शख्सियत: कौन हैं हलधर नाग, इनके बारे में आप भी जानें....
| Rainbow News Network - Apr 2 2019 3:02PM

शिक्षा केवल किताबों तक ही सिमित नहीं होती, शिक्षा अपने आप में अथाह सागर है जिसे सीमाओं में बांध पाना मुमकिन नहीं है। आज हम उस शख्सियत के बारे में बताने जा रहे है जो अपने आप में ज्ञान का सागर है। इस देश में क्षेत्रीय भाषा और दूरदराज के ग्रामीण इलाके के साहित्यकारों को हमेशा से उपेक्षा का सामना करना पड़ा है। इसकी जीती जागती मिसाल हैं, हलधर नाग। हलधर नाग कोसली भाषा के कवि और लेखक हैं। यह भाषा ओडिशा में बोली जाती है। 'लोककवि रत्न' के नाम से मशहूर कवि हलधर नाग ने करीब 20 रचनाएं की हैं। एकदम सादगी से जीवन जीने वाले नाग को भारत सरकार ने 2016 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।

हलधर का जन्म आज से लगभग 67 साल पहले 1950 में ओडिशा के बारगढ़ में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। घर की दयनीय आर्थिक स्थिति के चलते वे कक्षा तीन के आगे नहीं पढ़ पाए थे। इसके बाद भी उन्हें अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जब वे दस साल के थे तो उनके पिता का साया उनके ऊपर से उठ गया। घर की हालत काफी बुरी थी जिसे सुधारने के लिए उन्होंने एक मिठाई की दुकान पर बर्तन धोने का काम पकड़ लिया। इससे होने वाली कमाई से वे अपने घर को चलाने में मदद करते थे। इसके दो साल बाद गांव के सरपंच ने उन्हें स्कूल भेजा लेकिन उन्होंने यहां पढ़ाई करने के बजाय खाना बनाने का काम किया।

आप यकीन नहीं करेंगे, उन्होंने 16 साल तक इस स्कूल में बतौर रसोइया काम किया। हलधर ने इस काम को छोड़कर स्टेशनरी की एक छोटी सी दुकान खोल ली। इसके लिए उन्होंने बैंक से 1,000 रुपए लोन भी लिए। हलधर नाग ने अपनी पहली कविता धोडो बारगाछ साल 1990 में लिखी थी। जिसका मतलब होता है 'बरगद का बूढ़ा पेड़' और इसे एक लोकल मैगजीन में जगह मिली थी। इसके बाद उन्होंने अपनी चार कविताओं को पत्रिका में प्रकाशित होने के लिए भेजा। हलधर समाज, धर्म, मान्यताओं और बदलाव जैसे विषयों पर लिखते हैं। उनका कहना है कि कविता समाज के लोगों तक संदेश पहुंचाने का सबसे अच्छा तरीका है।

वे कहते हैं कि लोगों की बात लोगों की जुबान में कहने से लोगों को अपनापन महसूस होता है और लड़ने का हौसला मिलता है। एक जन आंदोलन की तैयारी इसी तरह होती है। हलधर के सादगी भरे पहनावे से बयां होता है कि वे बेहद सामान्य श्रेणी से उठकर आये है। इसके बावजूद वे कहते हैं कि पेट दिखाकर किसी से संवेदना की भीख मांगना उनका मकसद नहीं है। यही वजह है कि सिर्फ तीसरी कक्षा तक पढ़े हलधर अपनी जन आवाज से कई स्कॉलरों को अपनी कविताओं पर रिसर्च करने के लिए आकर्षित करते है।



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