कुत्ता या श्वान भेड़िया कुल की प्रजाति है, जो सर्वत्र व्याप्त है, जैसे तोताराम जी जैसे नेताजी सर्वत्र व्याप्त हैं। कुत्ता बड़ा वफादार प्राणी होता है, ऐसा हमने सुना है।
- सुनील कुमार महला
कुत्ता चोरों-डाकुओं और किसी संकट में हमारी रक्षा करता है और इस प्रकार से वह आदमी का सच्चा साथी है।यही वजह है कि साहित्य और फिल्मों से लेकर राजनीति तक में कुत्तों का बड़ा महत्वपूर्ण रोल है। साहित्य में कुत्ता व्यंग्य का विषय है, फिल्मों में डॉयलॉग का विषय है तो राजनीति में कुत्ता 'कुत्तापंती' का विषय है। वैसे बेचारा कुत्ता बड़ा बदनाम है। आदमी यूं ही कुत्ते को हर जगह बदनामी के दागों में लपेट रहा है। अब देखिए न कितनी गलत बात है कि व्यक्ति के व्यवहार में लाख कोशिशों के बाद भी बदलाव नहीं दिखे तो हम बड़ी आसानी से यह कह देते हैं कि वह तो 'कुत्ते की दुम' है।
हमारा पड़ौसी देश पाकिस्तान तो कुत्तों का इतना बड़ा फैन है कि उसने अपने देश का नक्शा तक कुत्ते का बनाया है। यह उसका कुत्तों के प्रति घोर समर्पण है। हमें कुत्तों को यूं ही बदनाम नहीं करना चाहिए। अब कोई शराबी शराब के नशे में गाड़ी के नीचे आ गया तो इसमें भला कुत्तों का क्या दोष ? लेकिन लोग कुत्ते की वफादारी भूलते हुए बड़ी आसानी से कह देते हैं कि'वह तो कुत्ते की मौत'मारा गया। अब कोई हाड-तोड़ मेहनत करता है तो हम कह देते हैं कि वह तो 'कुत्ते की तरह' काम कर रहा है। बेचारा कुत्ता गाली का पर्याय बन गया है। तोताराम जी कहते हैं कि ये आदमी बड़ा स्वार्थी है, इसने धोबी के कुत्तके(कपड़े धोने के लिए एक मोटी लकड़ी) को भी कुत्ता बना दिया।मूल कहावत है 'धोबी का "कुतका" न घर का न घाट का'।
हर कोई बेचारे कुत्ते के पीछे पड़ा हुआ है। जो किसी के काम का नहीं उसके लिए कहावत बना दी-'धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का'। कितनी गलत बात है कि नेताजी सदन में बयानवीर बनकर लड़ते हैं तो मीडिया लिखता है कि-'सदन में सफेदपोशों में कुत्ता जंग हुई।' कोई नेता मीडिया को इंटरव्यू देते समय अपना चुनावी मेनिफेस्टो हाथ में लिए हुए गुर्राता है तो मीडिया लिखता है कि 'नेताजी कुत्ते की तरह गुर्राये और मेनिफेस्टो में वादे लहराये।' आदमी का वफादार होते हुए आदमी कुत्ते में मीन-मेख निकालता है।
अब किसी कुत्ते की पूँछ जब दोनों टाँगों के बीच अंदर की ओर मुड़ी हुई होती है तो इसका अर्थ निकाला जाता है कि फलां फलां कुत्ते ने दूसरे कुत्ते से अपनी हार स्वीकार ली है। यदि किसी कुत्ते की पूँछ दोनों टाँगों के बीच में दबी हुई परंतु अंदर मुड़ी हुई न हो तो इसका आशय आदमी 'दूसरे की सत्ता स्वीकारना' निकालता है। यदि किसी कुत्ते की पूँछ जमीन के समानांतर खड़ी हो तो इसका मतलब आदमी निकालता है कि, यह कुत्ता दूसरे कुत्ते को डरा रहा है। और यदि किसी कुत्ते की पूँछ टाँगों के बीच थोड़ी-सी भी बाहर की ओर लटक रही हो तो समझिए वह कह रहा होता है कि, ' उसे किसी से कोई लेना-देना नहीं है ।'
कुल,मिलाकर कुत्ता बदनाम ही होता है। और तो और आदमी यह तक कहता है कि 'घर आये कुत्ते को भी नहीं निकालते।' अब वोटर वोट डालते हैं और बेरोजगारी, अशिक्षा, महंगाई, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, अधिक टैक्स लगने पर बदनाम हमेशा कुत्ते को करते हैं। बड़ी आसानी से कह देते हैं कि हमने किस 'कुत्ते' को वोट डाल दिया। यह गलत परंपरा है। वफादार जंतु की यूं बदनामी कतई नहीं होनी चाहिए। गली-मोहल्ले में दो गुटों में लड़ाई छिड़ती है तो भी बेचारे कुत्ते ही बदनाम होते हैं। लोग कहते हैं कि वे तो कुत्तों की तरह लड़ रहे थे। यह गलत बात है कि लोग कहते हैं कि आज की राजनीति भी 'कुत्ता राजनीति' से प्रेरित है।
कोई गुस्से से लबालब तेज आवाज में बोलता है तो कहा जाता है कि वह 'कुत्ते की तरह भौंक' रहा है। कोई भूखा होता है तो यह कहते हैं कि वह 'कुत्ते की भांति' लार टपका रहा है। कोई चाटूकारिता करता है, चमचागिरी करता है तो भी बेचारे कुत्ते को ही घसीटा जाता है और कहा जाता है कि फलां फलां व्यक्ति तो 'कुत्ते की भांति पूंछ हिला' रहा है। महाभारत के युधिष्ठिर तक स्वर्ग के द्वार पर कुत्ते का त्याग नहीं करना चाहते थे, लेकिन आदमी न जाने कब से बेचारे कुत्ते के पीछे पड़ा है।
उलटी-सीधी बातें करने वाले को हम 'कुत्ते का काटा' कह डालते हैं। किसी की बेइज्जती करने के लिए हम आसानी से कह देते हैं-'कुत्ता कहीं का।' आदमी भी अजीब किस्म का प्राणी है जो बंदूक के घोड़ा को भी कुत्ता पुकारता है और किवाड़ के खटके को भी कुत्ता पुकारता है। यह गलत बात है कि कुत्ता आज गाली है, बेइज्जती है, नीचता का प्रतीक है लेकिन जनाब यह कुत्ता ही है जो सेना और पुलिस की मदद में सहायक है। इसलिए कुत्तों को आलतू-फालतू में बदनाम करके 'कुत्ता' कतई मत बनो। उसके साथ इज्ज्त से पेश आओ। कुत्ता ही एक ऐसा प्राणी है जो अनाज से भरे खेत से बिना कुछ खाये पीये खाली निकल जाता है, इसलिए कुत्ते की कद्र करो। अथ श्री कुत्ता पुराण समाप्तम्।
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सुनील कुमार महला,वार्ड संख्या-11, भगतपुरा रोड़, संगरिया, हनुमानगढ़, राजस्थान ,पिन कोड -335063 |
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