दुर्घटना बीमा भी प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री गहलोत देश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने प्रदेश के सभी परिवारों को कैशलेस चिकित्सा के दायरे में शामिल किया है। समाज के कमजोर वर्गों के साथ ही मध्यम श्रेणी व उच्च श्रेणी के परिवारों को भी मात्र 850 रूपये देने पर इस कैशलेस उपचार की योजना में शामिल किया जाता है। इस तरह की योजना देश में अन्यत्र कहीं लागू नहीं की गई है। प्रधानमंत्री की भी निशुल्क चिकित्सा योजना में सिर्फ कमजोर तबके के लोगों को ही शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री गहलोत ने राजस्थान के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को उनके विद्युत बिल में अनुदान देने की घोषणा कर राहत प्रदान की है। विपक्षी दल राजस्थान में सबसे महंगी बिजली होने का आरोप लगाते रहते हैं। गहलोत की घोषणा के बाद अब बिजली दरों को लेकर सरकार पर लगने वाले आरोप बंद हो जाएंगे। गहलोत ने किसानों को उनके ट्यूबवेल पर लंबे समय से लंबित विद्युत कनेक्शन आगामी 2 वर्षों में पूरी तरह जारी करने का भी अपने बजट में प्रावधान किया है। वर्तमान में 2013 से अब तक किसानों के करीब तीन लाख 38 हजार कृषि बिजली कनेक्शन लाख लंबित चल रहे हैं। ऐसे में यदि अगले 2 सालों में सभी किसानों को विद्युत कनेक्शन मिल जाते हैं तो प्रदेश में सिंचाई का रकबा तो बढ़ेगा ही साथ ही किसानों को भी अधिक फसल लेने का मार्ग प्रशस्त होगा जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है। वह अपनी हर चाल सधे कदमों से चलते हैं। जिसका भान किसी को नहीं हो पाता है। मुख्यमंत्री गहलोत ने इस बार पेश किए गए प्रदेश के बजट के माध्यम से जहां प्रदेश के लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया है वहीं महिलाओं व किसानों को विशेष तवज्जो देकर उन्होंने एक बड़े वर्ग को साधा है। लोक लुभावना बजट पेश कर गहलोत ने कांग्रेस आलाकमान को भी अप्रत्यक्ष रूप से संदेश दिया है कि प्रदेश की राजनीति में आज भी वह उतने ही प्रासंगिक है। उन्हें प्रदेश के गांव, गरीब, दलित, पीड़ित की पूरी चिंता है। वह उनके प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहे हैं जिसकी झलक बजट में देखने को मिली है।

बजट के माध्यम से गहलोत ने अपने साथ जुड़े तमाम विधायकों को भी उनकी इच्छा अनुसार उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए विकास कार्य करवाने की घोषणा कर उन्हें अपने से जोड़े रखा है। विधानसभा चुनाव से पूर्व सरकार एक और बजट पेश करेगी। मगर उससे पूर्व ही गहलोत ने बहुत सारी जनता को लुभाने वाली योजनायें शामिल कर बजट पेश किया है। जो उनकी राजनीतिक सूझबूझ व दूरदर्शिता को ही दर्शाता है। गहलोत की मौजूदा कार्यप्रणाली दर्शाती है कि आने वाले समय में भी कांग्रेस की राजनीति में गहलोत सिरमौर बने रहेंगे।

रमेश सर्राफ धमोरा

(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार है। इनके लिए एक देश के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं।)

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