कोरोना खांसी के बेकग्राउंड में यमराज
| -RN. Feature Desk - Mar 16 2020 2:39PM

यमराज ने अपने भैंसे को सैनिटाइज किया। स्वयं को बार-बार सैनिटाइज किया। फिर साबुन को सबसे पहले लिक्विड सॉप से धोया और उस धुली हुई साबुन से अपने हाथ धोकर यमराज ने अपने हाथों को फिर से धोया। आजकल यमराज कोरोना वायरस से बचने के लिए जबरदस्त प्रिकॉशन ले रहे हैं। वे अपने भैंसे को लगातार नहला रहे हैं। भैंसे को दिन में तीन बार बदल-बदलकर मास्क पहना रहे हैं। यम अपने बदन को पूरा सैनिटाइज कर रहे हैं। यमी को नमस्ते कह कर विदाई गीत गा रहे हैं। नमस्ते जी, नमस्ते जी! इतना ओवर लोडेड काम हुआ जा रहा है कि खुद यमराज कोरोना से घबरा कर अपनी जान बचा रहे हैं।

इधर यमराज ने अपने सिर पर मुकुट उर्फ हेलमेट डाल लिया। हाथ में गदा भी ले लिया और मुंह पर मास्क लगाने लगे। लेकिन मुंह पर मास्क मैचिंग रंग का नहीं मिल पा रहा था। काले रंग का मास्क नहीं मिलने पर यमराज घबरा उठे। काला रंग उनकी ड्रेस कोड में शामिल है। काला रंग का मास्क लगाना जरूरी है। वरना डरने-डराने का गेटअप कैसे बनेगा। अपने काले-काले कारनामों से काली की गई दुनिया में काली-नीली आत्माएं लेने के लिए यमराज तैयार हो गए। हा हा हा हा हा!! करते हुए काला मास्क लगाकर यमराज अपने काले भैंसे पर सवार हो गए। नियमानुसार एक बार फिर हा हा हा का अट्टहास लगा लिया।

तभी धर्मराज के ऑफिस का मोबाइल बज उठा। रिंगटोन बज रही थी। खांसी-धांसी के बेकग्राउंड में और फिर कोरोना वायरस से रहें सावधान जैसी चेतावनी के साथ। यमराज ने डर के मारे जब फोन उठाया तो धर्मराज की आवाज आई- 'तुमने यह क्या अंधेर गर्दी मचा रखी है? मैंने जब तुम्हारे को 100 आत्माएं लाने के लिए कहा तो तुम 10,000 आत्माएं क्यों ले आए? इस तरह से आत्माएं लाने के कामों में घालमेल क्यों कर रहे हो?' तभी यमराज मिमियाने लगा- 'नहीं सर! मैं कोरोना पीड़ित एरिया में जा रहा था। वास्तव में तो 100 आत्माएं ही लेकर आया, लेकिन मारे घबराहट, डर व परेशानी के 10,000 व्यक्ति भी मर गए।

मैं क्या करता? कौन समझाए कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि सावधान रहने की जरूरत है।' धर्मराज ने लापरवाही भरे स्वर में कहा- 'ठीक है, ठीक है! अब ध्यान रखना। सही-सही आत्माओं को ही यहां लेकर आना। जब आत्मा की ऑडिट रिपोर्ट बनेगी तब जवाब तुम्हें ही देना पड़ेगा।' बॉस की लताड़ सुनकर यमराज ने अपने भैंसे को स्टार्ट किया। भैंसा काफी पुराना था मगर काम में है तेज। यमराज ने पृथ्वी ग्रह की ओर एंट्री मारी। यम ने देखा कि चारों और लोग मास्क ही मास्क लगाए हुए हैं। पूरी दुनिया में कोरोना ने भारी कोहराम मचाया हुआ है। इधर इंडिया में लोग कोरोनासुर नामक राक्षस के पुतले का दहन कर रहे हैं।

लोग फसली एक्सपर्ट बनकर टीवी पर दिखाई न देने वाले असली कोरोना को दिखाने की बातें, मुलाकातें व लातें फरमा रहे हैं। हींग-हल्दी का गीत गा रहे हैं। मास्क पहनकर मुंह पर कलर लगा होली निपटा रहे हैं। व्यापारी 50 रुपये के मास्क के 5000 रुपये ऐंठ रहे हैं। सच तो यह है कि हम सबको नमस्ते कहते हुए मिलकर एक ही गीत गाना चाहिए। साफ-सफाई है सुखदाई! बगैर सफाई जीवन दुखदाई!



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