उत्तर प्रदेश में राज्य की योगी आदित्यनाथ की सरकार में विस्तार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. राजभवन से भी निमंत्रण भेजा जा चुका है. माना जा रहा है कि इस कैबिनेट विस्तार के जरिए यूपी में बीजेपी में मिशन 80 पर जुट रही है. सूत्रों के अनुसार दारा सिंह चौहान, सुनील शर्मा, ओपी राजभर और अनिल कुमार मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. आईए हम आपको बताते हैं कि ये चारों लोग ही क्यों कैबिनेट विस्तार के लिए चुने गए?
दारासिंह चौहान के बारे में माना जाता है कि पिछड़े समाज में उनकी मजबूत पकड़ है. इसके अलावा मऊ और आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में उनका असर है. दारा के चुनावी सफर की बात करें तो उन्होंने साल 2022 में सपा के टिकट पर घोसी का चुनाव जीता और जुलाई 2023 में बीजेपी में वापसी कर ली. हालांकि सितंबर 2023 में हुए घोसी उपचुनाव में वह हार गए.
इसके अलावा सवाल यह भी उठता है कि आखिर राजभर क्यों जरूरी हैं. दअसल यूपी में राजभर करीब 4 % हैं. राजभर के बारे में दावा है कि उनकी पूर्वांचल में 18 जिलों में पकड़ है. वहीं लोकसभा 16 सीटों पर असर है. माना जाता है कि SBSP का वाराणसी, जौनपुर,घोसी,लालगंज,गाजीपुर,आंबेडकर नगर, सलेमपुर, आजमगढ़, बलिया,चंदौली,इलाहाबाद,फैजाबाद,बस्ती,गोरखपुर, मछली शहरऔर भदोही लोकसभा सीट पर असर है.
बात सुनील कुमार शर्मा की करें तो उनकी पहचान ब्राह्मण नेता के तौर पर हैं. वह यूपी की साहिबाबाद विधानसभा सीट से विधायक हैं. साल 2022 में तीसरी बार विधायक बने. यूपी में ब्राह्मण 10-12% है जिनका 10+ सीटों पर असर माना जाता है.
उधर, रालोद के अनिल कुमार भी दलित वोटों को सहेजने के लिए जरूरी माने जा रहे हैं. यूपी में 20.7 % दलित हैं. कुल 20 करोड़ जनसंख्या में दलितों की 4 करोड़ 13 लाख आबादी है. लोकसभा के लिहाद से देखें तो राज्य की 42 लोकसभा सीटों पर दलित मतदाताओं का असर है. यूपी के 10 जिलों में 25 से 30 % आबादी है. वहीं 5 जिलों में 30 से 40 % आबादी है..
यूपी के 9951 गांव में 50% से ज्यादा आबादी है. वहीं यूपी के 17429 गांवों में 40% से ज्यादा आबादी है. बता दें 80 लोकसभा सीटों में 17 सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं. साल 2014 में BJP ने सभी 17 सीटें जीतीं. वहीं 2019 में 14 BJP, 1 अपना दल और 2 सीटें BSP ने जीतीं
ऐसे में यह भी देखना होगा कि लोकसभा चुनाव में दलित समाज कब किसके साथ रहा. CSDS Lokniti के अनुसार साल 2014 में कांग्रेस को 19%, BJP को 24 %, बसपा को 14 % और अन्य को 43 % वोट मिले थे. वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 20%, बीजेपी को 34% , बसपा को 11% और अन्य को 35% दलित वोट मिले थे.
