भ्रष्टाचार और बेईमानी की चटनी
| -RN. Feature Desk - Jan 22 2021 12:41PM

-रामविलास जांगिड़

भ्रष्टाचार की खुशबूदार चटनी बांटने का मन कर रहा है। भ्रष्टाचार, बेईमानी और अन्याय की चटनी बांटकर पीसना चाहता हूं। शुरू से ही इच्छा रही कि इन सभी मुद्दों की चटनी बनाकर इन्हें जड़ मूल से मिटा दूं। लेकिन चटनी के लिए सिला कहां से लाऊं? अगर कहीं से सिला का जुगाड़ हो भी जाए तो वह लोडी कहां से लाऊं? भ्रष्टाचार और बेईमानी की चटनी कैसे बनाऊं? इधर जिस किसी फाइल में हाथ डालता हूं भ्रष्टाचार फन काढ़े बैठा है। जिस किसी डीलिंग में आंखें लगाओ, बेईमानी ठाठें मारती दिखाई दे रही है। अन्याय तो हर दिशा में पसरा पड़ा है। इन सबकी तुरंत ही चटनी बना देनी आवश्यक है। पर बनाएं तो कैसे? आजकल कहा जाता है कि चटनी बांटने के लिए ग्राइंडर अथवा मिक्सर का प्रयोग कर सकते हैं।

कटर से भी इन सबको काटकर चटनी बनाई जा सकती है। लेकिन जो चटनी सिला-लोडी पर बनती है, वह ग्राइंडर-कटर और मिक्सर से कहां! चटनी बनाने का मजा ही नहीं आता! वैसे भ्रष्टाचार, बेईमानी और अन्याय की चटनी बरसों से बनाई जा रही है। मजेदार बात यह है कि इस चटनी को सिला पर बेहतरीन तरीके से आपस में मिलाकर पीसा भी जा रहा है। इससे भी ज्यादा मजेदार बात यह है कि इसे पीसकर अच्छे-अच्छे अफसर और भारी-भारी मंत्री नेता-गण इसका नियमित रूप से सेवन भी कर रहे हैं। मेरी इच्छा तो बस इनकी चटनी बनाकर धूल में मिलाने की थी। लेकिन लोग तो इस चटनी से न केवल अपनी बल्कि सारे घर परिवार के सेहत बनाने में लगे पड़े हैं। 

इधर मार्केट में भ्रष्टाचार की ताजा चटनियां एक से बढ़कर एक पैक में उपलब्ध है। बेईमानी की चटनी कई-कई पैकेट में कई-कई रंगों-डिजाइनों में उपलब्ध है। इन्हें मजे ले-लेकर चाटा जा रहा है। लोग सड़क चलते बेईमानी करने में उस्ताद हुए जा रहे हैं। अन्याय की बात ना ही पूछे तो अच्छा! इसकी चटनी एक अलग फ्लेवर में अलग ढंग से मजे से खरीदी-बेची जा रही है। भ्रष्टाचार की चटनी चाट रहे हैं। कमीशन की चटनी बांट रहे हैं। आप तो पधारो मेरे नेता राजा! अफसरों के साथ मिल बजाओ बाजा! कमीशन की चटनी चाट जाओ ताजा! ऐसे भ्रष्टाचारोन्मुखी गीत हवा में एक अलग ही मजे दे रहे हैं। इतने सृजनशील लोग हैं कि कोरोना के मामले में भी भ्रष्टाचार कर उसकी बढ़िया सी चटनी चाटने में परहेज नहीं कर रहे हैं।

और तो और वैक्सीन में भी अपने ढंग की अलग बेईमानी कर, उसमें से भी बेईमानी की ताजा चटनी बनाकर चाटने से परहेज नहीं कर रहे हैं। सीमेंट, सरिया, सड़क, पुल आदि की चटनी चाटने का काम तो युगों-युगों से चलता आ रहा है। लोग चटनी बनाने की कहते हैं और उसे चाट जाते हैं। ऐसे भ्रष्टाचार की चटनी का आखिर क्या किया जाए? हालांकि मेरी खुद की इच्छा यह है कि मैं भ्रष्टाचार की चटनी चाट जाऊं। लेकिन मुझ में सदाचार का कीड़ा घुसा हुआ है। एक इच्छा यह भी है कि मैं घनघोर किस्म का बेईमान बन जाऊं। लेकिन बड़ा डरपोक आदमी हूं और ईमानदारी के जंजाल में फंसा हुआ हूं। इस तरह के आदमी से अन्याय की बात करना ही मुश्किल होता है, क्योंकि ये सब काम बड़ी चालाकी, होशियारी और मेहनत के हैं। मैं बुद्धू टाइप का डरपोक आदमी हूं, इसलिए ये सब जंजाल मुझसे नहीं होते!



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