अम्बेडकरनगर : बासी दाल खाने से दो बच्चियों की मौत
| -Satyam Singh - Sep 19 2021 1:14AM

अम्बेडकरनगर । जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भियांव क्षेत्र के खानपुर हुसैनाबाद गांव में शुक्रवार को एक ही परिवार के चार सदस्य बासी दाल खाने से फूड पॉइजिनिंग के शिकार हो गये, जिससे परिवार की दो बच्चियों की मौत हो गयी, जबकि दो अन्य का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भियांव में इलाज चल रहा है।खानपुर हुसैनाबाद निवासी प्रदीप कुमार के परिवार ने गुरुवार की रात को दाल और रोटी का भोजन किया और आधी रात के बाद से ही पूरे परिवार को उल्टी दस्त शुरू हो गया। मुखिया के खुद बीमार होने के चलते परिवार कहीं इलाज के लिए जा नहीं सका और सुबह शुक्रवार को दोपहर में चार घन्टे कर अंतराल पर प्रदीप की दो पुत्रियां शालिनी (12) व सलोनी (10) की मृत्यु हो गयी, जबकि पिता प्रदीप व उसके 16 वर्षीय पुत्र राजकरन को रफीगंज बाजार स्थित एक निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया, जहां दोनों का इलाज शनिवार तक जारी रहा।

इस बीच स्वास्थ्य महकमे को घटना के दूसरे दिन खबर हुई तो सीएचसी भियांव के प्रभारी बीके यादव ने रफीगंज निजी चिकित्सक के यहां पहुंच कर बीमार प्रदीप को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भियांव में भर्ती कराया जबकि पुत्र राजकरन को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गयी। उधर थाना प्रभारी कटका विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि उन्हें घटना की कोई जानकारी नहीं है। बताया गया कि प्रदीप का परिवार काफी गरीब है और इलाज के अभाव में उसकी दो पुत्रियों ने दम तोड़ दिया। गांव के पूर्व प्रमुख राम नयन निर्दोष ने बताया ग्रामीणों की मदद से दोनों मृत बच्चियों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से ग्रामीण नाराज: दो सगी बहनों की मौत से 24 घन्टे तक बेखबर स्वास्थ्य महकमे के प्रति ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त परिवार को वायरल फीवर भी था। मौत के बात भी कोई कर्मचारी या स्वास्थ्य कर्मी गांव नहीं पहुंचा। पूर्व प्रमुख रामनयन निर्दोष ने मांग की है कि गांव में दवा छिड़काव व मेडिकल टीम को भेज कर जांच करायी जाये।

कहीं आर्थिक तंगी तो नहीं मौत का कारण: खानपुर हुसैनाबाद बाद गांव निवासी प्रदीप का पूरा परिवार काफी आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। प्रदीप की पत्नी की मृत्यु दस वर्ष पहले हो चुकी है। छोटे छोटे तीन बच्चों की यह परवरिश कर रहा था लेकिन जैसे जैसे खर्च बढ़ता गया परिवार में आर्थिक तंगी भी बढ़ती गयी। यहां तक कि कभी कभी दो जून की रोटी तक का इन्तजाम भी नहीं हो पाता है। सामूहिक रूप से पूरे परिवार का बीमार पड़ना व दो की मृत्यु का कारण कुछ लोग दबी जुबान से आर्थिक तंगी बता रहे हैं।



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