सामाजिक एकता का खात्मा डेमोक्रेसी को चैलेंज: प्रो मलिक
| - Rainbow News Network - Nov 25 2021 5:24AM

वाराणसी।  वाराणसी के नव साधना प्रेक्षागृह तरना में 25 नवम्बर 2021 दिन गुरुवार को राइज एंड एक्ट के तहत एक दिवसीय राष्ट्रीय एकताए शांति व न्याय विषयक सम्मेलन में वक्ताओं ने राष्ट्रीय एकताएशांति और न्याय की स्थापना को लेकर अपने.अपने विचार रखे। वक्ताओं का मत था कि राष्ट्रीय एकता के कमजोर होने से लोकतंत्र कमजोर होता है। जरूरत हमें सामाजिक ताने.बाने को मजबूती प्रदान करते हुए देश की एकता अखंडता को अक्षुण रखने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि बीएचयू के प्रोण् दीपक मलिक ने कहा कि आज सामाजिक एकता का लोप हो रहा है। एकता के पाठ पढ़ाये नहीं जाते। यह डेमोक्रेसी को चैलेंज है। दलितोंए महिलाओं की दशा नहीं बदली। वह आज भी बदतर हालात में जी रहे हैं। कोविड के चलते बहुत सारी प्रक्रियाएं धीमी हो गयी। भले ही बहुत सारी कोशिशें की गई। 

उन्होंने कहा कि आज  इतिहास संस्कृति बदलने वाली ताकतें सक्रिय है। हमें इन  पर चिंतन करने और अपनी सोंच में बदलाव व सकारात्मक पहल की जरूरत है।चित्रा सहस्त्रबुद्धे ने सामाजिक सौहार्द पर चर्चा में कहा कि सामान्य जीवन जी रहे स्त्री व पुरुष का जीवन सामाजिक होता है। सामाजिक सौहार्द सामाजिक जीवन की शक्ति व ज्ञान है। गंगा का उद्धरण देते हुए कहा कि जिस तरह गंगा धाराओं को एक कर आगे बढ़ती है वही प्यारए नवीनता और सृजन है। सामाजिक कार्यकर्ता लेनिन रघुवंशी ने सामाजिक बुराइयों पर कुठाराघात करते हुए कहा कि जातिवादए वंशवादए धर्म को लेकर होने वाली नफरत की लड़ाई बिकने वाली लड़ाई है एइसे हमें समझना होगा ।अमीर गरीब की खाई को पाटना होगा। वंचित व दलित तबके को सामाजिक न्याय दिलाना ही बाबा साहब अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

पत्रकार एके लारी ने कहा कि आज के दौर में हमें तय करना होगा कि हम किस मीडिया की बात करते हैं। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व प्रिंट मीडिया की चर्चा करते हुए कहा कि मीडिया को लोकतंत्र का प्रहरी कहा जाता है। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह खबरों के मामले में न्याय करें। संचालन व आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉण् मोहम्मद आरिफ ने कहा कि डॉण् अंबेडकर ने कहा था कि संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो अगर उसे लागू करने वाले ठीक नहीं होंगे तो संविधान अपना अस्तित्व खो देगा।आज स्थिति वैसी ही आ गयी है।हमें सावधान रहने की जरूरत है।दूसरे सत्र में गंगा.जमुनी तहजीब के शायर नजीर बनारसी को उनके ज्यंती पर याद किया गया। डॉण्कासिम अंसारी ने नजीर बनारसी को मिर्जा गालिब की परम्परा का शायर बताया।उन्होंने कहा कि उनकी शायरी हो या गजल या फिर नज्म उसमें हर जहां कौमी एकजहती दिखती हैण्वहीं उन्होंने अपने शहर बनारस और गंगा को लेकर जो लिखा है उसकी कोई तुलना नहीं है।

प्रोण्मलिक ने इस बात पर अफसोस जताया कि अपने शहर में नजीर अब बेगाने हो गये है। जिस बनारस की परम्पराओं को लेकर उन्होंने ढ़ेर सारे शेर लिखे उस बनारस का उन्हें भूलना दुखद है पत्रकार एके लारी ने कहा नजीर ऐसे शायर थे जिन्होंने कभी किसी तरह के सम्मान को महत्व नहीं दिया। तमाम तरह के सम्मान के प्रस्ताव उनके पास आते थे लेकिन वो हर बार ये कहकर ठुकरा देते थे कि मेरी शायरी से निकले संदेश लोगों के जेहन में रहे यही असल सम्मान है। तृतीय सत्र में पूर्वी उत्तर प्रदेश से आये हुए अध्यापकएपत्रकारए विद्यार्थीएवकीलएसामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी बात कही।सत्र की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक कार्यकर्त्री रंजू सिंह ने कहा कि आज एकता और सौहार्द की बात करने वाले हासिये पर है हमें इस जमात को बढ़ाना है।आज बिना संघर्ष किये मंजिल पर नहीं पहुंचा जा सकता है।भारत संघर्ष से ही बना है।

गोष्ठी में मोण् खालिदए डाण् क़ासिम अंसारीए सी बी तिवारीए अंकिता वर्माए रामकिशोर चौहानए हृदयानंद शर्माएलाल प्रकाश राहीए बृजेश पाण्डेयए प्रतिमा पाण्डेयए प्रज्ञा सिंहए अरुण मिश्राए मोण् असलमए सुधीर जायसवालए अब्दुल मजीदए कृष्ण भूषण मौर्यए रंजू सिंहए प्रज्ञा सिंहए अर्शिया खानएहरिश्चंद्र बिंदएआबिद शेखएशमा परवीनएहर्षित कमलेशए अयोध्या प्रसादए रीता सिंह आदि प्रतिभागी मौजूद रहे।  कार्यक्रम का संचालन लाल प्रकाश राही और धन्यवाद सुधीर जायसवाल ने किया।

(Posted By:- Kapil Dev Vishwakarma, Mob.:-9519364890)



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