अकबरपुर तहसील में दो महिलाओं ने आत्मदाह का किया प्रयास, जानिए पूरा मामला

अकबरपुर तहसील में दो महिलाओं ने आत्मदाह का किया प्रयास, जानिए पूरा मामला



अंबेडकरनगर। अकबरपुर तहसील के माधोपुर  गांव में लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद में  न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए महिला ने संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान ही तहसील सभागार के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया।


हालांकि यहां उपस्थित पुलिस एवं राजस्व कर्मियों ने महिला के हाथ केरोसिन की बोतल और माचिस छीन लिया। अचानक शोरगुल और महिलाओं के स्वयं पर केरोसिन डालकर आग लगाते देख अफरा-तफरी मच गई।


शनिवार अकबरपुर तहसील प्रांगण में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस पर अपनी फरियाद लेकर आई माधोपुर गांव की गीता और संगीता का कहना है कि 40 वर्ष पहले भूमि का बनामा लिया गया था। उक्त भूमि पर गांव के विपक्षी ने कब्जा कर लिया है। उप जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर उक्त भूमि की वर्ष 2018 में हदबरारी कराई गई। 


इसमें विपक्षी को लाभ पहुंचा और गीता व संगीता के घर के सामने की भूमि प्रभावित हुई। तत्समय तहसील प्रशासन ने उक्त भूमि पर पत्थर लगा दिया।


वहीं तहसील अकबरपुर के अभिलेखों में एसडीएम के आदेश पर नक्शा परिवर्तन भी कर दिया गया। तहसील प्रशासन ने उक्त आदेश में कहा कि कोई आपत्ति नहीं मिली है, जबकि गीता व संगीता ने इस पर तत्समय से अभी तक आपत्ति जताई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।


एसडीएम पवन जायसवाल ने बताया वर्ष 2018 में हुई हदबरारी और नक्शा परिवर्तन के आदेश पर तत्समय एसडीएम न्यायालय में अपील करनी चाहिए थी। ऐसा नहीं किया गया।


दूसरा मामला आबादी की भूमि से जुड़ा एवं न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे में दोनों मामलों का निस्तारण प्रशासनिक स्तर पर नहीं किया जा सकता है। 


एसडीएम पवन कुमार जायसवाल ने बताया कि पिछले संपूर्ण समाधान दिवस में इस शिकायत में डीएम के आदेश पर तहसीलदार से स्थलीय जांच कराई गई थी।


पहले मामले में एसडीएम न्यायालय में वाजदायर करके और आबादी के मामले में सिविल न्यायालय में प्रभावी पैरवी से पीड़ित पक्ष अनुतोष प्राप्त कर सकते हैं। तहसीलदार की उक्त रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भूमि विवाद में पीड़ित पक्ष हदबरारी से अहसमत है।


वहीं वर्ष 2018 में एसडीएम के न्यायालय से हुए आदेश में स्पष्ट किया गया किआपत्तिकर्ता के उपस्थित नहीं होने पर नक्शा परिवर्तन किया गया है। वहीं दोनों पीड़ित महिलाएं चीख-चीखकर कहती रहीं कि उन्होंने गलत हदबरारी पर आपत्ति जताई थी। नक्शा परिवर्तन से पहले उन्हें सूचित नहीं किया गया।


इस प्रकरण से पता चलता है कि राजस्व कर्मियों की मनमानी और गड़बड़ी पर पर्दा डालने के अलावा भूमि विवादों को सक्रियता से सुलझाने में अधिकारी शिथिल हैं।


 हदबरारी में विपक्षी के असंतुष्ट होने पर उक्त मामले की तह में जाना आवश्यक नहीं समझा गया। यह मामला पिछले पांच साल से राजस्व विभाग के कर्मचारियों की वजह से चल रहा है।


अंततः शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस पर पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने अकबरपुर तहसील परिसर में आत्मदाह का प्रयास किया।

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