अंबेडकरनगर : सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचते ही मंगलवार को हंसू का पूरा और करिया लोनिया का पूरा गांव भी पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गए। संपर्क मार्ग जलमग्न हो जाने के कारण ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव का संचालन करना पड़ा। इससे पहले दो गांवों में नाव चल रही थी, अब इन दो नए गांवों में भी नावों की आवश्यकता पड़ गई है।
पटपरवा और बद्रीनाथ का पूरा गांव में छप्परनुमा घरों और पशुशालाओं में बाढ़ का पानी घुस गया है। माझा कम्हरिया और अराजी देवारा के दो दर्जन मजरे भी चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। लगभग 350 बीघा खेत पानी में डूब चुके हैं, जिससे किसानों के सामने धान की फसल को बचाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर:
सोमवार देर शाम तक सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 85.56 मीटर से ऊपर पहुंच गया था। जलस्तर में लगातार वृद्धि होती रही, जिससे हंसू का पूरा और करिया लोनिया का पूरा गांव का संपर्क मार्ग जलमग्न हो गया। यहां के निवासियों के लिए नाव चलाकर आवागमन की व्यवस्था की गई। इससे पहले प्रसाद कुर्मी का पूरा और पटपरवा के संपर्क मार्ग भी जलमग्न हो चुके थे, जहां पहले ही नाव चलाई जा रही है।
बाढ़ से प्रभावित घर और पशुशाला:
पटपरवा के निवासी रामबचन के घर में बाढ़ का पानी घुसने के कारण उन्हें अपने परिवार के साथ गांव के भीतर स्थित दूसरे घर में जाना पड़ा। बद्रीनाथ का पूरा स्थित एक पशुशाला में भी पानी भर गया, जिससे पशुपालकों के लिए संकट खड़ा हो गया है। माझा कम्हरिया और अराजी देवारा के कई मजरों में बाढ़ का पानी फैल चुका है, और अगर जलस्तर बढ़ता रहा, तो इन गांवों के अंदर भी पानी पहुंचने की संभावना है।
स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा शिविर :
बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। माझा कम्हरिया के हेल्थ वेलनेस सेंटर में स्वास्थ्य शिविर शुरू कर दिया गया है, जहां चिकित्सकों और कर्मचारियों की तैनाती के साथ पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी गई है और संचारी रोगों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही पशु चिकित्सा शिविर भी स्थापित किए गए हैं, जहां पशुपालकों को पशुओं को बीमारियों से बचाने के टिप्स दिए जा रहे हैं।
फसल और चारे का संकट :
तेजी से बढ़ते जलस्तर के कारण 350 बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को फसल के नुकसान का डर सता रहा है। स्थानीय किसानों ने बताया कि पानी भर जाने से फसल बचाना मुश्किल हो गया है, और अगर फसल बर्बाद होती है, तो आर्थिक संकट गहरा सकता है। इसके अलावा, खेतों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे का भी संकट उत्पन्न हो गया है।
प्रशासन का आश्वासन :
एसडीएम आलापुर सुभाष सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। पांडेय का पूरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय को बाढ़ चौकी के रूप में स्थापित किया गया है, और पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी की जा रही है।
