सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर छोड़कर आखिर क्यों अयोध्या चुनाव लड़ने जाएंगे?
| Agency - Jul 28 2021 4:10PM

सीएम योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने की अटकलों के बीच गोरखपुर से सवाल उठा है कि गोरक्षपीठाधीश्वर गोरखपुर छोड़कर आखिर क्यों अयोध्या या कहीं और से चुनाव लड़ने जाएंगे? उनके तमाम समर्थकों का दावा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी विधानसभा चुनाव गोरखपुर से ही लड़ेंगे। इसके लिए उनके तर्क भी हैं, शासन के आला अफसर शहर के संभ्रांत लोगों को फोन मिलाकर पूछ रहे हैं कि महराज जी (योगी आदित्यनाथ) गोरखपुर से चुनाव लड़ेंगे तो कैसा रहेगा? समाज में किस तरह का संदेश जाएगा? जिस सीट से चुनाव लड़ेंगे, वहां के वर्तमान विधायक का रुख क्या रहेगा?

यूपी के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। यह तय होने के बाद कौन कहां से चुनाव लड़ेगा, इसकी कयासबाजी शुरू हो गई है। हाल ही अयोध्या के विधायक के यह कहने पर कि अगर योगी यहां से चुनाव लड़ना चाहें तो उनका स्वागत है। वे सीएम योगी के लिए सीट छोड़ सकते हैं। मीडिया में यह बात सामने आते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से चुनाव लड़ने की अटकलों का बाजार गर्म हो गया। यह चर्चा गोरखपुर तक आई तो राजनीति के जानकार व योगी समर्थक हैरत में पड़ गए। उनका कहना है कि वैसे तो सीएम प्रदेश की किसी भी सीट से लड़कर चुनाव जीत सकते हैं।

वे सवाल उठाते हैं, कोई एक भी वजह तो बताए कि योगी गोरखपुर को क्यों छोड़ दें? उनकी गोरखपुर में जमी जमाई जमीन है। उनके प्रभाव को रेखांकित करने के लिए 2002 का प्रसंग लोगों को याद रखना चाहिए जब योगी ने हिंदू महासभा के उम्मीदवार के तौर पर डॉ. आरएमडी अग्रवाल को बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ न केवल उतारा, बल्कि जिताया भी था। सदर विधानसभा से उस सीट पर तब से डॉ आरएमडी अग्रवाल चार टर्म से विधायक हैं। उनके समर्थक कहते हैं कि 2022 में योगी ही भाजपा से मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे। स्टार प्रचारक के तौर पर अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जाकर चुनाव प्रचार करना होगा।

अगर गोरखपुर से चुनाव लड़ेंगे तो खुद की सीट पर प्रचार का कोई दबाव ही नहीं रहेगा। ऐसे में वे अनजानी सीट पर क्यों जोखिम लेना चाहेंगे ? वह गोरखपुर के एक-एक भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता को नाम से जानते हैं। बूथ व मंडल स्तरीय संगठन से सीधा संपर्क रखते हैं। समाज के ज्यादातर तबके में अच्छी पैठ है। हिंदू युवा वाहिनी (हियुवा) का भी साथ मिल जाएगा। गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हिंदू युवा वाहिनी के संरक्षक भी हैं।

गोरखपुर में इस संगठन की जड़ें बेहद मजबूत हैं। बूथ व मंडल स्तरीय संगठन काम कर रहा है। महानगर व जिला इकाई भी सक्रियता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री अगर गोरखपुर से चुनाव लड़ेंगे तो अपने क्षेत्र में बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह यूपी के अलग-अलग जिलों में जाकर चुनाव प्रचार करेंगे। इसका फायदा पार्टी व अन्य प्रत्याशियों को मिलेगा। 



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