अम्बेडकरनगर: बसखारी कस्बे के विवेक मेडिकल स्टोर का गैर जिम्मेदार संचालक, खांसी की जगह पकड़ा दी खुजली की दवा
| - Rainbow News Network - Jul 13 2021 5:21PM
  • संचालक की लापरवाही से डाक्टर के पर्चे पर मरीज को दिया गया खांसी की जगह खुजली का सीरप 
  • दवा पीते ही बिगड़ी मासूम की हालत, टाण्डा के बालरोग विशेषज्ञ के यहाँ चल रहा इलाज
  • औषधि निरीक्षक सुल्तानपुर में, अम्बेडकरनगर आने पर देखेंगी मामला
  • थानेदार बसखारी ने कहा कि थाने तक नहीं आया मामला

अम्बेडकरनगर। जिले की टाण्डा तहसील, ब्लाक व थाना बसखारी अन्तर्गत बसखारी कस्बे के एक मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा डाक्टर के पर्चे पर लिखी दवा के स्थान पर दूसरी दवा दे दी गई। जिसका सेवन करने के उपरान्त मरीज की हालत अत्यन्त नाजुक हो गई। आनन-फानन में मरीज को टाण्डा में प्रैक्टिस करने वाले एक विशेषज्ञ के पास ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत में अब सुधार आ रहा है। इस आशय का समाचार इण्टरनेट और प्रिन्ट मीडिया में प्रकाशित व प्रसारित हो रहा है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग, औषधि प्रशासन और अन्य सम्बन्धित विभाग के जिम्मेदारों ने मीडिया की इस खबर को नजन्दाज कर दिया और मामले की छानबीन करना गंवारा नहीं समझा।

घटना एक मासूम बच्चे से सम्बन्धित है, जिसकी उम्र सवा साल बताई गई है। पीड़ित और परेशान परिजनों ने बसखारी थाने में मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत करने के लिए तहरीर भी दी, लेकिन थानेदार साहब अपने अनुभवी अन्दाज में सब कुछ ग्रहण कर लम्बी डकार लिये और मामला ही पचा लिये। यही नहीं औषधि निरीक्षक श्रीमती अनीता कुरील से इस समाचार और उनके द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में रेनबोन्यूज ने जब जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि अभी तो मैं सुल्तानपुर मे हूँ। किसी ने इस तरह की कोई शिकायत नहीं किया है। ये खबर मेरी जानकारी में मीडिया/अखबारों के माध्यम से ही आई है। अम्बेडकरनगर आती हूँ तो देखती हूँ। यहाँ बता दें कि अम्बेडकरनगर में काफी समय से किसी ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती नहीं हुई है। सुल्तानपुर की ड्रग इंस्पेक्टर अनीता कुरील को यहाँ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसलिए ये ज्यादातर समय सुल्तानपुर में ही देती हैं। 

इसी तरह बसखारी थाने के थानेदार श्रीनिवास पाण्डेय से जब पूछा गया कि जो तहरीर मिली है उस बावत क्या पड़ताल हुई और अगली कार्रवाई क्या होने वाली है तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें ऐसी कोई तहरीर नहीं मिली है। यह तहरीर ऊपर-ऊपर आई होगी, लेकिन उन तक नहीं पहुँची। रही बात मीडिया में छपी खबर की कि उन्हें तहरीर मिली है यह गलत है। मीडिया ने बगैर हमसे पूछे यह बात छाप दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों ने आपस में बात कर मामला सुलझा लिया है। चूंकि बच्चा अस्वस्थ है और दवा विक्रेता ने अपनी गलती स्वीकार ली होगी इसलिए दोनों पक्ष बवाल को बढ़ाना नहीं चाहते। मेडिकल स्टोर संचालक ने मरीज के परिजनों को उसके इलाज हेतु आर्थिक इमदाद देकर मामला सुलझा लिया है ऐसा उन्होंने सुना है। मामला थाने तक नहीं आया। 

विवेक मेडिकल स्टोर संचालक/मालिक विवेक गुप्ता से इस प्रकरण के बावत जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एक ही स्थान पर मिलती-जुलती नाम वाली खांसी और खुजली की दवा रखी थी। भ्रमवश खांसी की दवा एस्कोरिल की जगह खुजली की दवा एसकेबियाल दे दी गई। अब मामला सलट गया है। दोनों पक्ष में किसी तरह का मतभेद नहीं है। वादी मामले को आगे नहीं ले जायेगा। इस तरह की बातें करके विवेक गुप्ता ने रेनबोन्यूज को आश्चर्यचकित कर दिया।

आश्चर्य क्यों और कैसे हुआ जानें आप भी........

  • पहली बात तो यह कि विवेक मेडिकल स्टोर बसखारी को औषधि प्रशासन द्वारा थोक विक्रय हेतु ड्रग लाइसेन्स जारी किया गया है, इसके बावजूद इस मेडिकल स्टोर के काउण्टर से दवाओं की फुटकर बिक्री कैसे की जा रही है? 
  • दूसरा यह कि जो व्यक्ति एस्कोरिल और एसकेबियाल जैसे शब्दों व दवाओं की शीशियों में अन्तर न समझ सके वह ड्रग लाइसेन्स कैसे पा सकता है? इसके अलावा अनेकों और भी कारण है जिनके आधार पर विवेक मेडिकल स्टोर बसखारी अम्बेडकरनगर का लाइसेन्स निरस्त किया जाना चाहिए। 

विवेक मेडिकल स्टोर बसखारी से सम्बन्धित प्रकाशित व वायरल हो रही खबर कुछ इस प्रकार है- 

अम्बेडकरनगर। खांसी, सर्दी की शिकायत होने पर एक मासूम बच्चा जिसकी उम्र एक वर्ष 3 माह है के लिए एक निजी चिकित्सक ने बच्चे का मेडिकल चेकअप कर उपचार हेतु दवाओं का पर्चा लिखा। जिसमें खांसी का एक सीरप भी था। मगर मेडिकल स्टोर संचालक ने खांसी के बदले खुजली की दवा की शीशी पकड़ा दिया। खुजली की दवा पीते ही बच्चे की हालत नाजुक हो गई, जिसे आनन-फानन में टाण्डा के एक बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया, जहाँ घण्टों इलाज के बाद मासूम की तबियत में सुधार होने लगा। 

किछौछा नगर पंचायत के मोहल्ला रामजानकी नगर निवासी श्यामजी पुत्र ओमकार नाथ अपने एक साल तीन वर्षीय पुत्र आरव को सर्दी, खांसी की शिकायत होने के बाद बसखारी कस्बा स्थित पोस्ट ऑफिस के पास एक प्राइवेट डाक्टर को दिखाने ले गये। डाक्टर ने पर्चे पर अन्य जरूरी दवाओं के साथ खांसी, सर्दी का सीरप एस्कोरिल लिखा। बच्चे के पिता श्यामजी बसखारी बाजार में स्थित विवेक मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदने के लिए गये और डाक्टर का पर्चा मेडिकल स्टोर के काउण्टर पर खड़े संचालक/मालिक को दिखाया। 

डाक्टर का पर्चा देखने के बाद मेडिकल स्टोर संचालक ने सर्दी, खांसी की सीरप एस्कोरिल प्लस की जगह खुजली की दवा एसकेबियाल की शीशी दे डाला। जिसको पिलाते ही बच्चे की हालत नाजुक हो गई। बच्चे को टाण्डा के बालरोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया और किसी तरह उसकी जान बच सकी। बच्चे के पिता श्यामजी विवेक मेडिकल स्टोर पर पहुँचे और दवा देने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने की बात बताई जिस पर मेडिकल स्टोर संचालक मासूम आरव के पिता भिड़ गया और अपनी गलती मानने की जगह उसे खूब खरी-खोटी सुनाई। एसओ बसखारी ने कार्रवाई की बात कही। 

इस तरह का गैर जिम्मेदाराना कार्य विवेक मेडिकल स्टोर बसखारी, अम्बेडकरनगर के संचालक विवेक गुप्ता द्वारा किया गया है इससे स्पष्ट होता है कि बन्दर के हाथ में अस्तुरा थमा दिया गया। इनकी लापरवाही जिसकी वजह से एक मासूम की जान पर बन आई और उसके सभी सम्बन्धित हलकान-परेशान रहे यह शोचनीय तो है ही साथ ही इस बात का सबूत है कि इन्हें अंग्रेजी दवाओं की बिक्री करने का कोई तर्जुबा नहीं है। हालंाकि इनका मेडिकल स्टोर अभी मात्र 2 वर्ष पुराना ही है, और इसे थोक बिक्री का लाइसेन्स प्राप्त है, तब इन्हें फुटकर बिक्री नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना औषधि विभाग के नियम एवं कानून के विपरीत तथा दण्डनीय अपराध है। देखना यह है कि इस मामले में स्वास्थ्य महकमा, औषधि प्रशासन और इन दोनों के द्वारा दी गई जाँच आख्या उपरान्त उच्चाधिकारीगण क्या करते हैं? 



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