मध्य रात्रि की नीरवता...
| -RN. Feature Desk - Mar 18 2020 5:18PM

मध्य रात्रि की नीरवता 
आकर्षित करती है बार-बार 
खुद को खुद में समा कर 
उस एकाकीपन से 
साक्षात्कार करने को कहती है मुझसे 
आजा मेरे पास
मुझसे भी तो चंद संवाद कर ले 
इस रिश्तो  के संसार में 
जिम्मेदारियों के समंदर में 
खुद को डुबो कर 
पुनः मिलने को आ जाती हैं 
यह सन्नाटा 
स्वयं से स्वयं का आत्म बोध कराता है
 भौतिकता को आध्यात्मिकता से जोड़ता है 
बारिश की बूंदों का संगीत 
जीव जंतुओं की आवाजें 
उपेक्षित सी आवाजे 
आ जाती है मेरी हमजोली बनकर 
इस अप्रियतम से संगीत का जादू 
मदहोश कर जाता है मुझे 
कई सारे खामोश संवादों को
 आवाज दे जाते हैं 
जीवन की शाश्वतता से बोध हो जाता है 
शून्य से साक्षात्कार होता है 
स्वयं में डूब कर 
किंतु पुनः भोर  का सूरज
होले से आकर 
जीवन की जवाबदारीओं, 
सच्चाई से परिचय करा जाता है



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