अम्बेडकरनगर में गैंगरेप के एक गंभीर मामले में पुलिस की लीपापोती और ढिलाई ने एक युवती की आत्महत्या की घटना को जन्म दे दिया है, जिसने महिला सुरक्षा के प्रति प्रदेश सरकार के दावों की पोल खोल दी है। जिले के राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र में एक 21 वर्षीय युवती को तीन युवकों ने बहला-फुसलाकर एक आरोपी के घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपियों ने उसे एक जूनियर हाईस्कूल के पास छोड़ दिया।
युवती ने किसी के फोन से अपने परिवार को सूचना दी, लेकिन उसकी शर्म के कारण वह घर नहीं लौट सकी। पिता ने किसी तरह समझा-बुझाकर उसे घर ले लिया। इसके बाद युवती ने 1090 पर इस घिनौनी घटना की सूचना दी। लेकिन, मानसिक रूप से अत्यंत आहत युवती ने घर लौटने के कुछ ही घंटों बाद आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान, पुलिस ने तहरीर को बदलने का प्रयास किया। आरोपी गैंगरेप के मामले को छिपाने के लिए, पुलिस ने मृतका के पिता से एक होटल में जाकर तहरीर लिखवाई और गैंगरेप की धारा को तहरीर से हटा दिया, केवल आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया। यह कदम आरोपियों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया।
मामला जब बढ़ा और परिजनों ने गैंगरेप की धाराओं को लागू करने की मांग की, तो राजनैतिक दबाव के चलते देर रात गैंगरेप की धारा जोड़ी गई। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।
इस बीच, गैंगरेप के आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया में एक नया मोड़ आया। जब आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था, तब वे पुलिस की जीप से कूदकर भागने की कोशिश करने लगे। भागते समय उनके पैर में चोट लग गई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को फिर से गिरफ्तार कर जिला अस्पताल में भर्ती कराया, और उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
यह घटना न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि महिला अपराधों के प्रति उसकी संवेदनहीनता को भी उजागर करती है। स्थानीय पुलिस द्वारा गैंगरेप के मामले में की गई लीपापोती और युवती की आत्महत्या ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। इस मामले ने समाज और प्रशासन दोनों को एक गंभीर संदेश दिया है कि महिला सुरक्षा और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।
