मायावती ने जगदीप धनखड़ को दिया समर्थन

मायावती ने जगदीप धनखड़ को दिया समर्थन

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मायावती ने एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को समर्थन देने का एलान किया है। मायावती ने ट्विट कर उपराष्ट्रपति चुनाव में धनखड़ को समर्थन देने का एलान किया। उन्होंने लिखा, 'सर्वविदित है कि देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में सत्ता व विपक्ष के बीच आम सहमति ना बनने की वजह से ही इसके लिए फिर अन्ततः चुनाव हुआ। अब ठीक वही स्थिति बनने के कारण उपराष्ट्रपति पद के लिए भी दिनांक छह अगस्त को चुनाव होने जा रहा है। बीएसपी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए हो रहे चुनाव में भी व्यापक जनहित और अपनी मूवमेंट को ध्यान में रखकर जगदीप धनखड़ को समर्थन देने का फैसला किया है। इसकी मैं आज औपचारिक रूप से घोषणा भी कर रही हूं।'  

आखिर मायावती धनखड़ को ही क्यों दिया समर्थन? 

1. जातिगत समीकरण मजबूत करना: जगदीप धनखड़ जाट समुदाय से आते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में जाट समुदाय के वोटर्स की अच्छी खासी संख्या है। अलगे साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां 20 फीसदी जाट वोटर्स हैं। मायावती की पार्टी भी यहां मैदान में उतरेगी। ऐसे में वह जाट समुदाय को नाराज नहीं करना चाहती है। राजस्थान में बसपा पांच से छह विधानसभा सीट जीत लेती है। इसलिए वह धनखड़ का समर्थन करके जाट बिरादरी को यह संदेश देना चाहती हैं कि वह उनके साथ खड़ी हैं। हरियाणा में भी चुनाव होने हैं। यहां भी जाट बिरादरी काफी संख्या में है। 

2. सम्मान न मिलने की नाराजगी: विपक्ष ने जब-जब बैठक की है, बहुजन समाज पार्टी को नहीं बुलाया गया है। इस एलान से मायावती अपनी नराजगी भी जाहिर कर ना चाहती हैं। इसके साथ ही मायावती उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ को समर्थन देने का एलान करके विपक्ष को यह बताना चाहती हैं कि भले ही उनका समय खराब चल रहा है, लेकिन अभी वह कमजोर नहीं हुई हैं। 

3. भाजपा को लेकर सॉफ्ट रवैया:  भले ही सार्वजनिक तौर पर मायावती कहती हैं कि वह भाजपा से नहीं डरती हैं, लेकिन उनके फैसलों और बयानों से काफी कुछ खास होता है। जहां एक तरफ विपक्ष भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर लड़ाई लड़ता है, वहीं मायावती के बयान काफी सॉफ्ट नजर आते हैं। मायावती भाजपा के खिलाफ ज्यादा हमलावर नहीं दिखती हैं।

लंबे समय तक उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर यूपी में राज किया और भाजपा ने ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। ये उसकी वजह हो सकती है। हालांकि, उनके आलोचक इसे ईडी, सीबीआई जैसी एजेंसियों का डर बताते हैं। अक्सर उन पर आरोप लगता है कि वो सरकार को नाराज नहीं करना चाहती हैं। इसलिए सत्ताधारी दल के प्रति नर्म रुख दिखाती है।   



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