लॉकडाउनीय दिन काटने के अचूक सूत्र
| -RN. Feature Desk - Apr 13 2020 1:12PM

-रामविलास जांगिड़

इस समय देश में हर दिशा में लॉक को डाउन कर दिया गया है। लोग अपने-अपने घरों में बैठे हैं, लेटे हैं और सूत्र बद्ध ऐंठे हैं। शिकायतें आ रही है कि उनके दिन काटे नहीं कट रहे हैं। रातें बहुत बहुत बहुत ज्यादा लंबी हो रही है। बाहर कोरोना जीभ लपलप कर रहा है। अंदर घर में दिन मुंह है सुजाये सामने खड़ा है और काटे नहीं कट रहा है। मैं देश का जिम्मेदार नागरिक हूं और इस नाते मेरा दायित्व बनता है कि मैं सभी लोगों को ऐसा सूत्र बता दूं जिससे दिन फटाक से कट जाए। तो साथियो! दिन काटने के लिए सबसे पहले आपको यह विचार करना पड़ेगा कि आप आखिर दिन को किस तरह और कैसे काटना चाहेंगे? आपको यह उपाय करना पड़ेगा कि दिन को किस औजार से काटेंगे? छुरी, चाकू, गंडासा, दंराती, आरी, कुल्हाड़ी या फिर तलवार; किसका उपयोग करेंगे? काफी मगजगर्दी मचाने पर मान लिया कि आप घर में पड़े चाकू से ही दिन काटने को उतारू हैं।

तब आप सबसे पहले एक अच्छा सा दिन (अगर आपके पास हो तो उसे) हाथ में पकड़ लीजिए। उसे गर्म पानी में बहुत ठीक तरीके से उबाल लीजिए। जब आप दिन को अच्छे से गर्म पानी में उबाल लेंगे तो थोड़ी देर के लिए उसे धूप में खुला छोड़ दीजिए। इस बीच आप 20 सेकंड के लिए दोनों हाथों पर ठीक प्रकार से साबुन लगाकर उन्हें झाग में नहलाइए। इस क्रिया को बीस बार दोहराइए। इसी दौरान इधर-उधर नजर बचाकर गाइए- 'काटे नहीं कटते दिन ये रात। कहता हूं यह मैं इस दिल की ये बात। लो आज मैं फिर यह कहता हूं। कंपलीट लॉक डाउन में हूं।' (चालू रोकड़ रिवाज के अनुसार अगर इसके बाद आई लव यू कह दिया और पत्नी नामक आत्मा ने यह सुन लिया तो फिर पत्नी दिन के साथ आपको भी काट डालेगी। प्लीज! सावधानी रखें।) जब हाथों को झाग में नहलाने की पर्याप्त कसरत कर लें तो फिर से आप दिन को टटोलें जो कि छत पर बिखरा पड़ा है।

अब इस दिन को पांवों से समेटना शुरू कर लीजिए।अपने चाकू को धीरे-धीरे आहिस्ता से काटने की मुद्रा में ले आइए। अरे हुजूर! इतना बेदर्दी से इस दिन को मत काटिए क्योंकि आपके दिन तो वैसे ही मजे से कट रहे हैं। देश में गरीब, किसान, मजदूर जैसे कई लोग ऐसे हैं जिनके दिन बड़े कड़क हुए जा रहे हैं। साथ ही इतने मजबूत स्टील की भांति बने जा रहे हैं बेचारे वे काटें तो कैसे? काटेंगे तो उनके पास में तलवार है ना कोई चाकू।आपका दिन तो वैसे ही मुलायम सा हुआ जा रहा है। एकदम रसीला-छबीला। आप तो सिर्फ एक चाकू से बहुत अच्छे-भले दिन को इस तरह से काट सकते हैं जैसे आपने अभी-अभी वह सामने पड़ी हुई जो ककड़ी है उसको काट दिया है। वैसे दिनों की भी अपनी एक समस्या है।

हॉस्पिटल के दिन डॉक्टरों के सामने पहाड़ से दिखाई दे रहे हैं। फिर भी डॉक्टर इन दिनों के साथ में दोस्ती बनाए हुए हैं। पुलिस और प्रशासन बड़ी कठिनाई से आपके लिए यह दिन सजा रहे हैं। फिर भी आप दिन काटने पर उतारू हैं तो अब आपको यह तय करना पड़ेगा कि आप बैठकर काटेंगे या फिर लेटकर। ये दिन सोकर काटेंगे या फिर कहीं भागकर। फिलहाल तो यह है कि आप दिन को काटो मत। दिन को सजाओ-संवारो।अगर आपने दिन को काटा तो कुछ समय बाद दिन फिर आपको काटने लगेगा; तब मुझे दोष मत देना कि आपने मुझे बताया नहीं।



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