हैं। इनमें रामरती देवी तथा भीम प्रसाद सोनकर शामिल हैं। 1962 से 2017 तक विधानसभा के 17 चुनाव हुए हैं। इसमें 15 आम और दो उपचुनाव शामिल हैं।
इन चुनावों 14 चेहरे विधायक बने हैं। रामरती देवी लगातार दो चुनाव तो भीम प्रसाद सोनकर 15 साल के अंतराल पर दूसरा चुनाव जीत सके। रामरती देवी 1974 और 1977 में और भीम प्रसाद सोनकर ने 1996 तथा 2012 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। इनके अलावा अन्य किसी को भी मतदाताओं ने दूसरी बार विधायक नहीं चुना। बाबा गोविंद साहब की तपोस्थली और आजादी की लड़ाई के नायक बाबू बसुधा सिंह की जन्म स्थली वाली विधानसभा की इस सीट के 176629 पुरुष और 161794 महिला कुल 338428 मतदाता इस बार किसके गले में जीत की माला डालेंगे यह तो आने वाली 10 मार्च को पता चलेगा। मगर इस बार भी काफी घमासान है।
किस पार्टी ने किस पर लगाया है दांव
सपा ने सियासत के पुराने खिलाड़ी त्रिभुवन दत्त पर और कांग्रेस ने महिला कार्ड खेलते हुए नए चेहरे सत्यमवदा पासवान पर तथा बसपा ने स्वास्थ्य महकमे से सेवानिवृत्त महिला अधिकारी के डी गौतम पर दांव लगाया है। लेकिन भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
कब कौन चुना गया है विधायक
1962 में सुखराम दास, कांग्रेस
1967 में बादलराम, एसएसपी
1969 में राम अवध, बीकेडी
1974 में रामरती देवी, कांग्रेस
1977 में रामरती देवी, जनता पार्टी
1980 में रामजी राम, कांग्रेस
1985 में कृष्ण कुमार, कांग्रेस
1989 में कुंवर अरुण, जनता दल
1991 में त्रिवेणीराम, भाजपा
1993 में घामू राम भास्कर, बसपा
1996 में भीम प्रसाद सोनकर, सपा
2002 में मायावती, बसपा
2002 में (उप चुनाव) जयराम विमल, बसपा
2007 में त्रिभुवन दत्त, बसपा
2012 में भीम प्रसाद सोनकर, सपा
2017 में अनीता कमल, भाजपा