सलाम "करनजीत कौर बोहरा" 'सन्नी'
| Rainbow News - Jan 12 2019 4:06PM

मैं भारत की बेटी करनजीत कौर बोहरा का अभिनंदन करता हूं। मैं देश की इस बेटी में एक ईश्वरीय गुण देखता हूं। बेशक मैं उनके अब तक के जीवन के बहुत हिस्सों से कतई सहमत न हूं और “अच्छाई का चोला ओड़ने“ सार्वजनिक रुप से इसकी निंदा करता हूं मगर समाज में अलग देखने की मेरी आदत मुझे करनजीत कौर पर लिखने को मजबूर कर रही है। पंजाब से कनाडा तक का सफर करने वाले कौर परिवार की इस बेटी को आज पूरा देश जानता है। विदेशों में भी करनजीत कौर बोहरा को लोग फोटो देखते ही पहचान लेते हैं मगर “ मेरी दृष्टि में इस वक्त“ वो विदेश वाली करनजीत कौर नहीं है। मैं एक सरल सहज और सरस फोटो देखकर लिखने को मजबूर हुआ हूं। भारतीय सिनेमा में करनजीत कौर का आगाज किस फिल्म से हुआ मुझे एकदम याद नहीं मगर ये फिल्में करनजीत के बदलते सफर का गवाह बनी हैं।

ये फिल्में भारतीय फिल्म जगत की दिलेरी भी सामने लाती हैं। इन फिल्मों को देखने वाले अच्छे बुरे अवचेतन वाले सभी तरह के दर्शक मेरे लिए सम्मान के पात्र हैं। इन फिल्मों ने करनजीत कौर को भारत को कुछ लौटाने का मौका दिया है। वे अपनी ए बी सी डी टाइप एक्टिंग के शुरुआती अंदाज के बाद भी मेरी श्रद्धा की पात्र हैं। हिन्दी सिनेमा की इस एक्ट्रेस ने एक बदलाव की शुरुआत की है। पोर्न इंडस्ट्री से सिनेमा का सशक्त मंच अपनाने के लिए भारत आईं सन्नी लियोनी ने अपने आप को कितना बदला होगा मैं सोच भी नहीं पा रहा हूं। वे ऐसा कर पाई होंगी क्योंकि ऐसा करने की चाह उनमें अंदर से होगी। इस अंदर की चाह ने सन्नी लियोनी को नाम से न सही मगर अंदर से करनजीत कौर बनाने में बड़ा रोल अदा किया है। बेशक देश विदेश का बहुसंख्यक पुरुष वर्ग अपनी विभिन्न अंर्तमन की आकांक्षाओं और वासनाओं की दृष्टि से इस नवोदित अभिनेत्री की फिल्में देखता होगा मगर यकीकन ये फिल्में अब ऐसी वैसी नहीं हैं।

सन्नी लियोनी की फिल्में भारतीय सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट से भारत के लोग “चौड़़े में देखते“ हैं। यहां अब “ वो पुरानी पर्देदारी“ नहीं रही यही सन्नी की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वो अभिनय कितना जानती हैं मैं कह नहीं सकता मगर वो अभिनय सीखना चाहती हैं ये बात पक्का है। सन्नी शाहरुख अभीनीत रईस जैसी पिछली कुछ फिल्मों में नृत्य के लिए अपना प्रेम दिखाया है। वो फिल्म में भड़कीला नृत्य करते समय किस लिबास में थी इसके लिए केवल सन्नी को ही दोष नहीं दिया जा सकता। भारत के रंगीले युवा निर्देशकों के अंतर्मन में क्या क्या पक रहा है ये उनकी फिल्मों के जरिए पर्दे पर खूब सामने आ रहा है।

सेंसर बोर्ड का पर्दा न होता तो उनके “मन- मंदिर“ का पर्दा दर्शकों के समक्ष ख चुका होता। इन निर्देशकों को हालांकि इस बात के लिए बहुत बहुत बधाई कि उन्होंने बदलाव को आतुर दिख रहीं सन्नी को अपनी फिल्मों में मौका दिया है। इसके पीछे उनकी अंदर की विभिन्न वजहों का हिसाब- किताब वे जानें मगर कनाडा में जीवन का बड़ा हिस्सा गुजारने वाली सन्नी भारतीय सिनेमा में अभिनय कर रही हैं।ये दुनिया भर के “ भोगवादी समाज“ पर करारा तमाचा है। “वो देश“ भी जिनके शासन तले ये “ नीली फिल्मों का संसार“ देश भर में पहुंचा है। करनजीत कौर इस भारत में एक निर्दोष शिशु के रुप में ही पैदा हुई होगी और उसने भी खिलौनों और गुड़डे- गुड़ियों से खेला होगा। उसका भी सारे बच्चों जैसा बचपन रहा होगा। किशोर और यौवन के समय “आगे का मानस“ सन्नी ने कैसे बनाया और क्यों बनाया इस बात को मैं यहीं छोड़ता हूं मगर भारतीयों ने हिन्दुस्तानी सिनेमा में सन्नी का स्वागत किया है इसके लिए मैं सहिष्णु भारतीय समाज और माया नगरी मुंबई का वंदन अभिनंदन करता हूं।

हम इस चर्चित नवोदित अभिनेत्री की असल व निर्दोष अदाकारी पर्दे पर देखेंगे ऐसा देश के नारीवादी और तमाम खुले दिमाग के लोग तो हुंकार के साथ तुरंत ही कह सकते हैं। “भीड़ की सन्नी ने परवाह न करते हुए मुंबई में कदम रखा होगा वे आगे भी अपनी लकीर उंची और अच्छी खीचेंगी ऐसा अच्छाई देखने के शौकीन उनसे आशा करेंगे। “अंत में सन्नी पर कलम चलाने की सबसे बडी़ वजह बताता चलता हूं।“ पोर्न इंडस्ट्रीज की पहचान से भारतीय सिनेमा में कदम रखने वाली सन्नी का यहां किरदार मेरी धुंधली नजर और कमजोर ज्ञान में एकदम असली है। दुनिया में तमाम भोगवादी नजरों की केन्द्र सन्नी के इस रुप को जानकर कुछ पल के लिए वे भी सरल- सहज हो जाएंगे। भारत में फिल्मो में काम करते हुए सन्नी लियोनी और उनके पति डेनियल ने एक अनाथ बेटी को गोद लेकर नेक काम किया है।

यह नेक काम एक अन्य कारण से बहुत खूबसूरत है। जिस बेटी ने सन्नी को अपनी ममता उड़ालने मजबूर किया है शायद आम जनता तक उसे इस लाड़ के लायक नहीं देखती। एक सांवले चेहरे की सामान्य शक्ल की बच्ची सन्नी का ममत्व अपनी ओर खींचने में कामयाब हुई है। उसको बिना रुप रंग और भेद के अपनाने वाली सन्नी लियोनी ऐसा करके अच्छाई फैलाती नजर आती हैं। अनाथलयों के बच्चों के रुप रंग, शरीर और तमाम दृश्य गुण ये तय करते हैं कि वे यहां से निकलकर राजा के घर पहुंचेंगे या रंक के घर। कुछ बच्चे तो भगवान की दी शक्ल सूरत के कारण किसी का प्यार हांसिल नहीं कर पाते। सन्नी लियोनी और डेनियल ने एक सांवली सामान्य बच्ची को अपनाकर भारतीय समाज में चमड़ी देखकर होने वाले भेदभाव पर चोट की है। गोरे रंग की सन्नी द्वारा गोरे रंग के अभिमान को खंडित करना इस रंगभेद के खिलाफ अच्छी शुरुआत है। भारत में खुद व अपनी बेटी को काबिल बनाने सन्नी सबको प्रिय लगने वाले सफर पर निकलें ऐसी मेरी कामना है। सलाम “करनजीत कौर बोहरा“ सन्नी“ 



Browse By Tags



Other News