कोविडनर्वेद वर्णिता: डॉक्टर पुलिस च कर्तव्या:
| -RN. Feature Desk - Apr 25 2020 1:44PM

-रामविलास जांगिड़

डॉक्टरं जेहि कोरोनां यातुधानम्, उत कोविडनं मायया शाशदानाम्। लॉकडाउनभंजक पुलिसं ऋदन्तुं, ते उच्चरन्तं सूर्यं मा द्रृशन्।। --जातक को कोविडनर्वेद में वर्णित श्लोक 2019 के अनुशीलन-पारायण करने की आवश्यकता है। कोविडनर्वेद का अनुशीलन करने के लिए जातक को अपने हाथों को साबुन से बार-बार आगे-पीछे अच्छी तरह से 20 सेकंड के लिए धोना चाहिए। इसी समय हाथ में रिमोट लेकर टीवी माता के सामने वैश्विक कोरोना अनुशीलन वाले न्यूज़ चैनल को खोलना चाहिए। इस समय सोशल डिस्टेंस की पवित्र भावना अपने मन में धारण करनी चाहिए। आइसोलेशन व क्वॉरेंटाइन का कोविड मंत्र आत्मा के भीतर जाप करते रहने से आत्मबल मिलता है। कोविडनर्वेद में कहा गया है कि ऐसा करने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है।

रियलिटी तो ये है कि इस मंत्र में दो शिक्षाएं दी गई है। प्रथमत: मायावी कोरोना को हमें नष्ट ही करना चाहिए। द्वितिया: लॉकडाउन को नष्ट करने वाले स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं। इस मंत्र में मायावी कोरोना वायरस के कई भेदों को पहचान कर उसे नष्ट करने के लिए वैक्सीन बनाने के लिए कहा गया है। यहां कोरोना के लिए यातुधान शब्द दिया गया है। यातु का अर्थ छल, प्रपंच, जादू या छलिया बाजी होती है। धान का अर्थ है, रखने वाला या प्रयोक्ता। जो छल, प्रपंच, कपट, छलियागर्दी आदि का प्रयोग करते हैं, वे यातुधान होते हैं। मतलब जो माया से, छल से व कपट आदि से समुचित विश्व को नष्ट करने पर तुला हो उसका पूर्ण मनोयोग से प्रतिकार करना चाहिए।

कोविडनर्वेद में स्पष्ट कहा गया है कि यह जो छली, कपटी, मायावी, राक्षस है, उसे डॉक्टरी रिसर्च से ही जीतने के लिए प्रयास करने चाहिए। कोरोना और कोविड दोनों ही समान रूपी हैं। ये समाज के लिए अहित कारक हैं। अतः इन्हें नष्ट करने की आज्ञा दी गई है। इन्हें नष्ट करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार डॉक्टरों को दिया गया है। इस मंत्र में डॉक्टरों से आह्वान किया गया है कि वे अपनी बुद्धि चातुर्य, रिसर्च व अपने कर्म से इसी छलिया को नष्ट करें। इसे दूर भगाएं। यातुधानम् अर्थात् मायावी जादूगर राक्षसी वृत्ति वाली इस कोरोना की शक्ति को जड़-मूल से समाप्त कर दें। जो डॉक्टरों को हानि पहुंचाए उन्हें पुलिस नष्ट कर दे।

श्लोक के दूसरे पक्ष में कहा गया है कि जो भी लॉकडाउन का भंजन करते हैं अर्थात् लॉकडाउन को जो तोड़ते हैं, लॉकडाउन के नियमों को फोड़ते हैं, उन्हें पुलिस अपने बल प्रयोग से रोकें। ऋदन्तुं का अर्थ है, नष्ट हो जाएं। हिलें, कांपें, समाप्त हो जाएं। जो लोग लॉकडाउन को तोड़ने वाले हैं उनके लिए ऋदन्तुं शब्द का प्रयोग किया गया है। जो जड़ है, जो मूढ़ हैं, जो केवल नासमझी का काम करते हैं। जो जड़ बुद्धि होकर कोरोना देव के प्रति जागरूक नहीं होते हैं, जो भी जीव कोविडनर्वेद में वर्णित वैश्विक स्वास्थ्य की बात नहीं मानते हैं, ऐसे उज्जड़, गंवार, जाहिल देवों की उपासना करने के लिए पुलिस को अपना डंडात्मक व दंडात्मक कर्तव्य करना चाहिए।

शासकीय नियमों की पालना करने के लिए पुलिस का कर्तव्य और डॉक्टरों के द्वारा किए गए अपने शोध कार्यों के प्रतिफल में ही जनता भविष्य में एक श्रेष्ठ उदय होते हुए नये विश्व को देख पाएगी। अतः हमें कोविड-19 से छुटकारा पाने के लिए कोविडनर्वेद में वर्णित श्लोक का अनुशीलन करना चाहिए। देश-दुनिया को उगते हुए सूर्य की भांति देखने के लिए हमें डॉक्टर एवं पुलिस के द्वारा बनाई गई लक्ष्मण रेखा में रहकर लॉकडाउन व्रत का पारायण व पालन पूर्ण मनोयोग ही करना चाहिए।



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