जिला अस्पताल का रक्तकोष विभाग बना लूट का अड्डा
| -RN. News Desk - Jul 16 2021 5:21PM

अम्बेडकरनगर। महात्मा ज्योतिबा फुले संयुक्त जिला अस्पताल स्थित रक्तकोष विभाग के कर्मियों द्वारा जरूरतमन्द मरीजों को अपनी टरकाऊ नीति से काफी परेशान किया जाता है। ये लोग प्रसवा, प्रसूता एवं विकलांग महिलाओं तक को वांछित ग्रुप का ब्लड कोश में स्टाक रहने के बावजूद भी नहीं देते हैं। पात्र एवं गरीब मरीजों को डांट कर दूर भगा दिया जाता है। 

बीते दिवस दिव्यांग श्रीमती दर्शन मौर्या पत्नी अरूण कुमार मौर्या निवासी फत्तेनूरपुर-हंसवर को बी पॉजिटिव ग्रुप के रक्त की आवश्यकता थी। जिसकी जिला चिकित्सालय के सर्जन ने डिमाण्ड किया था। जब दर्शन मौर्या के परिजन जिला अस्पताल स्थित रक्तकोष विभाग वांछित ग्रुप का मांगा गया ब्लड लेने गये तो वहाँ इन लोगों को काफी दिक्कतें आईं।

श्रीमती दर्शन मौर्या के तीमारदारों, परिजनों ने डाक्टर का पर्चा व उसमें डिमाण्ड की गई बात का हवाला दिया तो भी उन सबकी तरफ ध्यान दिया गया। रक्त कोष विभाग के कर्मचारी आदत के अनुसार उन सबको टरकाते रहे। उनका यह रवैय्या परोक्ष रूप से धनकमाऊ ही था। बाद में प्रबुद्धवर्गीय हस्तक्षेप और दिव्यांग प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के उपरान्त काफी मशक्कत के बाद बी पॉजिटिव ग्रुप का एक यूनिट रक्त मिल सका। 

जिला अस्पताल के रक्त कोष विभाग के कर्मियों की बिचौलियों, दलालों, तथाकथित समाजसेवियों एवं अनेकों स्वयं भू रक्तदाताओं से गठजोड़ की चर्चा जोरों पर है। रक्त कोष विभाग के प्रभारी व अन्य कर्मचारी तथाकथित ब्लड डोनर्स और समाजसेवियों से घिरे रहते हैं। ये तथाकथित ब्लड डोनर्स जिनका सम्बन्ध ब्लड माफियाओं से बताया जाता है नित्य-नियमित तरीके से रक्तकोष विभाग के इर्द-गिर्द चक्कर लगाते रहते हैं, और अच्छे कमीशन पर हर प्रकार के ग्रुप का ब्लड पैकेट जरूरतमन्दों को मुहैय्या कराते रहते हैं।

इनके बारे में बताया गया है कि इन तथा कथित ब्लड डोनर्स की गतिविधियाँ संदिग्ध हैं। इनके सम्बन्ध जरायम पेशा से जुड़े लोगों से भी हैं। कहते हैं कि जरूरमन्द को यदि आसानी से वांछित ग्रुप का ब्लड लेना हो तो सबसे पहले इन्हीं लोगों की खुशामद करनी पड़ती है। वरना 15 से 20 हजार रूपए प्रति यूनिट की दर से ब्लड बाहर से खरीदने को बाध्य होंगे। 



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