- घर पहुंचते ही बोली- अब मां की गोद में सिर रखकर सोना चाहती हूं
जेल से बाहर आने के बाद खुशी ने अधिवक्ता का आभार व्यक्त किया। इस दौरान वह बेहद खुश नजर आई। वहीं मां गायत्री तिवारी, पिता श्यामलाल व बहन नेहा ने न्याय व्यवस्था पर विश्वास जताते हुए कहा कि खुशी निर्दोष थी। उसे न्याय मिला, भले ही देर से। उन्हें भरोसा है कि एक न एक दिन अदालत खुशी को दोषमुक्त भी करेगी। कहा कि हम लोग गरीब है। हमारी हैसियत सुप्रीम कोर्ट तक जमानत के लिए जाने की नहीं थी। मेरे अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बहुत सहयोग किया है। उन्होंने बिना फीस लिए खुशी के मामले की शुरू से पैरवी की। हम लोग कभी इनका अहसान नहीं चुका सकेंगे।
खुशी की मां गायत्री देवी पहले से ही अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित की कार में बैठी थी। खुशी जेल के बाहर आने के बाद कार में पहुंची और मां से लिपट कर बिलख पड़ी। परिवार के लोगों ने मां-बेटी की किसी तरह संभाला। घर पहुंचते ही खुशी ने कहा कि अब मां की गोद में सिर रखकर सोना चाहती हूं।
बिकरू कांड की आरोपी खुशी दुबे पर दूसरे की आईडी से लिए गए सिम के उपयोग करने के मामले में बचाव पक्ष ने जमानत प्रपत्र पेश किए थे। जमानत मामले में पनकी व नौबस्ता थाने से प्रपत्रों की सत्यापन रिपोर्ट किशोर न्याय बोर्ड भेजी जा चुकी थी। गुरुवार को सेंट्रल बैंक पनकी से सत्यापन रिपोर्ट बोर्ड आने के बाद शुक्रवार को खुशी का रिहाई परवाना जेल भेज दिया गया था।
सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद पत्रावली अदालत में पेश हुई। इस पर अदालत ने सभी सत्यापन रिपोर्ट के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन किया तो कोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट के जमानत आदेश पर सेवन सीएलए व विस्फोटक अधिनियम की धाराओं का जिक्र नहीं है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि आदेश के पैरा-छह में सत्र विचारण संख्या का अंकन करते हुए कहा है कि इस मुकदमे में खुशी की जमानत मंजूर की जाती है। इस पर अदालत ने बचाव पक्ष से इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा। बचाव पक्ष के हलफनामा दाखिल करने के बाद अदालत से रिहाई परवाना जारी किया गया।
खुशी का अदालत से रिहाई परवाना जारी होते पुलिस सक्रिय हो गई। पहले अदालत में पुलिसकर्मी वर्दी व सादे कपड़ों में खुशी परिजनों से बातचीत कर टोह लेते रहे कि वे लोग खुशी को लेकर कहा जाएंगे। किसके साथ और किस वाहन से जाएंगे। इसके बाद पुलिस वालों ने खुशी की बहन व पिता को अदालत से एक आटो से जेल की तरफ रवाना किया। इसके बाद पुलिस लाइन गेट से जेल के बाहर तक पुलिस फोर्स तैनात कर दिया। पुलिस कर्मियों ने जेल के तरफ जा रहे वाहनों को बाहर ही रोक दिया।
अदालत से शाम लगभग 4:30 बजे रिहाई परवाना जारी कर दिया गया था। जेल गेट पर खुशी के परिजन शाम छह बजे पहुंच गए थे। अधिवक्ता भी शाम 6:15 बजे पहुंच गए। सात बजे खुशी की सुपुर्दगी संबंधी कागजातों को पूरा करने के लिए अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित कारागार के अंदर गए। रात करीब 7:30 बजे सारी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित के साथ खुशी जेल से बाहर आई। लगभग 10 मिनट में ही अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित की गाड़ी में अपने परिजनों के साथ कानपुर नगर स्थित घर के लिए रवाना हो गई।
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