कोरोना ने बदला अपना रूप, पहले से नौ गुना हुआ ज्‍यादा खतरनाक
| Agency - Jul 3 2020 5:26PM

नई दिल्‍ली। दुनिया में कोरोना इस समय कहर मचा रही है। इस बीमारी के तोड़ को ढूंढ़ने के लिए वैज्ञानिक 6 महीने से लगे हुए हैं। हालांकि कई देश वैक्‍सीन बनाने के करीब हैं, लेकिन कोरोना को लेकर एक ऐसी रिसर्च सामने आई है, जिनसे अमेरिका समेत यूरोप को हिलाकर रख दिया है। एक वैश्विक अध्ययन से इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि कोरोना वायरस का एक नया रूप यूरोप से अमेरिका में फैल गया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि नए म्यूटेशन से वायरस लोगों को संक्रमित करने की अधिक संभावना रखता है, लेकिन वायरस के पहले के बदलावों की तुलना में उन्हें कोई भी बीमार नहीं बनाता है।

शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इसकी सूचना देते हुए कहा कि यह अब लोगों को संक्रमित करने वाला प्रमुख रूप है।” ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी और एरोनोवायरस इम्यूनोथेरेपी कंसोर्टियम के एरिका ओल्मन सैफायर ने इस अध्ययन पर काम किया है। जर्नल सेल में प्रकाशित अध्ययन कुछ पुराने कामों पर आधारित है, जो टीम ने पहले जारी किए थे। आनुवंशिक अनुक्रमों पर साझा जानकारी ने संकेत दिए हैं कि वायरस का एक नया संस्करण सामने आया है। अब टीम ने न केवल अधिक आनुवांशिक अनुक्रमों की जांच की है, बल्कि उन्होंने प्रयोगशाला में लोगों, जानवरों और कोशिकाओं से जुड़े प्रयोगों को भी चलाया है, जोकि बदलाव दिखाते हैं। यह अधिक सामान्य है और यह अन्य संस्करणों की तुलना में अधिक संक्रामक है। हम जानते हैं कि नया वायरस फिटर है। यह पहली नज़र में नहीं लगता है।

प्रोटीन को करता है प्रभावित

वायरस जिस संरचना का उपयोग करता है, वह कोशिकाओं को संक्रमित करता है। अब शोधकर्ता यह देखने के लिए जांच कर रहे हैं कि क्या यह इस बात को प्रभावित करता है कि क्या वायरस को किसी वैक्सीन द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। वर्तमान में परीक्षण किए जा रहे टीके ज्यादातर प्रोटीन को बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन वे वायरस के पुराने तनावों का उपयोग करके बनाए गए थे।

ऐसे बदल रहा है स्‍वरूप

जर्नल सेल में प्रकाशित अध्ययन, इस बात की पुष्टि करता है कि वायरस के नए संस्करण को और अधिक सामान्य बना दिया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह यूरोप व अमेरिका में फैलने वाले पहले संस्करण को लगभग पूरी तरह से बदल रहा है, जिसे डी614 कहा जाता है। टीम ने पूरे यूरोप और अमेरिका के रोगियों से लिए गए नमूनों का परीक्षण किया और जीनोम की जांच की। उन्होंने इन जीनोम को तुलना करने के लिए सार्वजनिक रूप से साझा किया है। तुलना करने पर उन्हें दो रूप बनाने में मदद मिली। 1 मार्च 2020 के माध्यम से G614 संस्करण यूरोप के बाहर दुर्लभ था, लेकिन मार्च के अंत में दुनियाभर में इसकी वृद्धि हुई। यहां तक ​​कि जब D614 रूप महामारी का कारण बना। इंग्लैंड के वेल्स और नॉटिंघम जैसे स्थानों में और साथ ही वाशिंगटन राज्य में G614 एक बार फिर से दिखाई दिया है।

तीन से नौ गुना अधिक खतरनाक

शोधकर्ताओं ने कहा कि नया संस्करण तेजी से बढ़ रहा है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के डेविड मोंटेफोर और सहयोगियों ने लैब में वायरस का परीक्षण किया। उन्‍होंने बताया कि क्या वायरस का जी रूप डी फॉर्म से अधिक संक्रामक था। सभी परिणामों ने सहमति व्यक्त की कि जी फॉर्म डी फॉर्म की तुलना में तीन से नौ गुना अधिक संक्रामक था। अब हमारे पास प्रायोगिक साक्ष्य हैं, दुनियाभर के अनुक्रमों के विश्लेषण में देखे जा रहे हैं। इन निष्कर्षों से पता चलता है कि वायरस का नया रूप मूल रूप से अधिक आसानी से प्रसारित हो सकता है।



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