अम्बेडकरनगर: पाँच विस क्षेत्रों मे चुनाव लड़ रहे 9 दिग्गज दलबदलुओं की वजह से मतदाता भ्रमित

अम्बेडकरनगर: पाँच विस क्षेत्रों मे चुनाव लड़ रहे 9 दिग्गज दलबदलुओं की वजह से मतदाता भ्रमित


जनता कहती है कि काश ये दलबदलू न होते तो......

आने वाले हैं (आ गये हैंशिकारी मेरे गाँव में, जनता है चिन्ता की मारी मेरे गांव में.....

-रीता विश्वकर्मा

अम्बेडकरनगर जिले में कुल पाँच विधानसभा क्षेत्र हैं और मतदाता लगभग 20 लाख। विस चुनाव-2022 के महासंग्राम में सभी सीटों पर दिग्गजों ने ताल ठोंका है। चुनाव मतदान 6वें चरण में 3 मार्च को होना है। रिजल्ट 10 मार्च को आयेगा। प्रत्याशियों का जनसम्पर्क, स्टार प्रचारकों की आमद का क्रम जारी है। मतदाता भ्रमित। समर्थक उत्साहित और प्रत्याशी खप्तुलहवाश। ऐसा माहौल इस जिले में बनने के पीछे जो मुख्य कारण है, जिसे हमने महसूस किया है और हर प्रबुद्ध वर्गीय महसूस कर रहा है वह है पाँचों विस क्षेत्रों में दिग्गज दलबदलुओं का पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना। किसी ने 6 महीने पहले अपनी मूल पार्टी छोड़ा तो किसी ने चुनावी घोषणा के ऐन मौके पर। दलबदलुओं जिन्होंने समीक्षकों की पेशानी पर बल ला दिया है और मतदाताओं को भ्रमित कर रखा है, स्वयं खप्तुलहवाश से बने हुए हैं इन सबमें सर्व प्रमुख हम जिला मुख्यालय अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के बारे में जिक्र करेंगे। 

अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र से 2022 का विस चुनाव लड़ रहे दिग्गज दलबदलुओं में सपा के रामअचल राजभर का नाम सर्वाधिक चर्चा में है। बीते वर्ष पंचायत चुनाव के दौरान कथित रूप से पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने की वजह से इन्हें बसपा सुप्रीमो ने हाथी से उतारकर पैदल कर दिया था। 40 साल के अपने राजनैतिक कैरियर में पहली बार अपनी मूल पार्टी बसपा से बेदखल किये जाने पर राम अचल राजभर ने साइकिल की सवारी कर अपनी खिसियाहट दूर किया। बसपा के इस दिग्गज और पाँच बार अकबरपुर के पार्टी विधायक रहे राम अचल को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने वर्तमान चुनाव में सपा प्रत्याशी बनाया है। बसपा से सपा में जाते ही राम अचल राजभर से जुड़े हुए बसपा के आधार मत (कोर वोट) ऊहा-पोह की स्थिति में आ गये। 

दूसरे दिग्गज दो बार अकबरपुर नपाप के चेयरमैन रहे (पुराने बसपाई) और बीच में भाजपाई बने चन्द्र प्रकाश वर्मा ने दुबारा हाथी की सवारी करने और बसपा प्रत्याशी बनाये जाने पर बसपा के कोर वोट इनकी तरफ अपनी रूझान कर लिये ऐसा लोगों का मानना है। कई दलित नेताओं और बसपा समर्थकों, गरीब तबके के लोगों ने अकबरपुर विस प्रत्याशी चन्द्र प्रकाश वर्मा के चुनावी समर में बसपा प्रत्याशी के रूप में उतरने पर खुशी भी जताई है। बावजूद इसके चन्द्र प्रकाश जैसे दिग्गज दलबदलू कैण्डीडेट क्या चुनावी चक्रव्यूह सभी द्वार तोड़ पायेंगे यह भविष्य के गर्भ में है और उस भविष्य का अन्त 3 मार्च 2022 है। अकबरपुर विस क्षेत्र से तीसरे दिग्गज दलबदलू चुनावी कैण्डीडेट में भाजपा के धर्मराज निषाद आते हैं। धर्मराज निषाद ने अपने राजनीति का सफर बसपा की हाथी पर बैठकर शुरू किया था। बीते वर्षों इन्होंने बसपा छोड़कर कमल की डण्डी हाथ में पकड़ लिया और तभी से लखनऊ की पंचायत में पहुँचने के लिए आतुर दिख रहे हैं। इस बार के विस चुनाव में भाजपा ने अकबरपुर विधानसभा सीट से इन्हें अपना प्रत्याशित बनाया है। धर्मराज निषाद कटेहरी विधानसभा क्षेत्र से 3 बार बसपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं और मायावती सरकार में काबीना मंत्री भी रहे। इस समय भगवा पहन कर बसपा की विचार धारा के विपरीत भाषण सम्बोधित करके चुनाव जीतने का प्रयास कर रहे हैं। 

आइये आपको विधानसभा क्षेत्र कटेहरी के दिग्गज दलबदलू नेता और सपा प्रत्याशी के बारे में बता दें। ये हैं पुराने बसपाई और बसपा सरकार में काबीना मंत्री रह चुके लालजी वर्मा। लालजी वर्मा ने अपने 30-35 साल के राजनैतिक कैरियर की शुरूआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। पिछले वर्ष में हुए पंचायत चुनाव के उपरान्त इन्हें भी राम अचल राजभर के साथ ही बहन जी ने पार्टी निष्कासित कर दिया। लालजी वर्मा लाख दुआई देते रहे और राम अचल राजभर की तरह बसपा को ही अपना जीवन और राजनैतिक आधार कहते रहे। ना-ना करते हुए भी लालजी वर्मा ने राम अचल राजभर के साथ साइकिल की कर ही ली। कटेहरी विस क्षेत्र के वर्तमान चुनाव में लालजी वर्मा का बसपा से सपा में जाना और सपा का प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना बसपा के कोर मतदाताओं में बहुत बड़े भ्रम की स्थिति पैदा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि बसपा का आधार मत लालजी वर्मा का मोह त्याग चुका है। 

आइये अब जलालपुर विधानसभा क्षेत्र का रूख करते हैं। त्रिकोणात्मक संघर्ष में अपने-अपने नामों को चर्चा में जीवन्त करने वाले तीन दिग्गज प्रत्याशियों का जिक्र कर दिया जाये। इस सभी ने उक्त क्षेत्र की जनता को अपने दलबदल नीति से दिग्भ्रमित कर दिया है। पहले नम्बर पर दिग्गज राकेश पाण्डेय (सपा) जिन्होंने कुछ दिन पूर्व ही हाथी की सवारी छोड़कर साइकिल की सवारी कर लिया। बसपा का आधार मत और इनके समर्थक बौखला गये। वे लोग अभी भी सामान्य स्थिति में नहीं पहुँच सके हैं। एक बात का उल्लेख करना जरूरी है कि पिता स्वयं राकेश पाण्डेय सपा के विधानसभा प्रत्याशी हैं तो पुत्र रितेश पाण्डेय बसपा के अम्बेडकरनगर सांसद। पिता-पुत्र का सपा बसपा में अलग-अगल होना और समर्थन करना क्षेत्र के लोगों को असमंजस्य में डाल दिया है। 

दूसरे दिग्गज दलबदलू सभाष राय जो सपा से यहाँ के सिटिंग एम.एल.ए. रहे हैं। इनका सपा से भाजपा में जाना सपाइयों और इनके समर्थकों के गले नहीं उतर रहा है। सुभाष राय भाजपा प्रत्याशी के रूप में इस चुनाव में अपना सबकुछ दांव पर लगाकर जीत अपनी मुट्ठी में करने का प्रयास कर रहे हैं। इनके समर्थकों का कहना है कि सुभाष राय अवश्य ही पुनः एम.एल.ए. बनेंगे। तीसरे दिग्गज हैं डॉ. राजेश सिंह, जो वर्तमान में बसपा के कैण्डीडेट के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। बीते वर्ष तक राजेश सिंह भाजपा के सिपाही रहे। इन्होंने चुनाव के घोषणा के समय ही भाजपा छोड़कर बसपा ज्वाइन किया और अब बसपा कैण्डीडेट के रूप में जलालपुर से विस चुनाव लड़ रहे हैं। 

आलापुर विधानसभा क्षेत्र में आमने सामने के मुकाबले में भाजपा और सपा को कहा जा रहा है। यहाँ से खड़े सपा कैण्डीडेट त्रिभुवन दत्त को दिग्गज दलबदलू कहना गलत नहीं होगा। सफेद हाथी वाला नीला झण्डा थामे वर्षों राजनीति करने वाले दत्त ने बीते वर्ष स्वयं बसपा की बहन जी का साथ छोड़कर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की शरण में चले गये। इनके ऐसा करने से क्षेत्र के बसपा के अचंभित हो गये। राजनीति के जानकारों के अनुसार त्रिभुवन दत्त को सपा का कोर वोट मिलने की पूरी सम्भावना है। बसपा के पारंपरिक मतों के बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। त्रिभुवन दत्त दलितों के नेता कहे जाते हैं। अब देखना यह है कि बसपा के कार्यकर्ता के रूप में जिला पंचायत, विधायक, सांसद रहे त्रिभुवन दत्त को इस चुनाव में सपा कैण्डीडेट के रूप में क्षेत्र की जनता कितना पसन्द करती है। 

जब दलबदलुओं और विधानसभा क्षेत्रों में चर्चाओं के बीच रहने वाले दलबदलू चुनावी कैण्डीडेट्स की बात हो रही है। तब ऐसे में टाण्डा विधानसभा क्षेत्र की बसपा प्रत्याशी शबाना खातून का जिक्र करना लाजिमी हो जाता है। बता दें कि शबाना खातून नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा की अध्यक्ष हैं और बीते पिछले महीने तक समाजवादी पार्टी के प्रमुख लीडरों में शुमार रही। सपा द्वारा टिकट बंटवारे के समय इनको और इनके पति गौस अशरफ को तब सदमा लगा जब इन्हें टिकट न देकर पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा को सपा का टिकट दे दिया गया। पति-पत्नी और समर्थकों ने इसका जमकर विरोध भी जताया, लेकिन इस विरोध का सपा सुप्रीमो पर कोई असर नहीं हुआ। खिसियाकर चुनाव के ऐन मौके पर शबाना दम्पत्ति ने साइकिल छोड़ हाथी की सवारी कर ली। हाथी पर बैठते ही टाण्डा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व घोषित बसपा प्रत्याशी मनोज वर्मा का टिकट काटकर शबाना खातून को पार्टी प्रत्याशी बना दिया गया। कहते हैं कि मनोज वर्मा जैसे कर्मठ, मेहनती, ईमानदार बसपा के समर्पित कार्यकर्ता का टिकट काटने पर मनोज ने स्वयं और न ही इनके समर्थकों ने कोई विरोध जताया। पार्टी के उक्त निर्णय को सहज रूप से स्वीकार कर लिया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ऐसा करके मनोज वर्मा ने बहन जी के गुडबुक में अपना नाम दर्ज कराया है। जिसका सुफल उन्हें आने वाले समय में मिल सकता है। 

यह रही अम्बेडकरनगर जिले की पाँचों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहे दिग्गज दलबदलुओं की संक्षिप्त राम कहानी। इन दलबदलुओं में सभी पहले वर्तमान पार्टी के विरोध में लम्बा-चौड़ा भाषण व वक्तव्य देते रहे हैं परन्तु कुर्सी नदिया, कुर्सी साहिल, कुर्सी रस्ता, कुर्सी मंजिल के वशीभूत इन लोगों ने दल बदलकर चुनावी वैतरणी पार करने का जोखिम जरूर उठाया है। दलबदलुओं के इस कृत्य से अकबरपुर, कटेहरी, जलालपुर, आलापुर और टाण्डा विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता हौलदिल होकर रह गये हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि पार्टी को वोट करें या प्रत्याशी को? किससे कल्याण होने वाला है या उनकी बात कौन सुनेगा यह किसी की समझ में नही आ रहा है। बावजूद इसके चुनाव मतदान आसन्न है। प्रत्याशियों का गहन जनसम्पर्क जारी है। यहाँ हमें प्रख्यात कवि स्वर्गीय राजेन्द्र राजन की एक कविता याद आ रही है- आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में, जनता है चिन्ता की मारी मेरे गाँव में.............। आज के अंक में इतना ही शेष फिर.............। (रेनबोन्यूज समाचार सेवा)

रीता विश्वकर्मा

8423242878

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