इमाम हुसैन ने हक और इंसाफ के लिए इंसानियत का परचम उठाकर यजीद से जंग करते हुए शहीद होना बेहतर समझा, लेकिन यजीद जैसे बेईमान और भ्रष्ट शासक से बैअत करना मुनासिब नहीं समझा । यजीद के सिपाहियों ने इमाम हुसैन को चारों तरफ से घेर लिया था नहर का पानी भी बंद कर दिया गया था, ताकि इमाम हुसैन और उनके साथी यहां तक कि महिलाएं और बच्चे भी अपनी प्यास नहीं बुझा सकें इमाम हुसैन की शहादत दरअसल दिलेरी की दास्तान है । मजलिस में प्रमुख रूप से मौलाना इंतजार मेहंदी फ़ैजी मौलाना अदीब आज़मी सैय्यद मतलूब हुसैन सैय्यद इमरान रज़ा कैफ़ी रिज़वी सैय्यद सदफ अब्बास समेत अन्य मौजूद रहे ।
रिपोर्ट:- हसन अब्बास
