सी.एम.ओ. कार्यालय के इस बाबू पर आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारियों द्वारा आरोप लगाया गया है कि उनकी नियुक्ति के लिए 2 से ढाई लाख रूपए प्र्रतिव्यक्ति इस कर्मचारी द्वारा लिया गया था। पीड़ित स्वास्थ्य कर्मियों ने आरोप लगाया कि एक साल बाद उनकी नियुक्ति के नवीनीकरण के लिए पुनः उक्त बाबू द्वारा 1 से डेढ़ लाख रूपए की मांग की जाने लगी। जिसे न दे पाने की स्थिति में उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा। पीड़ित स्वास्थ्य कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन कर शरद श्रीवास्तव पर लाखों रूपए लेने का आरोप लगाया। इस गड़बड़झाला को मीडिया में काफी सुर्खियां मिलीं। परन्तु स्वास्थ्य महकमे के मुखिया ने इस पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
आखिर आरोपी बाबू के ऊपर क्यों नहीं की जा रही है कार्रवाई। जिम्मेदार अधिकारी प्रकरण से क्यों कतरा रहे हैं। क्या कारण है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी शरद श्रीवास्तव पर लगा रहे हैं आरोप। आखिर किन कारणों से दूसरे जनपद में स्थानान्तरित बाबू उस स्थान पर कार्य न कर अम्बेडकरनगर जिले में ही कर रहा है कार्य। क्या इस प्रकरण को जिलाधिकारी लेंगे संज्ञान।
बताया गया है कि शरद श्रीवास्तव का तबादला जुलाई महीने में ही बलरामपुर के लिए हो गया था। शरद श्रीवास्तव ने दूरभाषीय वार्ता के दौरान अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को मिथ्या ठहराते हुए इशारों-इशारों में इस प्रकरण में अम्बेडकरनगर सी.एम.ओ. कार्यालय के बहुचर्चित बाबू का इसमें संलिप्त होना बताया।