भ्रष्ट-आचरण संहिता में चमचे
| -RN. Feature Desk - Jan 19 2021 1:10PM

-रामविलास जांगिड़ 

चमचा रात्रिचर होता है। दिन में यह दलालों तथा उपचमचों के भय से बाहर नहीं निकलता। वरन किसी पार्टी कार्यालय की टूटी कुर्सी अथवा राजकीय कार्यालयों के पुराने खंडहरों में लटका रहता है। कार्यालय में किसी काम की फाइल अटकने के समय वह बाहर निकल कर बड़ी चालाकी से आखेट करता है। चमचे प्राय: अपने नेता जी की झूठन और सहायता राशि के नाम पर रिश्वत खाते हैं। नेता श्री के झूठन भक्षी चमचे इधर-उधर भटकते समय छोटे-छोटे दलालों को झपट्टा मारकर पकड़ लेते है। तब वे पार्टी कार्यालय के बाहर निकल कर उन्हें खाते हैं। भ्रष्टाचारी चमचा पार्टी कार्यालय पर ही अथवा अपने अड्डे पर रिश्वत के रूपयों से मजे मारता है।

चमचे बड़े पेटू होते हैं। सभी रुपयाहारी चमचे डॉलर, रुपैया या पौंड के रस का ही पान करते हैं। रुपयाहारी चमचे के दांत कोठीहारी चमचे से भिन्न होते हैं। कोठीहारी चमचे के दांत नुकीले और तीक्ष्ण होते हैं, ताकि वह दलालों का वेतन तेज गति से खा सके। भ्रष्ट आचरण संहिता के अनुसार वह दलालों के लिए रिश्वत का छोटा भाग काटकर अलग रख लेता है और स्वयं उसके बड़े भाग को ही खाता है। कुछ चमचे नेताक्षी रूपा रुधिर चूसने वाले होते हैं। चमचों के दांत भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। ये आदमी रूपी मुर्गे को अलग-अलग ढंग से अलग-अलग दांतों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से खाते रहते हैं। यही दांत उनके वर्गीकरण में सहायक होते हैं।

चमचे धरती पर रह कर आकाश में उड़ने वाले एक रुपयाधारी प्राणी होते हैं, जो अपनी कई-कई प्रजातियों के साथ दलालों के दूसरे सबसे बडे़ कुल का निर्माण करते हैं। ये पूर्ण रूप से निशाचर होते हैं और पार्टी कार्यालय अथवा सचिवालय की अंधेरी गुफाओं के अन्दर उल्टा लटके रहते हैं। इनको दो समूहों मे विभाजित किया जाता है, पहला समूह रुपयाभक्षी बडे़ चमचों का होता है, जो देख-सूंघ कर अपना भोजन ढूंढ़ते हैं। जबकि दूसरा समूह दलालों की मिलीभगत का छोटे चमचों का होता है, जो अल्प इशारा व अल्पध्वनि द्वारा स्थिति निर्धारण विधि के द्वारा अपना शिकार तलाशते हैं।

यह एकमात्र ऐसा भ्रष्ट-आहारी होता है जो रात में भी फटाक से उपस्थित हो सकता है। इसकी पिछली टांगें पतली, छोटी और नखयुक्त होती हैं। जो मौका पड़ने पर भागने में बड़ी मददगार बनती है। चमचे उलटे लटकते हैं क्यों कि उल्टे लटके रहने से ही वे बड़ी आसानी से कई लोगों के चूना लगाने में तत्पर हो सकते हैं। दलालों की तरह वे जमीन से उड़ान भरने में तेज होते हैं। चमचे आमतौर पर हर एक राजकीय कार्यालय के पीछे अवस्थित अंधेरी गुफाओं में दिनभर आराम करते हैं। वे यहीं सोते हैं और पार्टी कार्यालय से रात में ही निकलते हैं। इनकी चमचागिरी ही उनके पंजों को नेता श्री की कुर्सी के पीछे मजबूती के साथ पकड़ने में मदद करती है।



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