निजी अस्पतालों की लापरवाही से नहीं थम रहा मौत का सिलसिला, फिर एक प्रसूता की गई जान

निजी अस्पतालों की लापरवाही से नहीं थम रहा मौत का सिलसिला, फिर एक प्रसूता की गई जान




अम्बेडकरनगर। जलालपुर नगर स्थित अयोध्या हॉस्पिटल में एक और दर्दनाक घटना ने निजी चिकित्सालयों में हो रही लापरवाही का गंभीर चेहरा उजागर कर दिया। प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती की गई गुंजन नामक प्रसूता की ऑपरेशन के बाद तबीयत खराब हो गई, जिसे समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। घटना ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।


पैसों की मांग के बाद बिगड़ी स्थिति


पीड़िता के पति संजय कुमार, निवासी कंजा इस्माइलपुर, थाना जलालपुर, ने बताया कि शनिवार की दोपहर को उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा के चलते अयोध्या हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद ढाई बजे एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ। लेकिन उसी समय डॉक्टर राजेश कुमार यादव ने संजय से 50,000 रुपये की मांग की, जिसे संजय ने किसी तरह इकट्ठा करके डॉक्टर को सौंप दिया।


हालांकि, ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद, रात 8 बजे गुंजन की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। जब इस बारे में अस्पताल के कर्मचारियों को सूचित किया गया, तो उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। संजय ने बताया कि लगातार गुजारिशों के बावजूद अस्पताल कर्मियों ने सही समय पर ध्यान नहीं दिया, और जब स्थिति गंभीर हो गई, तब उसे निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर रेफर किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और गुंजन ने दम तोड़ दिया।


डॉक्टर की फरारी और हंगामा


प्रसूता की मौत के बाद, गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। डॉक्टर राजेश कुमार यादव, जो इलाज के दौरान परिजनों को छोड़कर भागने लगे थे, उन्हें लोगों ने पकड़ने का प्रयास किया। बाद में डॉक्टर ने सभी को अपनी गाड़ी से फिर से अस्पताल वापस ले आया। वहां पहुंचने के बाद अस्पताल के कर्मचारी और संचालक ताला बंद करके फरार हो गए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।


पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई, मुकदमा दर्ज


सूचना पर पहुंचे कोतवाल संतोष कुमार सिंह ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उन्होंने लोगों को शांत कराया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। संजय कुमार की तहरीर के आधार पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।


स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल


इस घटना ने एक बार फिर से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा को उजागर किया है। लोगों का आरोप है कि नगर में दर्जनों फर्जी अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। लगातार हो रही मौतों के बावजूद विभाग की चुप्पी पर लोग सवाल उठा रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते विभाग ने इन फर्जी अस्पतालों पर कार्रवाई की होती, तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।


फिलहाल पुलिस द्वारा इस मामले में कार्रवाई जारी है, लेकिन यह घटना निजी अस्पतालों में हो रही लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी की ओर इशारा करती है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या खुलासा होता है और दोषियों को कब तक सजा मिल पाती है।

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