जिलाधिकारी अविनाश सिंह से औचक निरीक्षण किए जाने की मांग
(दास्तान-ए-बैनामा दफ्तर अकबरपुर)
- सत्यम सिंह
अंबेडकरनगर के सदर तहसील अकबरपुर के बैनामा दफ्तर में चल रही मनमानी की इस समय व्यापक चर्चा है। यदि जिले के सरकारी महकमे में कहीं राम राज पूरी तरह से व्याप्त है, वह है सब रजिस्ट्रार कार्यालय अकबरपुर। जहां, चतुर्थ श्रेणी से लेकर उच्च पदाधिकारी तक मनमानी कर रहे हैं। कार्यालय में समय पर नहीं पहुंचते हैं। इस तरह की शिकायतें करने वालों ने मीडिया का सहारा लिया है।
अकबरपुर बैनामा दफ्तर में अधिकारी, निबंधन लिपिक, कर्मचारी और दलालों की मिलीभगत से कमीशनखोरी जैसे भ्रष्टाचार का बोलबाला बढ़ गया है। पिछले लगभग 10 - 12 महीनों से इस दफ्तर में राम राज सा व्याप्त है।
बताया गया है कि भूखंडों, मकानों की रजिस्ट्री, एग्रीमेंट और वसीयतनामा को रजिस्टर्ड करने के नाम पर मासूम(क्रेताओं) से जमकर आर्थिक वसूली की जाती है। इनका भरपूर शोषण किया जाता है। इस पूरे खेल को बैनामा दफ्तर के दो निबंधन लिपिक बखूबी खेलते और खिलाते हैं। इस कार्य में इन बाबूओं का बैनामा दफ्तर व इर्द-गिर्द सक्रिय दलाल का पूरा सहयोग प्राप्त होता है।
इन बाबूओं द्वारा क्रेता और विक्रेताओं से संपत्ति की मालियत के बारे में अनाप-शनाप बताकर पारंपरिक रूप से निर्धारित कमीशन का प्रतिशत 02 से 04 गुना कर दिया जाता है। ये बाबू बड़े साहब के नाम पर अंदर का खर्च बताकर क्रेताओं से वसूलते हैं। इस अंदर के खर्च के बारे में ये बाबू कहते हैं कि यह जब तक सब रजिस्ट्रार नहीं पहुंच जाएगा, तब तक बैनामा अपूर्ण ही रहेगा। साहब अंदर का खर्च पाते ही खुश हो जाएंगे और आंख मूंदकर दस्तावेज के पन्नों पर अपना हस्ताक्षर कर देंगे।
जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर बैनामा दफ्तर के कई कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि ये सब रजिस्ट्रार के चहेते और कमाऊ पूत हैं। जब तक मनवांछित कमीशन की धनराशि नहीं पाते हैं, तब तक क्रेता और विक्रेता से अनेकानेक खामियां बताकर बैनामा कराने की कार्यवाही ही नहीं पूरी करते हैं। ये कमाऊ पूत कमीशन धनराशि पा जाने पर रजिस्ट्रेशन में सभी खामियो/कमियों को ओके बता देते हैं।
अकबरपुर बैनामा दफ्तर के हाकिम चैंबर के इर्द-गिर्द दलालों का जमघट लगा रहता है। जैसे ही, कोई भी व्यक्ति बैनामा दफ्तर में रजिस्ट्री कराने पहुंचता है, ये लोग उससे तरह-तरह की बातें कहकर अपने चंगुल में फंसा लेते हैं। इन फंसे हुए व्यक्तियों से ये दलाल लोग काम जल्द कराने का प्रलोभन देते हैं। इसके लिए एक से दो परसेंट कमीशन की धनराशि तय करते हैं।
सूत्रों द्वारा बताया गया है कि इस दफ्तर में लेखपत्रों का निस्पादन निबंधन लिपिक किस आधार पर कर रहे हैं। क्या जमीन की रजिस्ट्री करने का अधिकार निबंधन लिपिक को है।
यह सब जांच का विषय है। अकबरपुर बैनामा दफ्तर में सब रजिस्ट्रार, कमाऊ पूत बने निबंधन लिपिक, उनके परम सहयोगी अनगिनत संख्या में दलाल सभी मिलकर संपत्तियों के क्रेता और विक्रेता का कर रहे हैं भरपूर शोषण। इसके अलावा इस दफ्तर के चारों तरफ फैले हुए असंख्य दस्तावेज लेखक स्वंय और विभाग के कर्मचारी व अधिकारियों को कमीशन के रूप में लाखों रूपए कमाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
यह भी बताया गया है कि यहां दस्तावेज लेखकों के एक दर्जन ही लाइसेंस हैं, यानि, केवल 12 लोग ही डीड राइटिंग कर सकते हैं। परन्तु, यहां 50 से 60 लोग दस्तावेज लिखने का कार्य दलाली के माध्यम से कर रहे हैं। ये दलाल क्रेता और विक्रेताओं को भ्रम की स्थित में डालकर दस्तावेज लेखकों के पास डीड राइटिंग के लिए ले जाते हैं, जहां मन माफिक कमीशन लेकर स्टांप पत्रों पर दस्तावेज लिखवाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में अकबरपुर बैनामा दफ्तर के कमाऊ पूत निंबधन लिपिक द्वारा ही बैनामा/रजिस्ट्री का कार्य किया जा रहा है। बैनामा/रजिस्ट्री जैसे कार्य में खूब लेन-देन किए जाने की भी जोरदार चर्चा है।
प्रबुद्ध वर्ग के कई लोगों और समाजसेवियों ने बैनामा दफ्तर अकबरपुर की तटस्थ कंपनी द्वारा जांच करवाए जाने की मांग की है। इन लोगों ने कहा है कि, यदि जांच हो जाए तो प्रदेश स्तरीय भ्रष्टाचार में अव्वल अकबरपुर बैनामा दफ्तर में अब तक हुए और हो रहे घपले-घोटालों का खुलासा हो सकता है।
इन सबों ने जिलाधिकारी अविनाश सिंह का ध्यान आकृष्ट कराते हुए माग किया कि किसी भी कार्य दिवस में बैनामा दफ्तर का औचक निरीक्षण करें। ऐसा करना अब जन हित में बहुत ही जरूरी हो गया है।
