ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि अच्छी बात ये है कि इस वेरिएंट से संक्रमित व्यक्ति में गंभीर संक्रमण के मामले कम देखने को मिले हैं। लेकिन अब इस वेरिएंट को लेकर एक चिंताजनक बात सामने आई है। कैम्ब्रिज इंस्टीट्यूट ऑफ थेराप्यूटिक इम्यूनोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज में क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर रविंद्र गुप्ता ने कहा है कि यह वेरिएंट बच्चों को बीमार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन भले ही डेल्टा वेरिएंट से कम खतरनाक हो लेकिन यह टीका न लगवाने वाले लोगों के लिए घातक हो सकता है। गुप्ता ने कहा कि ओमिक्रॉन के संक्रमण से बचने के लिए तीसरी डोल लेना आवश्यक है, क्योंकि इसे रोकने के लिए शरीर में एंटीबॉडी का उच्च स्तर होना आवश्यक है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि संभव हो तो सबसे पहले कमजोर वयस्कों और बच्चों को इसका टीका लगाया जाए ताकि वायरस को काबू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर ऐसी धारणाएं कि यह एक प्राकृतिक टीका है, खतरनक है क्योंकि हम अभी भी संक्रमण और इसके परिणामों के बारे में ज्यादा नहीं जान पाए हैं। गुप्ता ने कहा कि ऊपरी श्वसन पथ के तीव्र संक्रमण के कारण ओमिक्रॉन बच्चों को बीमार बना रहा है, लेकिन बच्चों में अभी तक इससे कोई गंभीर संक्रमण देखने को नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि हम ओमिक्रॉन के जीव विज्ञान का अध्ययन कर रहे हैं, हमने पाया है ओमिक्रॉन उन कोशिकाओं को अपना निशाना बनाता है जिनमें TMPRSS2 की कमी होती है। गुप्ता ने यह भी भविष्यवाणी की कि ओमिक्रॉन की लहर जल्द ही समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह वेरिएंट बहुत तेजी से फैलता है इसलिए बहुत जल्द एक बड़ी आबादी इससे संक्रमित हो जाएगी। इसलिए बहुद जल्द हम इसकी पीक देखेंगे और इसके बाद यह खत्म हो जाएगा।