अम्बेडकरनगर। मौसम का पारा ज्यों-ज्यों लुढ़क रहा है, त्यों-त्यों सर्दी बढ़ रही है और सोशल मीडिया/मीडिया ने कोविड-19, ओमिक्रॉन एवं अन्य संक्रामक बीमारियों को छोड़कर मात्र स्वास्थ्य विभाग के एक ही बहुचर्चित सहायक की खबरों पर अपने को फोकस किया हुआ है। बाबू के मनमाने क्रिया-कलाप एवं धनकमाई की खबरें लगातार प्रसारित करने वाले मीडिया ने अब भी हार नहीं माना है।
हालांकि लोगों का कहना है कि उक्त बहुचर्चित बाबू की जड़ें विभाग में तो बहुत गहराई तक हैं ही साथ ही उसकी अन्य शाखाएँ बाहुबलियों, ठेकेदारों, सत्ता के गलियारों में फैली हुई हैं। यह बाबू जिला मुख्यालय अकबरपुर/शहजादपुर का सबसे धनाढ्य व्यवसाई परिवार से सम्बन्धित है। इसके स्वामित्व व साझे में अनेको प्रतिष्ठान हैं, कल कारखाने हैं और लघु एवं कुटीर उद्योग पुष्पित एवं पल्लवित हो रहे हैं। जिले के स्वास्थ्य विभाग के सभी उपकरण एवं अन्य सामग्रियाँ इसी के प्रतिष्ठानों एवं उद्योगों से निर्मित होती हैं, जो विभाग की मांग के अनुसार इसके द्वारा समय-समय पर आपूर्ति कराई जाती है।
इस समय सोशल मीडिया में सीएमओ कार्यालय के कई नवागत सहायकों की व्यथा-कथा प्रमुखता से प्रसारित हो रही हैं। इन सहायकों का कहना है कि उन्हें अभी तक किसी भी प्रकार का कोई जार्च नही दिया गया है। वे लोग महत्वहीन से होकर रह गये हैं। इन सभी का आरोप है कि सी.एम.ओ. कार्यालय के इस बहुचर्चित बाबू ने समस्त महत्वपूर्ण पटलों को अपने नाम करा लिया है। सीएमओ कार्यालय में इस बहुचर्चित सहायक का एक छत्र राज कायम हो चुका है। इसके बारे में बताया जाता है कि अपने कई हित-मित्रों को बाह्य जनपदों से अपने दम पर बुलाकर स्वयं के विभागीय लूट-पाट में सहभागी बनाया हुआ है। और दोनों हाथों से धन एकत्र कर रहा है।
सोशल मीडिया में प्रसारित खबरों के अनुसार उक्त बाबू ने छद्म नाम से कई फर्में खोल रखी हैं, जिनमें ठेकेदारों के सहयोग से लाखों की कमाई इसके द्वारा की जाती है। कोरोना काल से अब तक अस्पतालो के चद्दर, तकिए, मास्क निर्मित करवाकर इसके द्वारा सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा आवश्यक स्वास्थ्य सामग्रियों में दवाओं की सप्लाई भी इसके द्वारा की जाती है। मेज-कुर्सी, आलमारी विभाग के अस्पतालों में इसी बाबू के द्वारा आपूर्ति कराई जाती है। सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों एवं माफिया किस्म के लोगों से याराना रखने वाले इस बाबू ने विभाग के बड़े से लेकर सभी छोेटे मुलाजिमों को मूक बधिर बना रखा है।
इस समय सोशल मीडिया में इस बाबू के कारनामों की कड़ी में 31 अनुबन्धित वाहन और उनका रख-रखाव व उससे होने वाली कमाई चर्चा का विषय बनी हुई है। मीडिया की खबरों के अनुसार जिले के सभी अस्पतालों एवं सी.एम.ओ. कार्यालय में टेण्डर के आधार पर इस बाबू द्वारा लोगों से उनके वाहन अनुबन्धित कराये गये हैं। प्रतिवाहन 2 हजार रूपए की दर से यह बाबू सभी वाहन मालिकों से सुविधा शुल्क भी लेता है। इसके अलावा वाहनों के रख-रखाव, चालक सैलरी, ईंधन-मोबिल खर्च के नाम पर हजारों रूपए प्रतिमाह इस बाबू की कमाई बताई जाती है।
बता दें कि इस बाबू का स्थानान्तरण जुलाई 2021 में बाह्य जनपद के लिए हो गया था, क्योंकि यहाँ इसने अपनी सरकारी सेवा का 22 साल पूरा कर लिया था। परन्तु घाघ एवं धूर्त पैसे वाले बाबू ने अपनी (अल्प) विकलांगता का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर स्थानान्तरण रूकवा लिया। इससे इस बाबू का मनोबल और बढ़ गया है और अंगद का पाँव बना अपनी मनमानी कर रहा है।