अंबेडकरनगर: मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यप्रणाली से स्वास्थ्य कर्मियों में व्यापक रोष , धन कमाऊ नीति अपनाने का आरोप

अंबेडकरनगर: मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यप्रणाली से स्वास्थ्य कर्मियों में व्यापक रोष , धन कमाऊ नीति अपनाने का आरोप

डॉ श्रीकांत शर्मा के धन-कमाऊ नीति से आम आदमी परेशान, धनी वर्ग मालामाल


पैसे दो, जिले में रहो या न रहो, सीएमओ की तरफ से ऐसी है छूट


सुविधा शुल्क देने वालीं कई एएनएम नहीं करती हैं अपनी ड्यूटी, प्रायः रहती है जिले से बाहर



-सत्यम सिंह


अम्बेडकरनगर। 03 जून 2023 को अपना खुद का दो वर्षीय स्वर्णिम कार्यकाल पूरा करने वाले जिले के स्वास्थ्य महकमे के मुखिया अपनी कार्यप्रणाली के चलते चर्चा में रहे हैं। अपने बारे में नकारात्मक चर्चाओं और प्रकाशित खबरों की अनदेखी करके सीएमओ ने भरपूर मनमानी किया। ऐसा कहने वाले लोगों की संख्या कुछ ज्यादा ही है। प्रबुद्ध वर्गीय लोगों के अनुसार, वर्तमान सीएमओ की कार्यप्रणाली गरीबों, असहायों के प्रति काफी कष्टकारी साबित हुई। 


लंबी भूमिका न बनाते हुए स्पष्ट कर दिया जाए कि इस समय डॉ श्रीकांत शर्मा जिले के सीएमओ हैं। इनकी नियुक्ति इस जिले में 03 जून 2021 को हुई थी। इसके पूर्व यहां इस जिले में डॉ अशोक कुमार सीएमओ के पद पर कार्यरत थे। इस जनपद में सीएमओ पद पर तैनाती के पूर्व डॉ श्रीकांत शर्मा जनपद शामली में अपर सीएमओ पद पर तैनात थे।


स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक दायित्व का निर्वहन करने वाले सीएमओ डॉ श्रीकांत शर्मा के बारे में कहा जाता है कि ये दायित्व के प्रति लापरवाह और उदासीन हैं। इन्हे पैसों से अधिक लगाव है। जो कर्मचारी और चिकित्सक इनके मांगी गई धन राशि प्रतिमाह समय से देता है, वह अस्पताल/स्थान पर पहुंचे या न पहुंचे, इस तरह की छूट सीएमओ द्वारा दी जाती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ व कर्मचारी समय पर नहीं मिलते हैं। इनकी धन कमाऊ नीति से विभाग के अनेकों स्वास्थ्य कर्मी परेशान और क्षुब्ध हैं। 


बताया जाता है कि इनके खाऊ-कमाऊ कार्यशैली से स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्त चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्य कर्मी परेशान हैं। सूत्रों के अनुसार, जिले के लगभग सभी सीएचसी और पीएचसी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों से सीएमओ द्वारा सौजन्य शुल्क की निश्चित धनराशि वसूली जाती है। सुविधा शुल्क न दे पाने पर स्वास्थ्यकर्मियों का निलंबन व स्थानांतरण जैसी कार्रवाई करने वाले सीएमओ से सभी आजिज आ गए हैं। 


मीडिया की खबरों के अनुसार, जिले के लगभग सभी प्रमुख बाजारों-कस्बों में संचालित होने वाले अस्पताल व पैथोलॉजी सेंटर पर सीएमओ की अपार कृपा है। सुपुष्ट सूत्रों द्वारा बताया जाता है कि अनाधिकृत अस्पतालों और अवैध पैथोलॉजी सेंटरों पर लिंग परीक्षण व गर्भपात जैसे कार्य बेखौफ किए जा रहे हैं। सीएमओ के संरक्षण में प्रतिमाह सौजन्य शुल्क के रूप में निश्चित रकम देकर अवैध नर्सिंग होम का संचालन निर्बाध किया जा रहा है। इसकी एवज में सीएमओ को मुंहमांगी रकम(सौजन्य/सुविधा शुल्क)  बगैर पंजीयन अस्पतालों और जांच केंद्रों के संचालकों द्वारा प्रतिमाह दिया जाता है। 


विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिले में लगभग तीन दर्जन से अधिक एएनएम जैसी महिला स्वास्थ्य कर्मी अपनी ड्यूटी नियमित रूप से नहीं करती हैं। ये लोग जनपद से बाहर अपने घरेलु व अन्य कार्यों से बाहर रहती हैं। इस तरह की छूट इन स्वास्थ्य कर्मियों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा दी गई है। इस बाबत कहा जाता है कि सीएमओ प्रतिमाह निश्चित सौजन्य शुल्क लेकर इन स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन आसानी से आहरित और वितरित कर दिया करते हैं। 


सूत्रों के अनुसार, ऐसी महिला स्वास्थ्यकर्मी जो प्रतिमाह सीएमओ द्वारा तय की गई सौजन्य शुल्क दे पाने में असमर्थता व्यक्त की जाती है, उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जाता है। मन मुताबिक कार्य करने के लिए इन महिला व अन्य पुरूष स्वास्थ्य कर्मियों को कम से कम दो हजार प्रतिमाह सुविधा शुल्क देना पड़ता है। इन सबके अलावा मनचाहा अस्पताल व स्थान पाने के लिए सीएमओ को अच्छी खासी रकम देनी पड़ती है। 


वर्तमान सीएमओ के बारे मे यह बताया जाता है कि बाह्य जनपदों में स्थानांतरित अनुभवी सहायकों से निजी तौर पर कार्य लेते हैं। ऐसा करने के पीछे उनकी मंशा विशुद्ध रूप से पारंपरिक धन कमाने की नीति ही है। इस समय कुछ सहायक जिनका बीते वर्ष इस जिले से तबादला हो चुका था, वे लोग सीएमओ के आमंत्रण पर अंबेडकरनगर आकर सीएमओ के आवासीय कार्यालय में नियमित रूप से समय देकर अपनी अनुभवी और धन कमाऊ सेवाएं दे रहे हैं। 


कहते हैं कि सीएमओ डॉ श्रीकांत शर्मा के रवैये से सत्ता पक्ष के अनेकों पदाधिकारी व कार्यकर्ता नाराज चल रहे हैं। फिर भी एक सुलझे तानाशाह की तरह सीएमओ अपने धन कमाऊ मिशन में जुटे हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आगामी कुछ महीनों उपरांत डॉ शर्मा सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जुलाई 2023 तक इनका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। विरोध और चिल्लपो करने वाले मुंह बजाकर रहेंगे।ये विभाग के मंडल और प्रदेश स्तरीय उच्चाधिकारियों को खुश किए हुए हैं। साथ ही, जिले के हाकिम को भी खुश रखने का प्रयास करते हैं। 


निवर्तमान जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन और सीएमओ डॉ श्रीकांत शर्मा की ट्यूनिंग जिले में सर्व विख्यात है। 

बहरहाल, कुछ भी हो, सीएमओ डॉ श्रीकांत शर्मा के दो वर्षीय कार्यकाल की जांच होनी चाहिए। घाटा-मुनाफा सार्वजनिक हो। इस तरह की मांग कई सामाजिक संगठनों ने उठाई है। देखना यह है कि क्या ऐसा हो पाएगा कि सीएमओ डॉ श्रीकांत जैसे जिला स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारी के कारनामों की जांच हो सके। 

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