'मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य' विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन
| - Rainbow News Network - Jun 30 2020 6:41PM

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2020-21 के अनुपालन में एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के तत्वाधान में आज दिनांक 30.06.2020 को 12.00 बजे से जिला कारागार अम्बेडकरनगर में मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों के विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

    शिविर को सम्बोधित करते हुये अशोक कुमार, सिविल जज (सी0डि0), सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर ने मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी समाज के संचालन के लिये इन दोनों का पालना करना अनिवार्य है। हमें अपने मौलिक अधिकारों से पहले अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिये। संविधान में 11 मौलिक कर्तव्यों का वर्णन किया गया है। देश के कानून की जानकारी आम आदमी के लिये बहुत महत्वपूर्ण है तथा कानून की यह जानकारी देश के संविधान में मौजूद है। संविधान के भाग-प्प्प् में सन्निहित मूल अधिकार सभी भारतीयों के लिये नागरिक अधिकार सुनिश्चित करते हैं और सरकार को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अतिक्रमण से रक्षा करने का दायित्व भी राज्य पर डालते हैं। संविधान द्वारा मूल रूप से 7 मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों आह्वाहन किया कि सभी को उनके मौलिक अधिकार के प्रति जागरूक करें जिससे उनके अधिकारों की रक्षा हो सके। यदि किसी के मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। 

    कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये धीरेन्द्र सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जनपद न्यायालय अम्बेडकरनगर ने बताया कि इन अधिकारों का उल्लंघन होने पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय तथा राज्य के उच्च न्यायालयों को यह अधिकार है कि ऐसे किसी विधायी या कार्यकारी कृत्य को असंवैधानिक और शून्य घोषित कर सकें इसके अलावा मौलिक कर्तव्यांे के अनुसार प्रत्येक नागरिक को अपने संविधान के साथ ही राष्ट्रीय प्रतीको का सम्मान करना चाहिये इसकी विरासत को संजोना चाहिये, संस्कृति का संरक्षण करना चाहिये। नागरिक इन कर्तव्यों का पालन करने के लिये संविधान द्वारा नैतिक रूप से बाध्य हैं। हालांकि इनके उल्लंघन या अवमानना पर किसी प्रकार की कानूनी कार्यवाही का कोई प्राविधान नही है।

    शिविर में बोलते हुए रमाकान्त दोहरे, जेलर, जिला कारागार अम्बेडकरनगर ने कहा कि भारत सरकार ने न्याय को आसान बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब और कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने की योजना शुरू की है। इसके अतिरिक्त कोई भी निर्धन व्यक्ति जिसका मुकदमा तहसील में लम्बित है और वह अपने वाद की पैरवी धन के अभाव में नहीं कर पा रहा है तो वह व्यक्ति एक सादे कागज पर अपनी समस्या लिखते हुए निःशुल्क अधिवक्ता की मांग करे तो तहसील विधिक सेवा समिति की तरफ से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। 

    इस शिविर में देवनाथ यादव, उपकारापाल, जिला कारागार अम्बेडकरनगर इशरतुल्लाह, एवं विकास सिंह व जिला कारागार, अम्बेडकरनगर के कर्मचारीगण एवं मीडियाकर्मी आदि उपस्थित थे।



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