विद्यालय व मदरसे बने मैरिज हॉल, शिक्षा विभाग मौन

विद्यालय व मदरसे बने मैरिज हॉल, शिक्षा विभाग मौन

- सत्यम सिंह

अम्बेडकरनगर।  विद्यालयों व मदरसों को मैरिज हाल के रूप में तब्दील कर जहां धन अर्जित करने का प्रयास किया जा रहा है वहीं छात्रों के भविष्य के साथ भी जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है और शिक्षा विभाग पूरी तरह मूक दर्शक बना नियम व कानून की धज्जियां उड़ा रहा है जिससे क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।

बताते चलें कि बढ़ती आबादी के कारण सार्वजनिक स्थलों की कमी स्पष्ट नजर आने लगी है जिसके कारण वैवाहिक कार्यक्रमों का आयोजन आज कल विद्यालयों व मदरसों में धड़ल्ले से किया जाने लगा है। जनपद के कई विद्यालयों व मदरसा प्रबन्धकों ने तो विधिवत वैवाहिक कार्यक्रमों की फीस तय कर रखी है हालांकि पूर्व में उक्त विद्यालयों व मदरसों में गरीब परिवारों के वैवाहिक कार्यक्रमों का आयोजन होता था और वो चंदा स्वरूप चंद रकम विद्यालय व मदरसों में दे देते थे लेकिन अब बाकायदा कार्यक्रमों की फीस तय कर दी गई है और स्थानों की कमी का फायदा उठाते हुए आजकल काफी तेजी से विद्यालयों व मदरसों में वैवाहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाने लगा है जिससे बच्चों की शिक्षा पर बुरा प्रभाव भी पड़ रहा है। विद्यालय प्रबंधकों का दावा है कि वो छुट्टी के दिन प्रांगण को वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए देते हैं लेकिन किसी भी प्रांगण में वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित होने के कारण तीन दिन तक विद्यालय में शिक्षा कार्य प्रभावित रहता है। जिससे अभिभावकों में आक्रोश है।

टाण्डा नगर क्षेत्र के कोई विद्यालयों व मदरसों में तो लगातार वैवाहिक व राजनीतिक तथा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन बिना अनुमति के किया जा रहा है जिसके कारण छात्रों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बहरहाल विद्यालयों व मदरसों को मैरिज हॉल के रूप में तब्दील किए जाने की परंपरा से अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है।

 

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