'अखिलेश यादव और मायावती पिछड़े और दलितों के दुश्मन हैं', ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान

'अखिलेश यादव और मायावती पिछड़े और दलितों के दुश्मन हैं', ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान

ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अगर अखिलेश यादव और मायावती पिछड़े और दलित के हितैषी हैं, तो इन दोनों को इकट्ठे हो जाना चाहिए. यें दोनों वोट को अलग-अलग बांट देते हैं





सिराथू की विधायक पल्लवी पटेल ने 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर सभी विपक्षी दलों को एकजुट होने की बात कही है. इस पर बोलते हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि जहां परिवार में फूट होती है, वह विनाश की ओर जाता है. उन्होंने कहा कि यह पल्लवी पटेल का सार्थक बयान है, अच्छी सोच है, लेकिन दुर्भाग्य है कि जो पिछड़े और दलित की दुहाई देने वाले बड़े नेता हैं अखिलेश यादव और मायावती, दोनों आपस में खुद ही लड़ रहे हैं. यही पिछड़े और दलित के दुश्मन है.


ओमप्रकाश राजभर ने आगे कहा कि अगर यह पिछड़े और दलित के हितैषी हैं, तो इन दोनों को इकट्ठे हो जाना चाहिए. इन दोनों का वोट उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए है, लेकिन दोनों अलग-अलग बांट देते हैं और उसका नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है, जिसका उदाहरण 69,000 शिक्षक भर्ती है. जिसमें पिछड़े और दलित का नुकसान हुआ. 65,500 भर्ती में भी पिछड़े और दलित का नुकसान हुआ. 


राहुल गांधी की यात्रा में अखिलेश यादव को दिए गए निमंत्रण पर अखिलेश यादव का बयान कि कांग्रेस और भाजपाई एक जैसे हैं. इस पर ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि जब नेताओं को कांग्रेस की जरूरत पड़ती है तो समझौता हो जाता है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े थे, यह सभी जानते हैं कि अब कांग्रेस की जरूरत नहीं है, तो भाजपा और कांग्रेसी एक है. 


लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यालय पर ओमप्रकाश राजभर के एंट्री नहीं के बैनर पर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार के वक्त हाई कोर्ट ने 4 दिसंबर 2013 को एक आदेश दिया कि पिछड़े वर्ग के 27 परसेंट का जो आरक्षण है, उसका लाभ 12 जातियां उठा रही है, इसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार व्यवस्था बनाए उस वक्त मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे लेकिन इसको लेकर कुछ नहीं किया. 15 सितंबर 2013 को फिर एक आदेश आया था कि गरीब और अमीर के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़े, उसे भी नहीं किया गया. 

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