संविधान दिवस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं व कर्मचारियों ने संविधान के उद्देशिका का किया पाठन
| -RN. News Desk - Nov 26 2020 4:54PM

अम्बेडकरनगर। माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के निर्देशानुसार एवं उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2020-21 के अनुपालन में डॉ0 बब्बू सारंग, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर की अध्यक्षता में आज दिनांक 26.11.2020 को 11ः00 बजे से जनपद न्यायालय अम्बेडकरनगर सभागार में संविधान दिवस के अवसर पर समस्त सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण, अधिवक्तागण एवं कर्मचारीगण द्वारा संविधान के उद्देशिका का पाठन कोविड-19 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए जारी दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत कराया गया। 

इसी क्रम में विकास खण्ड-अकबरपुर के ड्वाकरा हाल में समय 04ः00 बजे से संविधान दिवस के अवसर पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर को सम्बोधित करते हुये श्री अशोक कुमार, प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर द्वारा बताया गया कि भारत का संविधान देश का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ। यह दिन भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। 

प्रत्येक राज्य में एक विधानसभा है कुछ राज्यों में एक ऊपरी सदन है जिसे विधान परिषद कहा जाता है। राज्यपाल राज्य का प्रमुख है। प्रत्येक राज्य का राज्यपाल होगा तथा राज्य की कार्यकारी शक्ति उसमें निहित होगी, मन्त्रीपरिषद जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री है राज्यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्पादन में सलाह देती है। राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी है। संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है अवशिष्ट शक्तियां संसद में विहित हैं। शिविर के दौरान प्रभारी सचिव द्वारा उपस्थित कर्मचारीगण, मीडियाकर्मी व जनसमूह को भारतीय संविधान की उद्देशिका का पाठन कराया गया।

कार्यक्रम में बोलते हुये अनुराग सिंह, खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर, अम्बेडकरनगर, ने बताया कि भारतीय संविधान देश को एक स्वतंत्र कम्यूनिस्ट धर्मनिरपेक्ष स्वायत्त और गणतंत्र भारतीय नागरिकों को सुरक्षित करने के लिये न्याय समानता स्वतंत्रता और संघ के रूप में गठन करने के लिये अपनाया गया था भारत का संविधान दुनिया में अनोखा है और संविधान सभा द्वारा पारित करने में लगभग 2 साल 11 महीने और 17 दिन का समय लिया गया। 

देश का संविधान लिखित और विस्तृत है तथा इसमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता, यात्रा, रहने, भाषण, धर्म शिक्षा आदि की स्वतंत्रता दी गई है हमारे संविधान में मौजूद कई विशेषताओं के कारण ही दुनिया के कई देशों ने भारतीय संविधान को अपनाया है। इस शिविर में श्री अजय कुमार, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, महेन्द्र यादव, चूणामणि, संदीप कुमार, अमित वर्मा, मोहम्मद इले अयाज, राजकुमारी, प्रदीप, ओम प्रकाश यादव एवं विकास खण्ड के कर्मचारीगण एवं मीडियाकर्मी आदि से कराया गया। 



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