...... इस हुनर से काफी राहत मिलती है, आप भी यह हुनर सीखें
| -Bhupendra Singh Gargvanshi - Sep 10 2021 2:33AM

है तो सब झूठ फिर भी अगले की थोड़ी सी हमदर्दी पाने के लिए यह सबसे अचूक हुनर

यदि लिया हुआ उधार पैसा वापस देने का तगादा आ रहा हो या काम जल्दी करवाने के लिए बार बार रिमाइंडर तो बस नीचे लिखे वाक्यों को बोल देने से राहत मिलेगी---

पार्ट--1

हमारे फादर की डेथ हो गयी है--

हेलो--कौन

जी समझ गया । भाई जान मेरी मजबूरी समझो।

वो क्या है कि हमारे पिता जी की डेथ हो गयी है। थोड़ी मोहलत दो न। क्रिया कर्म से फुर्सत पाते ही इंतेजाम करूँगा। अगला दुख यानी शोक व्यक्त करता हुआ कहता है--ठीक है भाई। निपटने के बाद हमारा काम करने या पैसा वापसी का खयाल जरूर रखना।

सभी को मालूम है कि भाई के  फादर की डेथ लगभग 50 साल पहले ही हो गयी थी, जब वह बच्चा थे।

पार्ट--2

माता जी अस्पताल में एडमिट हैं---

हेलो। ---जी कौन हैं ----बोलें । क्या बार बार वही बोलूँ। कब तक और इन्तेजार करना पड़ेगा।

देखो भाई जी --मेरी मदर अस्पताल में एडमिट है।दिक्कत है। फुर्सत पाते ही कोई न कोई उपाय करूँगा। धीरज रखें। ---चलो ठीक है भाई। माता जी के अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर आने और स्वस्थ हों जाने पर मेरा काम हो जाना चाहिए। ----जरूर भाई । ओके।

सच्चाई यह है कि भाई जी की मदर ठीक ठाक और अपने घर पर परिवार के साथ हैं।

 पार्ट--3

बड़े भैया की तबियत खराब है

हेलो।---अब कौन।--कौन बोल रहा है। ओह--हाँ भाई जी बोलें।
क्या बोलूं।अब एक ही बात रोज ब रोज वह भी बार बार बोलने में एनर्जी वेस्ट होती है।
बताओ मेरा काम कब तक होगा। हैं या ना।

ओह तो बात यह है। थोड़ा सब्र करो न। मेरी मजबूरी यह है कि बड़े भैया की तबियत खराब चल रही है। बड़े नाम चीन डॉक्टर का इलाज चल रहा है।उनके ठीक होते ही मैं अपना ध्यान आप के काम पर फोकस करूँगा। प्लीज मेरी मजबूरी समझो। बड़े भैया जो मेरे पिता तुल्य हैं , के ऊपर मेरा ध्यान लगा रहता है। आप भी गॉड से प्रे करो कि मेरे भैया मेरे आदर्श जल्द स्वस्थ हों और बेड से उठकर टहलें घूमे।

हाँ भाई। तुम इस समय कठिन दौर से गुजर रहे हो। मैं गॉड से प्रे करता हूँ कि वह तुम्हारे बड़े भाई को जल्द बीमारी से मुक्ति दिलाये। बट वन थिंग अगेन ---रोगी के ठीक होते ही हमारा काम हो जाना चाहिए।
जरूर। ब्रदर। मैं पूरी कोशिश करूंगा। प्रोमिस।

 सच्चाई से इतर हुई इस दूरभाषीय वार्ता को अनेको लोगों ने सुना और अवाक रह गए। सुनने वालों ने सिर पीटा।इसके सिवाय क्या करते ------

मिथ्यावादी  जी का यही चौबीसों घण्टे का काम जो है।



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