गोरक्षनगरी के विकास कार्यों को लगेंगे पंख, 180 करोड़ की लागत से बदल जाएगी गोरखपुर शहर की सूरत

गोरक्षनगरी के विकास कार्यों को लगेंगे पंख, 180 करोड़ की लागत से बदल जाएगी गोरखपुर शहर की सूरत



गोरखपुर शहर के विकास कार्यों की रफ्तार अब बढ़ेगी। शहर के 101 विकास कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों 163 विकास कार्यों का शिलान्यास किया था। विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री त्वरित आर्थिक विकास योजना में 180 करोड़ रुपये मिले हैं।


गोरखपुर महानगर में नगर निगम ने 101 विकास कार्यों की शुरुआत करा दी है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 180 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत वाले इन कार्यों का शिलान्यास किया था। नागरिकों की मौजूदगी में कार्यों का भूमि पूजन किया गया। नगर आयुक्त ने सभी ठीकेदारों को गुणवत्तापूर्ण कार्य समय से पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। नागरिकों से अपील की है कि वह गुणवत्ता पर खुद भी नजर रखें और कहीं गड़बड़ी दिख रही है तो इसकी सूचना जरूर दें।


नगर निगम क्षेत्र में 163 कार्यों का शिलान्यास हुआ है। मुख्यमंत्री ने सभी कार्यों को जल्द शुरू कराकर समय से पूरा कराने के निर्देश दिए थे। इसे लेकर नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने मुख्य अभियंता संजय चौहान और निर्माण विभाग के अभियंताओं के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद कार्यों का टेंडर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।



नगर आयुक्त ने द्वारिकापुरी कालोनी, टैगोर कालोनी, हरिजन बस्ती बनकटवां और राजेंद्र नगर में पहुंचकर सड़क व नाली निर्माण के कार्यों का भूमि पूजन किया। नगर आयुक्त ने आसपास के नागरिकों से मुलाकात कर विकास कार्यों में उनका सहयोग मांगा। कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास कार्यों से जन-जन को जोड़ने के निर्देश दिए हैं। जिनकी गली में सड़क और नाली बन रही है तो उनकी भी जिम्मेदारी है कि वह कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखें। कार्य पूर्ण हो जाने के बाद यदि कोई सड़क या नाली पर अतिक्रमण करता है या इसे क्षतिग्रस्त करने की कोशिश करता है तो इसकी सूचना तत्काल दें। ऐसे लोगों के खिलाफ नगर निगम कड़ी कार्रवाई करेगा।


नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि सोमवार को 99 करोड़ रुपये की लागत वाले 101 कार्यों का भूमि पूजन किया गया। कार्यों की गुणवत्ता पर नागरिक खुद भी नजर रखें और कहीं गड़बड़ी दिखे तो सूचित करें। सभी कार्य नागरिकों के लिए ही हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि, विकास की यात्रा कभी एकांकी नहीं होती है, इसमें हमेशा सामूहिकता का दर्शन होता है, हमें इसे चरितार्थ करना है।

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