बीजेपी के खिलाफ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव का 'मैजिक' नजर नहीं आ रहा है.
देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाला है. लेकिन अभी से हर पार्टी मिशन मोड़ में अपनी तैयारी कर रही है. यूपी में लोकसभा चुनाव के लिए हर पार्टी अपनी तैयारी तेज कर चुकी है. बीजेपी के खिलाफ समाजवादी पार्टी और बीएसपी ने अलग-अलग लड़ने का फैसला किया है.
इन सबके बीच बीजेपी को अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव ने साथ मिलकर चुनौती देने का फैसला किया है. मैनपुरी उपचुनाव के बाद से चाचा शिवपाल की पार्टी का सपा में विलय हो चुका है. सपा ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया है. चापा शिवपाल यादव अब अपने पुराने अंदाज में नजर आ रहे हैं. वे लगातार राज्य के अलग-अलग जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं. सपा के संगठन को फिर से पुरानी धार देने में लगे चाचा शिवपाल भी अपने पुराने अंदाज में है.
लेकिन इस बीच कुछ सर्वे के आंकड़े ऐसे आए हैं. जिससे उनका मैजिक थमता नजर आ रहा है, अगर ऐसा होता है तो अखिलेश यादव के लिए भी चिंता की बात है. लेकिन दूसरी ओर बीजेपी के लिए बड़ी राहत दिख रही है. हालांकि पार्टी अभी भी अपने टारगेट से काफी दूर दिख रही है, लेकिन सर्वे में पार्टी अपने पिछले चुनावों के प्रदर्शन को दोहराती हुई नजर आ रही है. अगर सर्वे की रिपोर्ट को मानें तो बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को तगड़ा झटका लगते भी नजर आ रहा है.
मूड ऑफ नेशन सर्वे की बात करें तो यूपी में बीजेपी को बड़ी जीत तो मिल रही है. सर्वे में बीजेपी को यूपी में 70 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि राज्य में 80 लोकसभा सीट है. जबकि 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन को यूपी में 64 सीट पर जीत मिली थी. जिसके बाद बीजेपी ने राज्य में 80 में से 80 सीट पर जीत दर्ज करने का लक्ष्य रखा है. अब सर्वे के आंकड़ों ने बीजेपी को राहत दी है तो चाचा शिवपाल के प्रयासों को झटका लगते दिख रहा है.
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