आत्मरक्षा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
| - Rainbow News Network - Aug 7 2020 5:34PM

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2020-21 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के निर्देशानुसार शुक्रवार 7 अगस्त 2020 को 04.00 बजे से ड्वाकरा हाल, विकासखण्ड-अकबरपुर, अम्बेडकरनगर में आत्मरक्षा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

आत्मरक्षा विषय पर बोलते हुये सचिव/सिविल जज (सी0डि0) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अशोक कुमार ने बताया कि कोई भी व्यक्ति स्वयं की जान व माल की रक्षा के लिये किसी को रोके या उससे अपने बचाव के लिये कोई भी साधन का उपयोग करे वह आत्मरक्षा होती है व्यक्ति स्वंय की सम्पत्ति की रक्षा किसी भी चोरी डकैती शरारत व आपराधिक अतिचार के खिलाफ कर सकता है ऐसा वह किसी दूसरे की जान बचाने के लिये भी कर सकता है ऐसे में अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो वह आत्मरक्षा में आता है।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 96 से लेकर 106 तक की धारा में सभी नागरिकों को आत्मरक्षा का समान अधिकार मिलता है, संविधान हमें बराबरी का हक देता है। हमें अपने प्रति होने वाले अत्याचार एवं शोषण के विरूद्ध आवाज उठाने की जरूरत है। हमारा शोषण तभी होता है जब हम इसे अपना भाग्य मानकर सहते हैं। हमें अत्याचार के विरूद्ध आवाज उठाने की जरूरत है। इन धाराओं में व्यक्ति की अपनी जान सम्पत्ति व दूसरे की जान से रक्षा व किसी को परिस्थितिवश जान से मारने व मंदबुद्धि व्यक्ति द्वारा किये गये कृत्यों को बताया गया है इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को होती है। 

अगर कोई व्यक्ति किसी को उकसाने या भड़काने पर किसी तरह के मामले में फंसता है तो यह आत्मरक्षा की श्रेणी में नहीं आता। इसमे यह भी कहा गया है पुलिस का भी यह कर्तव्य है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच करे तथा आत्मरक्षा के मामले पर उचित कार्यवाही करते हुये निर्दोष को न्याय दिलायें। उन्होने निःशुल्क मोबाइल नम्बर 181, 1090, 1098, एवं डायल 100 के बारे में बताया कि यदि आप किसी विषम परिस्थिति में इन नम्बरों का प्रयोग कर सकते हैं इससे आपको अविलम्ब सुविधा उपलब्ध करायी जाती है।

शिविर को सम्बोधित करते हुए शालिनी ओझा, महिला कल्याण अधिकारी, अम्बेडकरनगर ने बताया आत्मरक्षा का अधिकार रक्षा या आत्मसुरक्षा का अधिकार है इसका मतलब प्रतिरोध या सजा नहीं है आत्मरक्षा के दौरान चोट जितनी जरूरी हो उससे ज्यादा नहीं होनी चाहिये ये अधिकार सिर्फ तभी तक ही उपलब्ध हैं जब तक कि शरीर अथवा सम्पत्ति को खतरेे की उचित आशंका हो या जब की खतरा सामने हो या होने वाला हो। आत्मरक्षा को साबित करने की जिम्मेदारी अभियुक्त की होती है कि वह तथ्यों व परिस्थितियों के द्वारा ये साबित करे कि उसने यह कार्य आत्मरक्षा में किया है। 

आत्मरक्षा के अधिकार का प्रश्न केवल अभियोग द्वारा तथ्यों व परिस्थितियों के साबित करने के बाद ही उठाया जा सकता है अभियुक्त पर घाव के निशान आत्मरक्षा के दावे को साबित करने के लिये मददगार साबित हो सकते हैं। इस शिविर में गायत्री सिंह, देवेन्द्र प्रताप वर्मा, अजय कुमार, सिद्धार्थ सिंह, शहंशाह, अखिलेश, जयदीप वर्मा, शिव कुमार वर्मा, जितेन्द्र सिंह, प्रदीप, विकास सिंह भारती एवं विकास खण्ड के कर्मचारीगण एवं मीडियाकर्मी आदि उपस्थित थे।



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