और अब कोरोना के नए अवतार ओमिक्रान की दहशत
| - Dr. Rajendra Prasad Sharma - Nov 28 2021 2:29AM

कोरोना के दो साल होने के बावजूद यह नए नए अवतार लेकर सामने आ रहा है। अब अफ्रीका से यह नया अवतार ओमिक्रान के रुप में दुनिया को हिलाने आ गया है। कोरोना के नए वैरियंट ओमिक्रान को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बैरिंयट ऑफ कंसर्ट घोषित करने से ही इसकी गंभीरता को समझा जा सकता है। विषेषज्ञों द्वारा माना जा रहा है कि कोरोना के डेल्टा अवतार से भी यह सात गुणा तेजी से फैलने वाला वैरियंट है। यह भी साफ हो जाना चाहिए कि वैरियंट की गंभीरता को देखते हुए उसे कंसर्ट ऑफ वैरियंट घोषित किया गया है अन्यथा स्थिति में तो सामान्यतः वैरियंट ऑफ इंटरेस्ट की श्रेणी में ही रखा जाता है। कंसर्ट की श्रेणी में गंभीरता को देखते हुए ही ड़ाला जाता है। 

विषेषज्ञों द्वारा माना जा रहा है कि यह वैरियंट डेल्टा से भी ज्यादा तेजी से फैलने वाला वैरियंट है। एक अनुमान के अनुसार डेल्टा से सात गुणा अधिक तेजी से यह फैलता है। गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि न्यूयार्क में 15 जनवरीए 2022 तक के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी है तो दुनिया के देश दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर रोक लगा रहे हैं। गौरतलब है कि कोरोना के ही वैरियंट डेल्टा ने अक्टूबर 2020 में भारत में प्रवेश किया और जबरदस्त तरीके से प्रभावित करने के साथ ही जानलेवा साबित हुआ। ओमिक्रान को गंभीरता से लेने का एक कारण यह भी है कि जहां एक और यह वैरियंट तेजी से फैल रहा है वहीं यह भी माना जा रहा है कि वैक्सीन इस पर अधिक असरकारक नहीं है। अफ्रीका में करीब दो माह से प्रभावित कर रहा यह वैरियंट ओमिक्रान पिछले चार से पांच दिनों में ही दक्षिण अफ्रीका के साथ ही हांगकांगए बोत्सवानाए बेल्जियमए जर्मनीए चेक गणराज्यए इजराइल और ब्रिटेन पहुंच गया है। भारत में भी बैंगलोर उतरे अफ्रीका से आए दो मरीज कोरोना संक्रमित मिलने से हडकंप मच गया है पर अभी यह पुष्ट नहीं हो पाया है कि वे ओमिक्रान से ही संक्रमित है या अन्य किसी वैरियंट से। इसी तरह से पुष्कर में तीन फ्रांसिसी महिला पर्यटकों के कोरोना संक्रमित मिलना चिंता का सबब बन गया है।

ओमिक्रान की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि शुक्रवार को देश में शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में चिंता व्यक्त की तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उच्चस्तरीय बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए और बूस्टर डोज की तैयारी करने को कहा। हांलाकि देश में कोरोना की चिंता के बीच ही 15 दिसंबर से अंतरराष्ट्रीय उड़ाने शुरु करने की घोषणा की गई है पर इसकी नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता हो गई है। योरोपीय संघ सहित दुनिया के देश अफ्रीका से हवाई उड़ानों पर रोक लगा रहे हैं। अब तक 1200 से अधिक संक्रमित मिलने से दुनिया दहशत में आ गई है। भारत सहित दुनिया के देश स्थितियों पर गंभीरता से नजर रखे हुए है और आवश्यक एहतियाती तैयारी में जुट गए हैं। दरअसल यह माना जा रहा था कि कोरोना का अभिशाप अधिक दिन नहीं चलेगा पर देखते देखते दो सालों में ही दुनिया के देश इसके पांच वैरियंट से रुबरु हो चुके हैं। सितंबर 2020 में इंग्लैण्ड में अल्फाए मईए 2020 में दक्षिण अफ्रीका में बीटाए नवंबरए 2020 में ब्राजील में गामाए अक्टूबरए 2020 में भारत में डेल्टा और अब ओमिक्रान ने असर दिखाना शुरु कर दिया है। दरअसल वायरस की जीनोमिक संरचना में बदलाव होकर के यह नए वैरियंट का रुप ले लेता है। कोरोना ने वैसे तो पूरी दुनिया में अपना असर दिखाया है पर अमेरिकाए ब्राजीलए भारत संक्रमण और मौत के मामलों में सबसे अधिक प्रभावित देश रहे हैं।

दरअसल कोरोना जैसी महामारी से जुझने का दुनिया के देशों के सामने यह पहला अवसर आया है। इससे पहले प्लेगए कोलेराए फ्लूए काला ज्वरए तपेदिकए पोलियोए एड्सए खसराए चेचक जैसी कई महामारियों से जूझ चुका है। समय के साथ इनका ईलाज भी खोजा गया। पर मजे की बात यह है कि कोरोना के चलते तपेदिक वापिस अपना असर दिखाने लगी है और पिछले दिनों में तपेदिक के कारण मौत के मामलें लगातार बढ़ रहे हैं। सवाल यह है कि कोरोना प्रोटोकाल की बावजूद जिस तरह से कोरोना का थोड़ा असर कम दिखते ही प्रतिबंधों में छूट और शिथिलता बरती जाने लगी तो कोरोना नए अवतार में सामने आने लगा। नो मास्क नो एंट्रीऔर दो गज की दूरी के संदेश के बावजूद धीरे धीरे इनका असर कागजी रहने से तबाही का मंजर जारी है। लापरबाही के चलते कोरोना है कि थोड़ी राहत देकर वापिस पूरी तेजी से आक्रामक हो रहा है। अभी वैक्सीनेशन भी पूरी तरह से नहीं हो पाया है। वैक्सीनेशन के कम असर के आए दिन आने वाले समाचारों से लोग हतोत्साहित हो रहे हैं सो अलग। दरअसल लोगों में निराशा अधिक व्याप्त होने लगी है। ऐसे में इस सबके साथ ही आशा और विश्वास की बूस्टर डोज ज्यादा जरुरी हो जाती है।

मजे की बात यह है कि एक और वापिस कोरोना के मामलें बढ़ने लगे हैं तो दूसरी और शिथिलता भी बढ़ती जा रही है। योरोपीय देशों में पाबंदियों को हटानें को लेकर बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में सबकी जिम्मेदारी हो जाती है कि लोगों को कोरोना प्रोटोकाल की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए। लोगोें को यह समझना होगा कि जीवन है तो सबकुछ है नहीं तो कुछ भी नहीं। ऐसे में अभी सतर्कता जरुरी है और इसे समझना व समझाना होगा।

Posted By:- Kapil Dev Vishwakarma, Mob.- 9519364890



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