पैकफेड ने घोटाला करके हासिल किया तीन गुना पुनरीक्षित बजट
| -RN. News Desk - Dec 17 2021 1:37AM

डीएम के आदेश के बाद भी नहीं हो सकी कार्रवाई

मामला राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में आवासीय भवन व चहार दीवारी निर्माण का

अम्बेडकरनगर। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में चहार दीवारी व आवास निर्माण के टेण्डर और भुगतान में की गई व्यापक गड़बड़ी व करोडों के भ्रष्टाचार का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था के अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से हुए करोड़ों के घोटाले व फर्जीवाड़े को संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच का आदेश दिया, बावजूद इसके कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार प्रकरण को पूरी तरह से हजम कर जाने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं। 

विवरण अनुसार मुख्यालय (अकबरपुर-टाण्डा रोड पर) स्थित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में टाइप-5 आवासीय परिसर, कार्यालय परिसर और टाइप-3 आवास एवं चहार दीवारी बनाने की जिम्मेदारी पैकफेड संस्था को दी गई है। इसमें सबसे ज्यादा घोटाला चहार दीवारी निर्माण में ही किया गया। निर्माणदायी संस्था ने शासन से पुनरीक्षित बजट हासिल करने हेतु चहार दीवारी निर्माण की लागत का स्टीमेट लगभग तीन गुना अधिक दिखाते हुए तैयार किया। उक्त बजट मिलने के बाद संस्था के अधिकारियों/ठेकदारों ने उसका बन्दरबांट कर लिया। मनमाने तौर पर निर्माण की लागत बढ़ाने के सवाल पर कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। 

इसी परिसर में राजकीय निर्माण निगम द्वारा पाँच से 8 हजार रनिंग मीटर के हिसाब से चहारदीवारी के निर्माण की बातें कही हैं। वास्तविकता भी यही बताई गई कि चहार दीवारी के निर्माण में अधिकतम 10 हजार रनिंग मीटर तक लागत आती है जबकि पैकफेड ने उसी चहार दीवारी के निर्माण का स्टीमेट 25 हजार 162.31 रनिंग मीटर बनाकर शासन को भेज दिया और लगभग तीन गुना अधिक लागत बताकर तकरीबन 31 लाख रूपए का बजट प्राप्त कर लिया। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से होने के बाद डीएम सैमुअल पॉल एन. ने तीन सदस्यीय टीम का गठन कर प्रकरण की जाँच का आदेश दिया। 

इस टीम में शामिल लोकनिर्माण विभाग प्रान्तीय खण्ड के अधिशाषी अभियन्ता शंकर्षणलाल, निर्माण खण्ड के अधिशाषी अभियन्ता महावीर सिंह व जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक राकेश प्रसाद से स्थलीय निरीक्षण व प्रकरण की जाँच कर आख्या मांगी गई। उक्त अधिकारी जब जाँच के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज गये तो वहाँ कार्यदायी संस्था का कोई जिम्मेदार मिला ही नहीं। मौके पर एक ठेकेदार ही मिला। कार्यदायी संस्था पैकफेड के जिम्मेदार शासन से मिले बजट के साथ ही उक्त बड़े घपला-घोटाला मामले को हजम करने में लगे हुए हैं। 



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