अम्बेडकरनगर। घाघरा नदी का जलस्तर गत कुछ दिनों से बढ़ता हुआ नजर आ रहा था, जिससे जिले में संभावित बाढ़ का खतरा मंडराने लगा था। प्रशासन जहां अलर्ट पर था, वहीं मांझा और कछार क्षेत्र के निवासियों की चिंताएं भी तेजी से बढ़ गई थीं। हालांकि, बीते दो दिनों में घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से गिरावट आई है, जिससे प्रशासन सहित नदी किनारे बसे कछारवासियों ने राहत की सांस ली है।
सिंचाई खंड टांडा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उप जिलाधिकारी मोहन लाल गुप्ता के निर्देशन में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई थी। घाघरा नदी के बढ़ते-घटते जलस्तर पर पैनी नज़र रखते हुए, प्रशासन लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। 25 अगस्त को घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 0.12 मीटर नीचे रह गया था, जिससे बाढ़ का खतरा सिर पर मंडराता दिखा। लेकिन अगले दो दिनों में नदी का जलस्तर आधे मीटर से अधिक घटकर खतरे के निशान से 0.67 मीटर नीचे पहुंच गया है।
घाघरा नदी के जलस्तर में आई इस कमी से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। टांडा तहसील प्रशासन द्वारा लगातार जलस्तर की मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें। पानी का घटता स्तर न केवल प्रशासन के लिए राहत का संकेत है, बल्कि नदी किनारे बसे कछार के ग्रामीणों के चेहरों पर भी मुस्कान लौटा दी है।
हालांकि, प्रशासन की पैनी नजर अब भी बनी हुई है और हर सुबह-शाम घाघरा नदी के जलस्तर की रिपोर्ट तलब की जा रही है। घाघरा के पानी में कमी जरूर आई है, लेकिन टांडा तहसील प्रशासन ने सतर्कता को कम नहीं किया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए तैयारी पूरी रहे।
कछार में रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी घटता देख उन्होंने चैन की सांस ली है। इससे पहले, संभावित बाढ़ की आशंका ने उनके दिलों में डर पैदा कर दिया था, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में आ गई है।
