पांचवां आश्रम का नाम है- 'कोरोनाश्रम!'
| -RN. Feature Desk - Mar 28 2020 3:09PM

सौ वर्ष की जिंदगी जीने के लिए चार प्रकार के आश्रम बताए गए हैं। ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम! इधर एक महान व्यंग्यऋषि रामविलास जांगिड़ ने पांचवें आश्रम के बारे में बताते हुए जनता को अपना ज्ञान बघारा है। इन चारों आश्रमों के अतिरिक्त पांचवां आश्रम का नाम है- 'कोरोनाश्रम!' वस्तुत: यह कोरोना आश्रम उक्त चारों प्रकार के आश्रमों का समन्वित रूप ही है। इस आश्रम की पहली शर्त है घर में पड़े रहो, घर में ही अड़े रहो और घर में ही खड़े रहो। इस अवधि में कंप्लीट ब्रह्मचर्य का पालन करो और इसमें पढ़ने-पढ़ाने से संबंधित बातें करो।

घर में पड़े-पड़े चंपक, चंदामामा से लेकर गीता, कुरान, बाइबल, गुरुग्रंथ साहिब सब पढ़ो और गुनो। जब चाहो तब ब्रह्मचर्य से गृहस्थ आश्रम में कूद जाओ और यहां पर अपनी गृहस्थी की गाड़ी चलाने के लिए किचन में घुस जाओ। हाथों को पूरे पाव मिनट तक साबुन से धोकर सैनिटाइजर से साफ करो। किचन का काम बांटकर करो। अपने पसंद का काम छांट कर करो। कोरोना आश्रम में आदर्श पतिदेव वही होते हैं जो बर्तन भी मांजते हैं और पौछा भी लगाते हैं। कोरोना आश्रम में ब्रह्मचर्य आश्रम से कब गृहस्थ आश्रम में छलांग लगानी है यह सब 'आदर्श पत्नी संहिता' में वर्णित नियमों के अनुसार किया जाना उचित रहता है।

वानप्रस्थ आश्रम में जाने के लिए घर में ही किसी कमरे का कोई कोना पकड़ लीजिएगा। उस कोने में जाकर अपने पुराने हारमोनियम, गिटार, तबला, चिमटा आदि से धूल-धंखाड़ साफ कर उसे पों-पों, खों-खों, ढों-ढों आदि कुछ करना शुरू कर दीजिए। ज्यादा ऊंची-पक्की आवाज में मत गाइएगा क्यों कि बाहर गधे जरूर सड़क पर घूम रहे हैं। कोई चित्र बनाएं, कोई कविता लिखें, गीत गाएं और इसी बीच सीधे गृहस्थाश्रम में छलांग लगा दें। कोरोना आश्रम में ऐसा भी होता है कि आप अच्छे खासे ब्रह्मचारी आश्रम में बैठे हो और तत्काल आपको संन्यास आश्रम में भी छलांग लगाना पड़ सकता है।

ब्रह्मचर्य से सीधे संन्यास और संन्यास से सीधे गृहस्थी में छलांग लगाने की प्रक्रिया का नाम है- 'कोरोनाश्रम!' बस घर में ही सब कुछ करना है। घर में ही रहना है। जब कोई प्रकृति को नुकसान पहुंचाता है तब कोरोना आश्रम सदियों वर्षों में आ ही जाता है। यह लोगों को संयम का पाठ पढ़ाता है। कई ऋषि मुनि कोरोना वायरस को कोविड-19 आश्रम भी कहते हैं। इस कोविड-19 आश्रम से कभी डरना नहीं चाहिए बल्कि घर में ही रह कर, घर की ही साग-भाजी को काम में लेते हुए संयम व सफाई से रहना चाहिए। दाल, पापड़, बड़ी, मुंगेड़ी, कढ़ी, बेसन, गट्टा आदि की घरेलू सब्जियां ही काम में लेनी चाहिए। बाजार जाकर ज्यादा घचाघच नहीं मचाना चाहिए।

संयम-सफाई के साथ घर में अपने आप को आइसोलेट करते हुए हॉबी नाम की चिड़िया उड़ानी चाहिए। पढ़ाई और कोई ना कोई सृजन वाली कलाकारी में अपना मन लगाना चाहिए। डब्ल्यूएचओ, शासन और प्रशासन के द्वारा जारी की गई एडवाइजरी को मानने पर कोरोना वायरस आश्रम में जीने वाले व्यक्तियों को इसका बड़ा फल मिला है। कोविड-19 आश्रम में सफलतापूर्वक रहने वाले व्यक्तियों के सामने सुंदर प्रकृति इंतजार करती हुई दिखाई पड़ रही है। ढलते सूरज की सुनहरी धूप में सागर के किनारे पर टकराती रसिया लहरें, कल-कल बहती नदी और पंछियों के कलरव की सुंदर गान पोस्ट कोरानाश्रम के लिए इंतजार में तैयार खड़ी है। हे प्यारे वासियो! घर में ही रहकर कोरोना आश्रम में अपना जीवन व्यतीत कीजिए। आगे सुनहरा सूरज आपका-हमारा इंतजार कर रहा है।



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