पाठ्यक्रम से बाहर पाकिस्तान की आटा स्ट्राइक

पाठ्यक्रम से बाहर पाकिस्तान की आटा स्ट्राइक

इन दिनों पाकिस्तान आटा-आटा चिल्ला रहा है। हरेक पाकिस्तानी को नींद में भी आटा नजर आ रहा है। सुना है कि वह इतिहास के सबसे बड़े आटा संकट का सामना कर रहा है। वैसे न, पाकिस्तान का दूसरा नाम ही संकट है और इस संकट पर आजकल घोर संकट पड़ गया है।


- सुनील कुमार महला






 सच तो यह है कि बेचारे पाकिस्तान को आटे का कोई हल नहीं मिल रहा है और आटा नहीं मिलने से पाकिस्तान शरीरों को बल(ताकत) नहीं मिल रहा है।इसीलिए,  बेचारे शरीफ प्रधानमंत्री बहुत शरीफ बनकर  'आटा मदद' मांगने के लिए जेनेवा पहुंच गये हैं। घरों में बरतन खाली हैं। पाकिस्तान की हालत आज माली है। आटे के लिए हर तरफ भगदड़ पर भगदड़ मची है। यहाँ तक कि खाद्य मंत्री जी तक आटे के स्थान पर पानी पीकर काम चला रहे हैं। उधर, सुना है कि टेक्सटाइल उधोग ने सत्तर लाख लोगों को नौकरी से भी निकाल दिया है। नौकरी तो गई सो गई, घर में आटा भी नहीं है। पहले नौकरी आटे का जुगाड़ तो कर देती थी। हाल फिलहाल, सस्ते आटे के फेर कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। अमिताभ बच्चन की फिल्म सत्ते पर सत्ता में जैसे सातों भाई 'आटे' पर टूटते हैं, उससे भी बदत्तर हालत आज पाकिस्तान की है। पाकिस्तान में इन दिनों आटे की डिमांड ज्यादा और सप्लाई कम है,ठीक वैसे ही जैसे यहाँ आतंकियों, आतंकवाद, गोला-बारूद की ज्यादा डिमांड रहती आई है। इसी डिमांड का नतीजा है कि बेचारे पाकिस्तान के कश्मीर-कश्मीर मांगते मांगते आटा मांगने के दिन आ गए। भिखमंगा बन गया पाकिस्तान। रोज आटे के लिए चिल्ला रहा है। अब आटा नहीं हथियारों को खाओ। इसी बीच, इमरान जी ने दावा किया है कि देश में आटा सौ रुपये लीटर पहुंच गया है। आटे की किल्लत में वे ये भी भूल गए हैं कि आटा लीटर में नहीं किलो में नापा जाता है। सिट्टी पिट्टी गुम हो चुकी है। उन्हें होश नहीं है कि क्या बोलना और क्या नहीं। इमरान साहब आटे को आम आदमी की सबसे बड़ी तकलीफ़ बता रहे हैं। गोला-बारूद, हथियार उन्हें तकलीफ नहीं लगती। वो कह रहे हैं उनके दौर में आटा पचास रूपये था, जो अब टैक्स लगकर कराची में सौ रुपये लीटर से ऊपर चला गया है। पाकिस्तान में आटे की जंग जारी है। आटे से पाकिस्तान लहूलुहान है।


यहाँ आटा-युद्ध छिड़ा है और आदमी से आदमी भिड़ा है। पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा चिल्ला रहा है और बेसुरे सुर में गा रहा है-'आटा दो,पैसे मत लो...आटा दो पैसे मत लो...!' उधर से एक विदेशी व्यापारी की आवाज आ रही है-'हरे कपड़े और चांद-तारों वालों-'पैसे दो,आटा लो...पैसे दो आटा लो... पैसे दे दो, आटा ले लो। इसी बीच एक पाकिस्तानी आदमी चिल्ला रहा है, टेर पर टेर लगा रहा है-'आटा नहीं दे सकते तो हमारे ऊपर गाड़ी चढ़ा दो, हमें ख़त्म कर दो…।' इस बयान पर विदेश के एक व्यापारी ने जबाब दिया-'खत्म को क्या खत्म कर दें।'  तुम तो पहले से ही खत्म हो। बहरहाल,आटा नहीं मिलने पर पाकिस्तान के लोग सड़कों पर लेटकर मरने की धमकी दे रहे हैं। धमकी में दम नहीं है। क्यों कि धमकी में भी दम आटे से ही आता है। उधर, मिचमिचाती आंखों और मोटे थोबड़े वाले चीन ने पाकिस्तान को ट्रेन की बेकार बोगियां देकर ठग लिया।


इन सभी बोगियां की क्षमता और गुणवत्‍ता इतनी बेकार है कि ये ट्रैक पर चल तक नहीं पा रही हैं। कोई उदार देश पाकिस्तान को आटा देने को तैयार भी हो जाए तो आटे को ढ़ोयेंगे कैसे ? घटिया बोगियां बेचकर चीन ने पाकिस्तान को 14 करोड़ नब्बे लाख डॉलर का कबाड़ बेचकर चूना लगाया और पाकिस्तान को अपना जिगरी यार बताया। बहरहाल, यदि चीन पाकिस्तान को ठीक-ठाक कंडीशन वाली बोगियां दे भी देता तो बेचारे पाकिस्तान के पॉयलट इन बोगियों को खाली पेट(बिना आटे के) दौड़ाते कैसे ? समस्या बड़ी विकट है। इसी बीच,  यहाँ भारतीय टीवी कार्टून 'मोटू और पतलू' का डॉयलॉग पढ़ना भी बहुत जरूरी है-'खाली पेट पाकिस्तान के दिमाग की बत्ती नहीं जलती।' खैर इसे छोड़िए, अजी ! हम तो लेखक होते हुए पाकिस्तान को वर्तमान में एक ही सुझाव देना चाहेंगे कि वह 'डेटोनेटर'(विस्फोटक) का नहीं 'आटे' की नेचर को ध्यान में रखे। हमेशा इस 'डेटोनेटर' (आतंकी घटनाओं में) में  ही अपना ध्यान गड़ाये रखेगा तो 'आटे की नेचर' का पाकिस्तान को पता चल जाएगा और फिर ऐ पाकिस्तान ! तू क्या खायेगा ? मैंने पूछा-'हाउज़ द जोश आफ्टर द शॉर्टेज ऑफ फ्लोर इन योवर कंट्री ?' तो पाकिस्तान ने मरा सा जबाब दिया-' अभी जिंदा हैं लेखक जी, नॉट डेड'। मैंने कहा-'तुम्हारी आटा तस्वीर बहुत कुछ कहती है।' पाकिस्तान ने जबाब दिया-' लेखक जी अभी तो और जलील होना बाकी है।' हम स्वयं को असल जलील तब मानें जायेंगे जब श्रीलंका की तरह हमारी भी 'लंका' लग जायेगी। आटे का घाटा है, क्योंकि पाकिस्तान ने आज तक हथियारों और आतंकियों को ही चाटा है। एक बात बताऊँ- आटे की किल्लत के बावजूद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ फेसबुक कमेंट के जरिए बहुत दशकों से लड़ाई छेड़ रखी है। वह राग अलापता है कि आटा नहीं तो क्या, हमारे पास अमरीका का,चीन का दिया डाटा तो है। फेसबुक पर पाकिस्तान कहता है-' क्या हुआ ग़र हमारे पास आटा नहीं है। हम हमारे कट्टर पड़ौसी को युद्ध में पानी पी- पीकर हरायेंगे। हम कट्टर पड़ौसी की अग्नि,ब्रह्मोस और पृथ्वी मिसाइल को बिना आटा खाये ही पीटेंगे और हर हाल में जीतेंगे। क्या हुआ ग़र हमारे पास आटा नहीं है। दुनिया में विश्वास बड़ी चीज है। विश्वास से पाकिस्तान अपना पेट भर सकता है। बहरहाल, आटे का क्रिकेट पाकिस्तान में चल रहा है। आटे ने 2000 प्रति किलो रन बना लिए हैं। आटे की स्ट्राइक रेट जबरदस्त है। बड़ा धुंधाधार बेट्समैन है आटा। आटे के भावों के लिए कमेंट्री हो रही है। न्यूज़ एंकर आटे का डिब्बा दिखाकर कैप्टन से इंटरव्यू ले रहा है। जबाब आ रहा है-'आटे को लेकर लड़के अच्छा खेले। इंसा-अल्लाह लड़कों ने अपनी पूरी जान लगा दी। ये तो चीन और अमेरिका वालों ने पाकिस्तान की पिच खराब कर दी, अन्यथा पाकिस्तान की स्थिति कुछ और ही होती। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारी टीम अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए कितनी मेहनत कर रही है। हमारी टीम नवीन ऊंचाइयों को छू रही है। एंकर ने आटा दिखाना बंद कर दिया है। कैप्टन बोल नहीं पा रहा है।  इंटरव्यू भी खत्म हो चुका है।


 उधर, पाकिस्तान के मालिक शरीफ, शरीफ बनकर आटे के लिए जिनेवा चले गये हैं, वे देश दुनिया को आटे की ऊंचाइयों से अवगत करा रहे हैं और कह रहे हैं कि ये आटा बड़ी खतरनाक चीज है।। मीडिया में हर ऱोज पाकिस्तान की आटा खबरें सुर्खियों में हैं। खबरें आ रहीं हैं-'पाक में आटा स्ट्राइक, आटा दामों में यकायक हाइक।' इसी बीच इमरान जी चिल्ला रहे हैं -'ये आटा स्ट्राइक पाकिस्तान में हुई ही नहीं... इंडिया और सारा मीडिया झूठ बोल रहा है।' वे कह रहे हैं-'पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन आटा स्ट्राइक पाठ्यक्रम से बाहर है।



सुनील कुमार महला,वार्ड संख्या-11, भगतपुरा रोड़, संगरिया, हनुमानगढ़, राजस्थान ,पिन कोड -335063


आर्टिकल का उद्देश्य पाठकों का स्वस्थ मनोरंजन करने तक सीमित है, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना इस आर्टिकल का उद्देश्य नहीं है


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