मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में अब तक 160 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं
मणिपुर में हो रही हिंसा को लेकर लगातार केंद्र की मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. अब इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मणिपुर की घटना बहुत बड़ी घटना है लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है. विपक्ष की बस यही मांग है कि इसपर सदन में चर्चा हो. लोगों को इसपर अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.
गौरतलब है कि मणिपुर के मोरेह जिले में बुधवार को भी उपद्रवियों के एक समूह ने कई घरों में आग लगा दी. अधिकारियों ने यह जानकारी दी खाली पड़े ये घर म्यांमा सीमा के करीब मोरेह बाजार क्षेत्र में थे. अधिकारियों ने बताया कि यह आगजनी कांगपोकपी जिले में भीड़ द्वारा सुरक्षा बलों की दो बसों को आग के हवाले करने की घटना के कुछ घंटों बाद हुई. इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.
यह घटना सपोरमीना में उस समय हुई, जब बसें मंगलवार शाम दीमापुर से आ रही थीं. अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय लोगों ने मणिपुर की पंजीकरण संख्या वाली बस को सपोरमीना में रोक लिया और कहा कि वे इस बात की जांच करेंगे कि बस में कहीं दूसरे समुदाय का कोई सदस्य तो नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि उनमें से कुछ लोगों ने बसों में आग लगा दी.
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में अब तक 160 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और कई अन्य घायल हुए हैं. राज्य में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.
