सियासी हलचल : पवन पाण्डेय पुत्र प्रतीक के साथ बसपा में हो सकते हैं शामिल
| -RN. News Desk - Jan 2 2022 3:15AM

                         पवन  कुमार  पाण्डेय                                                                    प्रतीक पाण्डेय

प्रतीक पाण्डेय हो सकते हैं कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के बसपा प्रत्याशी

पिता-पुत्र के बसपा में शामिल होने से बिगड़ सकती है तमाम दलों की सियासी गणित

अम्बेडकरनगर। जन कल्याण की पताका को बुलंद करने वाले पूर्व विधायक पवन कुमार पाण्डेय एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इस बार यह चर्चा उस सियासी दांव को लेकर है जो न सिर्फ बसपा में ब्राह्मणों के झुकाव को बल देने वाली है बल्कि जिले की कटेहरी विधानसभा में सियासी उथल-पुथल भी खड़ा कर सकती है। 

हालांकि पवन कुमार पाण्डेय अभी बसपा में विधिवत शामिल नहीं हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जब वे बसपा का झंडा थामेंगे तब उनके होनहार पुत्र प्रतीक पांडेय कटेहरी विधानसभा क्षेत्र से सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आएंगे। जिससे तमाम दलों की सियासी गणित बिगड़ सकती है।

उल्लेखनीय है कि उनके समर्थकों ने बसपा के प्रति झुकाव और अंदर अंदर चली जा रही दांव पेंच से छनकर आ रही खबरों को सोशल मीडिया पर  शेयर कर नई चर्चा खड़ी कर दी है। वैसे भी उनके बीएसपी में जाने के लगाए जा रहे कयास को राम अचल राजभर और लालजी वर्मा के बसपा से निकाले जाने के बाद बल मिल गया है। बसपा को भी इन दोनों नेताओं के निकाले जाने के बाद एक मजबूत और दमदार नेतृत्व की आवश्यकता है। जिसे पवन कुमार पांडेय के रूप में पूरा किया जा सकता है।

ऐसे में जब बसपा ने अकबरपुर आलापुर और जलालपुर से अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है सिर्फ टांडा और कटेहरी शेष है तब श्री पाण्डेय और कटेहरी विधानसभा क्षेत्र को जोड़कर नई सियासी चर्चा के बीच उनके बीएसपी में शामिल होने की चर्चा को बल मिला है। यदि ऐसा हुआ तो कटेहरी में न सिर्फ दिलचस्प मुकाबला होगा बल्कि कई अन्य सियासी दलों की गणित भी गड़बड़ हो सकती है। क्योंकि उनके शामिल होने से पहले ही जब सियासी तापमान बढ़ गया है तो शामिल होने के बाद क्या होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि श्री पाण्डेय युवा अवस्था मे 1991 में अकबरपुर से शिवसेना के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उस समय वे शिवसेना के उत्तर प्रदेश में अकेले विधायक थे। उसके बाद उन्होंने और भी चुनाव लड़ा लेकिन थोड़े अंतराल से मात खा गए थे। उन्होंने सुल्तानपुर से बीएसपी किस्मत आजमाई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

श्री पाण्डेय अंबेडकरनगर ही नहीं आसपास के जनपदों में ब्राह्मणों के छत्रप माने जाते हैं। जिनके बसपा में शामिल होने के बाद पार्टी मजबूत होगी तो उसका इनाम उन्हें जरूर मिलेगा। यदि उन्हें कटेहरी से बस बसपा ने टिकट दिया तो वहां एक नया सियासी इतिहास रचा जाएगा।



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