और डाकू बन गया गार्ड
| -RN. Feature Desk - Jun 7 2021 2:30PM

-रामविलास जांगिड़

'कोई भी लूट लो' (केबीएलएल) बैंक मैनेजर गरीबदास ने बहुत मिन्नतें करी। फिर भी डाकू सत्येंद्रसिंह ने बैंक लूटने से साफ मना कर दिया। साफ कहा कि आज हम बंदूके लेकर नहीं आए हैं और बिना बंदूकें लूटना डाकू बिरादरी में बड़ा अपमानजनक होगा। तब बैंक मैनेजर डाकू के चरणों में गिरता हुआ अनेकों प्रकार से मिन्नतें करने लगा- हुजूर! अगर आप 'कोई भी लूट लो' बैंक नहीं लूटेंगे, तो बैंकिंग सेक्टर में हमारी भारी बदनामी होगी।

हमारे बैंक शेयरों में भारी गिरावट आएगी। हे बैंक उद्धारक! प्लीज! बैंक लूट लीजिए! ढेरों मिन्नतें करने के बाद भी डाकू श्री ने बैंक लूटने से मना कर दिया। तभी सोशल मीडिया के सौजन्य से बैंक में मैनेजर की पत्नी, बच्चे और स्टाफ के अन्य परिजन भी आ गए। मैनेजर की पत्नी ने डाकू राज के आगे हाथ जोड़ बैंक लूटने के लिए आग्रह किया- हे डाकू राज! आप दया कीजिए! हमारी बंधी-बंधाई गृहस्थी उजड़ जाएगी। साहब की नौकरी छूट जाएगी।

हम सब के पेट पर लात पड़ जाएगी। हे सत्य इंद्र के सिंह! कीजिए ना हमें अनाथ! लूट लीजिए ना यह बैंक! कहकर बैंक स्टाफ एवं उनके सभी परिजन कातर स्वर में रोने लगे। हाय हमारा क्या होगा? छाती पीटने लगे हैं। इस कसरत का परिणाम आया। डाकू राज का हृदय पिघल गया। वह भी उनके साथ रोने लगा। आंसू पौंछते हुए वह कहने लगा- हे गरीब मारक! उद्योगपति उद्धारक! बैंक मैनेजर गरीबदास जी सुनिए। आपके बीवी-बच्चों के श्री मुख से उच्चरित वचनों से हमारे दल के दिल द्रवित हो गए हैं। हम बिना बंदूक के ही बैंक लूटने के लिए तैयार हैं। 

सुनते ही बैंक मैनेजर, स्टाफ एवं परिजनों में अपार हर्ष व्याप्त हो गया है। सबकी आंखों से बहुत सुखदाई आंसू झरने लगे हैं। सब एक दूसरे के गले मिलकर बधाई देने लगे हैं। मैनेजर एवं गार्ड ने स्वयं अपने कर कमलों से बैंक की नकदी और माल डाकुओं को समर्पित किया है। सारा सामान उनके लोडिंग ट्रक में लाद, उन्हें हाथ जोड़ विदा किया है। सबकी आंखों में अश्रु प्रेम की धाराएं बह चली है। हे पार्वती! ऐसा दिव्य दृश्य देखकर देवता गण नगाड़े-दुंदुभी बजा रहे हैं। आकाश मार्ग से फूलों की वर्षा हो रही है। डाकू शिष्टमंडल ने प्रेम पूर्वक सबसे विदा ली है।

मैनेजर ने बैंक लुटने के शुभ समाचार अखबारों में विज्ञापित किए हैं। डाकूराज धन-माल लेकर सीधे डाकू एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय की तरफ गया है। मामला समझते ही डाकू एसोसिएशन के अध्यक्ष ने डाकू सत्येंद्रसिंह को फटकारा- हे मूरख डाकू! तुमने डाकू समाज की सारी इज्जत मिट्टी में मिला दी है। लोग क्या कहेंगे! बिना बंदूक के बैंक लूट कर तूने डाकू समाज को बदनाम कर दिया है। आज से तुम्हें डाकू समाज से अलग किया जाता है।

बात सुनकर डाकू सत्येंद्रसिंह घबराया। मिन्नतें की। गलती के लिए क्षमा मांगी। लेकिन डाकू अध्यक्ष ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। पास के रिसोर्ट से यह सारा दृश्य एक नेता देख रहा था। डाकू सत्येंद्रसिंह अपने धन-माल सहित उस नेता की शरण में चला गया। नेता ने डाकू को अपने महल में गार्ड बना दिया है। नेता जी ने लूटे धन-माल का ट्रक स्विस बैंक में जमा कर दिया है।



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