सड़क चौड़ीकरण में जिम्मेदार हाकिम हुक्मरानों ने अदूरदर्शिता का परिचय दिया
| -Satyam Singh - Sep 19 2021 4:23AM
  • शहजादपुर का सड़क चौड़ीकरण हुआ सभी लोगों के लिये कष्टकारक
  • डॉ0 मेला और भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी की सामायिक टिप्पणियां अवश्य ही पढ़े

अंबेडरकरनगर। शहजादपुर फौव्वारा तिराहे से नई सड़क होते हुए मालीपुर रोड स्थित शहजादपुर पुलिस चौकी तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर दो दिनों में सैकड़ो हरे मोटे-ताजे दमदार वृक्षों को काटकर गिरा दिया गया। इस इलाके में निवास करने वाले 25 हजार लोग अभी तक बिजली-पानी से महरुम तो हैं ही, साथ ही अपने घरों से निकलकर अवरुध सड़कों पर व गलियों में गमना-गमन भी नहीं कर पा रहें। वह दिन/समय दूर नहीं जब हरे वृक्षों की कटान से इन्हें प्राणवायु ऑक्सीजन मयस्सर होना मुश्किल होगा। ये लोग संास फूलकर घुट-घुट मरने को विवश होगें। इस समय अपने-अपने घरों में कैद लगभग 25 हजार लोग फिरंगी शासनकाल जैसा काला-पानी की सजा काट रहें हैं। गिरे हुए बिजली के तार, कटे हुए पड़े, तने और पत्तियां देखकर इसी विनाशलीला के उपरांत दिख रहा शहर देखकर जिले के प्रख्यात चिंतक, विचारक, वरिष्ठ पत्रकार, संपादक डॉ0 मेला ने अपनी बेबाक टिप्पणी किया है। उनकी इस टिप्पणी में हाकिम और हुक्मरानों की अदूरदर्शिता पर व्यंग्यात्मक प्रहार किया गया है जो उचित और प्रासंगिक है।

डॉ0 मेला संपादक मीडिया गांव हिंदी समाचारपत्र की कलम तटस्थ भाव से चलकर शब्दों का ऐसा प्रहार करती है जिससे लक्ष्य का बच पाना मुश्किल-सा होेता है। डॉ0 मेला के विचार और उनकी टिप्पणियों से भले ही लोग सहमत होने और उसके प्रदर्शन से हिचकते हों परंतु जिले के वयोवृद्ध पत्रकार भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी मुक्त कंठ से डॉ0 मेला की प्रशंसा ही करते हैं।

रेनबोन्यूज डॉ0 मेला और गर्गवंशी की टिप्पणियों का यहां हुबहू प्रकाशन कर रहा है। आपका मंतव्य और टिप्पणियां अपेक्षित हैं-@सत्यम सिंह/रेनबोन्यूज


डॉ0 मेला का बेबाक विचार-प्रहार

अंबेडकर नगर ।
पहली नजर में देखने पर ,
शहर  तूफान की जद में आया हुआ प्रतीत होता है ।
शहजाद पुर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर ,
सैकड़ों हरे ,मोटे ताजे ,दमदार वृक्षों को आनन-फानन में काटकर गिरा दिया गया ।
नई सड़क से शुरू होकर मालीपुर रोड तक ,
गिरे हुए बिजली के तार ....
कटे पिटे छोटे-मोटे पेड़ ,
उनके तने और पत्तियों के झुरमुट ....
जैसे किसी बहुत बड़े 'विनाश लीला' की कहानी कह रहा हो।
 आवागमन को बाधित कर .... चौड़ीकरण के नाम पर जैसे किसी बड़ी आपदा को आमंत्रित कर दिया गया है .
राहगीर, बीमार और छोटे-छोटे बच्चे...
 जैसे तैसे कूद फांद कर ,
इधर से उधर बंदरों के तर्ज पर आ जा रहे हैं ।
पूरा शहर मुसीबत की जद में दिखाई दे रहा है।
 शाही फरमान के पालन में ,
लोकहित का जरा सा भी ध्यान नहीं रखा गया है ।
जनता को भेड़ बकरियां समझने वाले प्रशासनिक अमले के लोगों की ,
दक्षता और लोकहित की सोच पर स्वयं में एक सवालिया निशान है।
  किसी भी व्यवस्थाकार का फर्ज होता है कि ,
कार्य करते समय आम लोगों पर कितना असर कारक होगा ए कदम।
पूरे शहर और दूरदराज से आने वाले राहगीरों की तकलीफों का ज़रा सा भी ध्यान नहीं रखा गया है!
 दोनों पटरियों के पेड़ों की कटाई एक साइड से ,
बारी बारी सुगमता पूर्वक भी ....
 निपटाया जा सकता था।
 चौड़ीकरण के नाम पर ,
असुविधा और पर्यावरण के साथ घातक रंजिश ,
करने की कोई बड़ी जरूरत नहीं थी ।
शहर की आबादी और जाम की समस्या रातों-रात नहीं बढ़ी है ?
तमाम बार रिंग रोड की कल्पना वाले लेख ,
सरकार को सुझाए गए हैं ।
इससे जहां जाम की समस्या से निजात मिलता ।
वहीं शहर का आंतरिक सौंदर्य भी ना नष्ट होता।
 किसी विधवा के मांग की तरह 'सुनी सड़कें, सुंदरता का क्या बोध कराएंगी ?
 समझ के बाहर है ।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता का यह कहना कि ,
बीच के डिवाइडर की  खाली जगह में हरित क्रांति पैदा कर दी जाएगी ।
और बिजली के खंभे लगा दिए जाएंगे।
 लेकिन सैकड़ों सालों के जिन पेड़ों को काटकर ,
नेस्तनाबूद कर दिया गया !
जनता के लिए दुश्वारियां खड़ी कर दी गई।
 क्या हल है उनके पास, ऑक्सीजन पैदा कर रहे हैं ऐसा करके ?
आनन-फानन में जल्दी-जल्दी पेड़ों को काटकर गिरा देना
 और चौड़ीकरण के नाम पर विकास को इतनी तेज दिशा देना ,
रातों-रात बनावटी तूफान खड़ा कर देने की जिला प्रशासन की क्या मजबूरी थी ?
महीनों के पड़े  पेंडिंग कार्य को जब ,
एक दिन में हल कर लेने की नीयत  बनेगी ।
तो आम आवाम का परेशान होना कोई बड़ी बात नहीं है।
जब रिंग रोड का दम नहीं बन पा रहा है तो ,
चौड़ीकरण के नाम पर विनाशकारी प्रक्रिया ही,
समस्या का समाधान है ?


 

डॉ0 मेला के बेबाक विचार-प्रहार पर भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी की टिप्पणी

हाकिम और उनके साथ सरकारी अमले ने तूफान के बाद विध्वंश हुए शहर की सड़कों पर चहलकदमी किया था। कोरम पूरा हो गया। शासन को खबर फ़ोटो भेजी गई। लोक निर्माण विभाग, बिजली महकमा और महकमा जंगलात को कथित रूप से काम निपटाने की हिदायतें दी गयी। अब इससे ज्यादा किस लोक हित की बात की जाए। सड़क चौड़ीकरण में अनेको जिम्मेदारों की सभी जेबें तो चौड़ी होगी ही।

यदि हाकिम के लिए सरकारी तौर पर हवाई जहाज, हेलीकाप्टर की व्यवस्था रहे तो वो भी बड़े माननीयों की तरह बाढ़ का सर्वेक्षण करें। ----कितना फांय फांय किया जाए। लिखना बेकार---।पूरा सिस्टम माशा अल्लाह।

डॉ0 मेला की टिप्पणी

दरअसल देश के हुक्मरानों को लगता है कि
मैं ही अंतिम सत्य हूं ।"
जिस जनपद में मेरी नियुक्ति है ,
वहां जंगलराज है ।
वहां के प्राणी वन्य जीव है ।
इन्हें जैसे भी रखा जाएगा,
और जैसा भी भोजन दिया जाएगा यह जीवन यापन कर लेंगे ।
हुंकार तक नहीं भरेंगे ।
स्कूलों को बंद रखने के पीछे,
 एक बहुत बड़ी साजिश यह भी है।
लोग पढ़े लिखे होंगे तो ,
अपने अधिकार और कर्तव्य की परिभाषा को ठीक से जानेंगे ।
मूर्ख जनता हाकिम और हुकूमत,....

 दोनों के लिए बहुत लाभकारी होती है ।
जिला प्रशासन अंबेडकरनगर  जिस संवेदनहीनता का परिचय दिया है ।
वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है ।
रिंग रोड के बारे में साहब ने कभी शासन को आगाह नहीं किया कि...
 बेहद जरूरी है ।
चौड़ीकरण के नाम पर ,
रातों-रात तूफान लाकर खड़ा कर देना।
 उनके निजी मन का शक्ति प्रदर्शन...
 और अपनी काबिलियत का नमूना है।



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