अम्बेडकरनगर : पेशेवर शिकायतकर्ता बने सरकारी कर्मचारियों के लिए सिरदर्द , जिले की अवाम भी प्रभावित

अम्बेडकरनगर : पेशेवर शिकायतकर्ता बने सरकारी कर्मचारियों के लिए सिरदर्द , जिले की अवाम भी प्रभावित

  • जनसुनवाई/जन सूचना /सोशल मीडिया बना पेशेवरों के धनोपार्जन का जरिया 
  • अनावश्यक तथ्यहीन शिकायतों से तंग आ चुके सरकारी मुलाजिम
  • जिला अधिकारी अविनाश सिंह का ध्यान इन पर नियंत्रण हेतु कराया गया है आकृष्ट
  • एक पेशेवर शिकायतकर्ता ने दो माह में 90 से अधिक शिकायतें कर बनाया कीर्तिमान 






- संजय मौर्य

अम्बेडकरनगर। वह दिन दूर नही जब जिलेे के तमाम इलाको में कार्यरत सरकारी मुलाजिमो के आत्महत्या की खबरों से प्रिंट मीडिया के कागज, सोशल मीडिया और वेब मीडिया के पृष्ठ भरने लगेंगे।तात्पर्य यह है कि इस तरह की दुखद खबरें सुर्खियों में रहेंगी।  कहनेे को तो सोशल मीडिया भ्रष्टाचार जैसी कुरीति को मिटाने के लिए दृ़ढ़ संकल्पित है। लेकिन जब सोशल मीडिया का व्हाट्सएप् मंच एक ही खबर को बार-बार वायरल/प्रसारित करता है तब यह सुस्पष्ट हो जाता है कि वायरल/प्रसारित खबर या तो असत्य थी या फिर सम्बंधित के खिलाफ कोई कार्यवाही उच्च सरोकारियो द्वारा नहीं की गई । वैसे अब तो जिले केे हर आम खास की सोेच भी सोशल मीडिया के प्रति नकरात्मक बनने लगी है। इस बाबत अधिसंख्य लोगो का कहना है कि सोशल मीडिया से जुड़े लोगो ने इस माध्यम का धनादोहन(ब्लैकमेलिंग) का जरिया बना लिया है और अनेंको लोग सोशल मीडिया के जरिए धन उगाही करने लगे हैं। 


ठीक इसी तरह सरकारी विभागीय मामलो सेे सम्बंधित बेेबसाइट जनसुनवाई/ जनसूचना आदि के जरिए अनावश्यक शिकायते करके कतिपय पेशेवर लोेगो ने सरकारी मुलाजिमो का जीना दूभर कर दिया है। जिले में कई ऐसे लोग सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेलिंग रहे हैं और इस तरह ब्लैकमेलिंग कर पैसा कमाने वाले लोगों का कई गिरोह इस जिले में सक्रिय बताया जाता है।  इस गिरोह की मॉनिटरिंग सोशल मीडिया माफिया द्वारा किया जाता है। 

बताया जाता है कि जिले में सक्रिय इस तरह के गिरोह के सदस्यों द्वारा चुनिंदा विभागों को टारगेट किया जाता है और भ्रष्टाचार उन्मूलन के नाम पर व्हाट्सएप्प जनसूचना, जनसुनवाई तहसील दिवसों आदि में अनावश्यक शिकायतें एक नहीं, अनेकों बार की जाती है। इन पेशेवर शिकायतकर्ताओं के बारे में बताया गया है कि यह लोग विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों को सिर्फ ब्लैकमेलिंग के जरिए धन उगाही करते हैं । मिली जानकारी के अनुसार, इन पेशेवर शिकायतकर्ताओं की शिकायत पर जांच करने वाली टीम खाली हाथ लौटती है। जांच टीम नेतृत्च द्वारा जब भी मामले की शिकायतों का मौका-मुआयना किया जाता है और शिकायतकर्ता को बुलाया जाता है, तब ये तथाकथित शिकायतकर्ता जांच टीम अधिकारी व कर्मचारियों से मिलने कतराते हैं।


इस समय जिले में पेशेवर शिकायतकर्ताओं की बाढ़ सी आई है कहा जाता है कि यह लोग जनसूचना/ जनसुनवाई आदि के जरिए कतिपय विभागों के लोगों और सरकारी अहलकारों के कथित भ्रष्टाचार के बारे में उच्चाधिकारियों को शिकायती संदेश भेजते रहते हैं। इसके परिणाम में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जीरो टॉलरेंस के दृष्टिगत सरकारी अधिकारी शिकायतों की जांच करने के लिए बाध्य होते हैं।


अंबेडकरनगर जिले में ऐसा मामला इस समय काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें टांडा तहसील क्षेत्र में कुछ चुनिंदा गांव के विकास में हुए कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने की नीयत से पेशेवर शिकायतकर्ताओं द्वारा लगभग दो माह की अवधि में सैकड़ों बार शिकायतें की गई हैं। संबंधित अधिकारियों और जांचकर्ताओं द्वारा जांच के समय जब इन्हें बुलाया गया तो यह लोग मौके पर जाना भी गवारा नहीं समझा। जांच की टीम की वापसी उपरांत इन शिकायतकर्ताओं ने दर्जनों बार इस बात की शिकायत किया कि उनके द्वारा की गई शिकायतों की अनदेखी की गई। 


टांडा ब्लाक के हिथूरी गांव निवासी दो पेशेवर शिकायत कर्ताओं ने  शिकायतों का कीर्तिमान स्थापित किया है। चर्चा है कि इन दोनों ने यूट्यूब चैनल के कई तथाकथित सोशल मीडिया परसंस का सहयोग लेकर गांव के प्रधान, सचिव और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों का भयादोहन करना शुरू किया। इनके द्वारा खबरें सोशल मीडिया में अनेकों बार वायरल की गई और सरकारी वेबसाइट जनसुनवाई पोर्टल पर भी अपलोड की गई।  लगभग दो माह में इन पेशेवर शिकायत कर्ताओं द्वारा अब तक 90 से अधिक बार हिथूरी व आसपास के कई गांव की अनावश्यक शिकायतें की गई । जीरो टॉलरेंस के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय जांच टीम  ने मौका मुआयना किया तो उन्हें वहां हकीकत कुछ और ही मिली। मतलब यह है कि इन पेशेवरों द्वारा गांव के विकास से संबंधित जो भी शिकायतें की गई थी वह निराधार पाई गई। 


टांडा ही नहीं जनपद के सभी पांचों तहसीलों में कार्यरत सरकारी अधिकारी व कर्मचारी इन पेशेवर ब्लैकमेलर्स के क्रियाकलापों से तंग आ चुके बताए जाते हैं। कई तो अवसाद ग्रस्त हो चुके हैं।


हिथूरी गांव के एक पेशेवर शिकायत कर्ता और उसके सहयोगी कथित यू ट्यूब चैनल के पत्रकार के रवैए से टांडा ब्लॉक (खंड विकास कार्यालय) के विकास अधिकारी और अन्य कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।


इस समय चूंकि जिले की कमान सख्त, ईमानदार एवम् सुलझे हुए आईएएस अधिकारी अविनाश सिंह के हाथों में है इसलिए जिले के हर आमखास ने अपेक्षा किया है कि टांडा तहसील/ब्लॉक अंतर्गत हिथूरी गांव के दोनों पेशेवर शिकायत कर्ताओं के साथ ही जनपद में यत्र तत्र सर्वत्र पाए जाने वाले कुकुरमुत्ता ब्रांड तथाकथित शिकायतकर्ताओ को चिन्हित करा कर उनके विरुद्ध आवश्यक सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराएं । यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब इन पेशेवर शिकायतकर्ताओं/सोशल मीडिया सहयोगियों के तथ्यहीन व अनावश्यक शिकायतों और प्रकाशित व प्रसारित होने वाली खबरों के प्रभाव से ये लोग अवसाद ग्रस्त हो जाएंगे। उनके सामने आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। यह तत्व समाज के उत्थान से कोई मतलब नहीं रखते हैं। इन्हें तो ब्लैक मेलिंग के माध्यम से पैसा कमाना है । जो इनके लिए सबसे बड़ा मिशन हैं।




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