किसान आंदोलन: 15 जनवरी तक का ये नया अल्टीमेटम

किसान आंदोलन: 15 जनवरी तक का ये नया अल्टीमेटम


शाहजहांपुर खेड़ा
बॉर्डर से किसानों की घर वापसी शुरू हो गई है। मोदी सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने पर किसानों में जीत की खुशी का माहौल है। वहीं, शाहंजापुर खेड़ा बॉर्डर से किसान आंदोलन को लेकर किसान नेता डॉ. सौरभ राठौड़ हनुमानगढ़ ने कहा है कि आंदोलन को सिर्फ सस्पेंड किया गया है ना कि खत्म किया गया है।

किसान एवं किसानों की एकजुटता की जीत

राठौड़ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अभी एमएसपी गारंटी कानून सहित अन्य मांगों को लेकर सिर्फ आश्वासन दिया है और चूंकि उन्हें मोदी सरकार के आश्वासन पर भरोसा नहीं है। इसलिए एमएसपी गारंटी कानून सहित अन्य सभी मांगे पूरी होने तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।वहीं, तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर बोलते हुए किसान नेता डॉ. सौरभ राठौड़ हनुमानगढ़ ने कहा कि ये देश के किसान एवं किसानों की एकजुटता की जीत है और इस जीत का श्रेय राठौड़ ने पूरी तरह से किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसान योद्धाओं को देते हुए कहा कि यह जीत पूरी तरह किसान आंदोलन में शहीद हुए किसान योद्धाओं को समर्पित है।

आंदोलन को अभी सिर्फ स्थगित किया गया

राठौड़ ने यह भी कहा कि देश के किसानों की एकजुटता के चलते मोदी सरकार को किसानों के सामने घुटने टेकने पड़े और तीनों किसान विरोधी काले कृषि कानूनों को संविधानिक तरीके से रिपील करना पड़ा।किसान आंदोलन को अभी सिर्फ स्थगित किया गया है क्योंकि एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनना एवं किसानों पर आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेना एवं किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को उचित कंपनसेशन देने जैसी मांगों पर अभी सरकार की तरफ से आश्वासन के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

15 जनवरी तक का समय तय किया

किसान नेता डा. सौरभ राठौड़ ने कहा कि सरकार के द्वारा दी गई लिखित चिट्ठी में किए गए वायदों पर सरकार कितना खरा उतरती है। इसको लेकर 15 जनवरी तक का समय तय किया गया है। 15 जनवरी को पुन: संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक आयोजित की जाएगी। उक्त बैठक में सरकार के द्वारा किए गए वादे की समीक्षा करते हुए किसान आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले सहित पूरे राजस्थान में किसान आंदोलन में सहयोग करने वाले एवं सभी टोल प्लाजाओं पर निरंतर डटे रहने वाले तमाम किसानों का धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

1 साल से किसान आंदोलनरत थे

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के द्वारा 5 जून 2020 को अध्यादेश के रूप में लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ 1 साल से ज्यादा समय से लगातार दिल्ली की सीमाओं पर एवं देश के विभिन्न प्रांतों एवं जिलों में लगातार किसान आंदोलनरत थे। देश के विभिन्न किसान संगठनों, किसानों एवं किसान नेताओं के भारी विरोध के चलते केंद्र सरकार ने घुटने टेकते हुये तीनों कृषि कानूनों को लोकसभा एवं राज्यसभा में रिपील किया।

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